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CIBIL: आपका वो 'जीवनसाथी' जिससे आप चाहकर भी रिश्ता तोड़ नहीं पाते

Karti Chidambaram ने 4 दिसंबर 2024 को CIBIL स्कोर को लेकर संसद में सरकार को घेरा. अब ये CIBIL स्कोर क्या है? उसके अलावा भारत में और कौन-कौन सी संस्थाएं हैं? विस्तार से जानते हैं.

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CIBIL स्कोर को लेकर कार्ति चिदंबरम ने केंद्र सरकार को घेरा (फोटो: PTI/CIBIL)

तारीख 4 दिसंबर 2024. कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) संसद में केंद्र सरकार को घेरते हैं. CIBIL स्कोर का नाम लेकर. चिदंबरम इस दौरान CIBIL को लेकर लोगों की परेशानी संसद के सामने रखते हैं, साथ ही इसको लेकर कई तरह के सवाल भी उठाते हैं.  कहते हैं कि CIBIL Score अपडेट करने वाली संस्था की वजह से आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है. ऐसे में CIBIL के बारे में आपको बताना हमारा दायित्व है. हम आपको इसी CIBIL स्कोर का पूरा खेला-बेला और ऐसी ही क्रेडिट स्कोर चेक करने वाली और संस्थाओं के बारे में रूबरू कराएंगे.

लेकिन पहले कार्ति चिदंबरम ने संसद में क्या बयान दिया, वो जान लीजिए. दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन में CIBIL Score को लेकर छह नियम बनाए हैं, उन्हें मुद्दा बनाकर सांसद ने सरकार को घेरा. ये नियम अगले साल यानी 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होने वाले हैं.  कांग्रेस सांसद ने कहा,

“CIBIL नाम की एक एजेंसी है, जो हमारे हर ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रखती है. आपको चाहे कार लोन, होम लोन या और किसी तरह का लोन लेना हो, सबकुछ CIBIL स्कोर पर निर्भर करता है. बैंक में लोन लेने जाओ, तो CIBIL स्कोर दिखाकर ही वापस भेज दिया जाता है. CIBIL Score अपडेट करने का काम एक प्राइवेट संस्था TransUnion के हाथ में है. ये देश के 60 करोड़ से ज्यादा लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री को ट्रैक करने और रेटिंग देने का काम कर रही है. ”

चिदंबरम ने आगे कहा,

“CIBIL Score अपडेट करने वाली संस्था बेहत सुस्ती के साथ काम कर रही है और इससे आम लोग परेशान हो रहे हैं. लेकिन ये सब बिना किसी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है. CIBIL की वजह से ज्यादातर जरूरतमंद लोगों को फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें लोन पाने के लिए तमाम कठिनाइयां पेश आ रही हैं.”

 अब रिजर्व बैंक की तरफ से बनाए गए ये छह नियम क्या हैं? आइये जानते हैं:

1. हर 15 दिन में CIBIL स्कोर अपडेट होगा.
2. जब भी कोई बैंक या फाइनेंस कंपनी सिबिल चेक करती है तो ग्राहक को इसकी सूचना भेजनी होगी.
3. अगर किसी कस्टमर की लोन की मांग रिजेक्ट होती है तो इसकी वजह बताना भी जरूरी होगा.
4. साल में एक बार ग्राहकों को देना होगा फुल क्रेडिट रिपोर्ट, जो बिल्कुल फ्री होगा.
5. अगर कोई ग्राहक डिफॉल्ट होने वाला है, तो डिफॉल्ट को रिपोर्ट करने से पहले ग्राहक को बताना जरूरी होगा.
6. क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी को 30 दिन के अंदर ग्राहकों की शिकायत का निपटारा करना जरूरी, नहीं तो लगेगा जुर्माना.

CIBIL क्या है और कौन सी कंपनी देखती है?

अब जिस CIBIL को लेकर पूरा बवाल हो रहा है, वो क्या है और इसे देखने वाली कंपनी कौन है? आइये जानते हैं. CIBIL यानी क्रेडिट इंफोर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड एक क्रेडिट ब्यूरो है. CIBIL स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो यह बताता है कि आप अपने लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI को समय पर चुकाया या नहीं. किसी शख्स ने कितनी तरह का कर्ज लिया है, कितनी रकम का कर्ज लिया है, कितने समय के लिए लिया है और कितने समय में कर्ज वापस कर दिया गया. इन सब बातों का ध्यान रखकर कंपनी किसी ग्राहक का CIBIL स्कोर तैयार करती है. जो शख्स क्रेडिट कार्ड से हुए खर्चों का समय पर भुगतान कर देता है या अपनी EMI लगातार टाइम से देता जाता है, उसका स्कोर मजबूत होता जाता है.

