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लड़की को पीरियड आए थे, टीचर ने पेड़ लगाने से रोक दिया; कहा- दूर रहो, पेड़ जल जाएंगे

मामला महाराष्ट्र के नाशिक के एक स्कूल का है.

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नासिक ज़िले की एडिशनल कलेक्टर और TDD प्रोजेक्ट अधिकारी वर्षा मीणा ने छात्रा से मिलीं.
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सोम शेखर
28 जुलाई 2022 (Updated: 28 जुलाई 2022, 18:10 IST)
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महाराष्ट्र के नाशिक ज़िले की एक सरकारी आवासीय स्कूल में पढ़ने वाली एक आदिवासी छात्रा का आरोप है कि उसके एक शिक्षक ने उसे पेड़ लगाने से रोका. छात्रा के मुताबिक, टीचर ने कहा कि उसे पीरियड्स आए हुए हैं और अगर वो पेड़ लगाएगी तो पेड़ उगेंगे नहीं, जल जाएंगे.

आरोप लगाने वाली छात्रा 12वीं में पढ़ती है. नाशिक के त्र्यंबकेश्वर तालुका इलाक़े के देवगांव स्थित सेकंडरी ऐंड हायर-सेकंडरी आश्रम स्कूल में ये घटना हुई. 

तुम पेड़ लगाओगी तो पेड़ जल जाएंगे

शिकायत में कहा गया है कि टीचर ने पिछले हफ़्ते स्कूल परिसर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान पीरियड्स वाली लड़कियों को पेड़ लगाने रोक दिया था. शिक्षक ने छात्राओं से कहा कि वे पेड़ों के पास न जाएं, क्योंकि पिछले साल लगाए गए पौधे मासिक धर्म के कारण नहीं बढ़े. शिकायतकर्ता छात्रा ने बताया कि वो एक भी पौधा नहीं लग सकी.

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक़, छात्रा ने दावा किया कि पुरुष टीचर ने उसे और कई छात्राओं को कहा था कि अगर पीरियड्स वाली लड़कियों ने पौधे लगाए तो, वो जल जाएंगे. जनजातीय विकास विभाग (TDD) के एक अधिकारी ने शिकायत की पुष्टि की. TDD के एडिशनल कमिशनर संदीप गोलैत ने कहा,

"हम सबके बयान लेंगे. छात्रा का, क्लास के बाक़ी बच्चों का, शिक्षकों का, सुप्रीटेंडेंट का और प्रिंसिपल का. और, फिर जांच करेंगे."

स्कूल में 500 लड़कियां पढ़ती हैं. नाशिक ज़िले की एडिशनल कलेक्टर और TDD प्रोजेक्ट अधिकारी वर्षा मीणा ने छात्रा से मिलीं. इसके अलावा लड़की ने श्रमजीवी संगठन के जिला सचिव भगवान मधे को भी अप्रोच किया. लड़की ने मधे को बताया कि वो अपने टीचर का विरोध नहीं कर सकी क्योंकि वो उसके क्लास टीचर हैं और उन्होंने धमकी दी थी कि उसके 80% नंबर स्कूल के हाथ में ही हैं.

मधे ने ये भी दावा किया कि स्कूल ने एंट्रेस के लिए यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट (UGP) को भी अनिवार्य कर दिया था. UGP यूरिन से प्रेग्नेंसी जांचने का एक तरीक़ा है. हालांकि, स्कूल अधिकारियों ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया है. कहा कि ऐसा कोई नियम मौजूद नहीं था.

26 जुलाई को मधे और पीड़ित छात्रा ने संबंधित शिक्षक के ख़िलाफ़ नाशिक के आदिवासी विकास भवन में ज्ञापन सौंपा है.

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