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CIBIL स्कोर को CIR यानी क्रेडिट इन्फ़ॉर्मेशन रिपोर्ट भी कहा जाता है. यह नंबर 300 से 900 के बीच होता है. जितना ज्यादा नंबर उतनी आसानी से आपको लोन मिल जाएगा. ज्यादा अच्छा स्कोर होने पर लोन पर डिस्काउंट भी. आमतौर पर 750 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है. वहीं, जितना कम स्कोर, लोन मिलना उतना ही मुश्किल. CIBIL स्कोर को ‘Transunion’ नाम की अमेरिकी एजेंसी (या क्रेडिट ब्यूरो) कैलकुलेट करती है. जिसका साल 2000 में CIBIL के साथ टाइअप हुआ और तब से ये TransUnion CIBIL Ltd के नाम से ऑपरेट करती है. इसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा क्रेडिट स्कोर बनाने का भी लाइसेंस प्राप्त है. CIBIL स्कोर का पूरा खेला-बेला आप नीचे दिए गए तस्वीर से समझ सकते हैं.

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CIBIL स्कोर का लेखा-जोखा
CIBIL की जरूरत क्यों पड़ी?

अब अगला सवाल है कि CIBIL की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, इसका उद्देश्य भारत में फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और क्रेडिट सिस्टम को व्यवस्थित और ट्रासपैरेंट बनाना था. साल 2000 यानी TransUnion CIBIL Ltd के ऑपरेट करने से पहले देश में लोन या क्रेडिट कार्ड देने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास किसी भी व्यक्ति की क्रेडिट रिकॉर्ड की सटीक जानकारी नहीं होती थी. मतलब कि इंसान का लोन को लेकर पास्ट रिकॉर्ड कैसा रहा है. कहीं वो डिफॉल्टर तो नहीं है. वगैरह वगैरह...ऐसे में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए किसी को लोन या क्रेडिट कार्ड देना काफी जोखिम भरा था. 1990 के दशक में Economic liberalization के बाद लोन की मांग और ज्यादा बढ़ी. इस वजह से CIBIL बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक अच्छा टूल बन गया. CIBIL सिर्फ इंडिया में ही काम करता है.

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भारत में और कौन-कौन सी संस्था?

अब CIBIL के अलावा भारत में और कौन-कौन सी संस्था है, जो क्रेडिट स्कोर को चेक करती है. CIBIL के अलावा CRIF हाई मार्क, एक्सपीरियन और इक्विफैक्स जैसी एजेंसियों को RBI से मान्यता प्राप्त हैं. इनके बारे में बारी-बारी से बताते हैं.

CRIF High Mark 

CRIF एक इंटरनेशल क्रेडिट ब्यूरो कंपनी है, जिसकी स्थापना साल 1988 में इटली में हुई. ये दुनियाभर के 50 से ज्यादा देशों में अपनी सेवा देती थी. CRIF ने साल 2007 में डॉक्टर अनिल पंड्या की कंपनी High Mark की हिस्सेदारी खरीद ली. तबसे इसे CRIF High Mark  के नाम से जाना जाने लगा. CRIF High Mark एक ऐसा क्रेडिट ब्यूरो है, जो देशभर के सभी उधारकर्ताओं जैसे- रिटेल (खुदरा) उपभोक्ताओं, MSMEs (सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम), एंटरप्राइजे़ज (वाणिज्यिक) और माइक्रोफाइनेंस आदि के लिए क्रेडिट इंफोर्मेंशन जारी करता है.

Equifax India

Equifax इंकॉर्पोरेशन USA बेस्ड कंपनी है. जो दुनिया की सबसे मशहूर क्रेडिट स्कोर कंपनी में से एक है. इक्विफैक्स ने भारत में अपनी सेवाएं साल 2010 से शुरू की. इसे भी RBI से मान्यता प्राप्त है. इसका मुख्यालय मुंबई में है. यह पर्सनल और बिजनेस दोनों के लिए स्कोर मुहैया कराती है. यह रिस्क मैनेजमेंट सॉल्यूशन और फ्रॉड से बचाव की सर्विस भी मुहैया कराती है.

Experian India

Equifax की तरह ही Experian भी एक विदेशी कंपनी है. इसका मुख्यालय आयरलैंड में है. जो भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करता है. यह दिसंबर 2006 से भारत में है. Experian India का मुख्य उद्देश्य वित्तीय संस्थानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करना और कंज्यूमर को उनकी क्रेडिट स्कोर को समझने और सुधारने के लिए डेटा प्रदान करना है.

CIBIL स्कोर या क्रेडिट स्कोर कब से बनता है?

एक और आखिरी सवाल कि CIBIL स्कोर कब से शुरू होता है. जब भी आपके नाम पर कोई लोन जारी होता है या फिर अगर आप कोई क्रेडिट कार्ड लेते हैं, इसके अगले तीन से छह महीने बाद आपका क्रेडिट स्कोर शुरू होता है.

नोट- क्रेडिट स्कोर चेक करने के लिए मार्केट में हजारों ऐप मौजूद हैं. लेकिन हमारी आपको सलाह रहेगी कि हमेशा सुरक्षित ऐप के द्वारा ही अपना स्कोर चेक करें. हर ऐप को अपने निजी डिटेल देने से बचें.

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