देश में तिरंगा झंडा फहराने वाला पहला मुख्यमंत्री कौन था? ये सवाल शायद आपकोबचकाना लग सकता है. हो सकता है कि आपको लगे कि ये एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है.लेकिन ये सवाल जितना सामान्य ज्ञान का है, उतना ही ये सवाल राजनीति से भी जुड़ा है.वजह ये है कि देश की आजादी से लेकर 1974 तक देश में जब भी गणतंत्र दिवस आता था, तोदिल्ली में राष्ट्रपति झंडा फहराते थे. वहीं राज्यों में राज्य के राज्यपाल तिरंगाफहराते थे. जब स्वतंत्रता दिवस आता था, तो दिल्ली में प्रधानमंत्री तिरंगा फहरातेथे और राज्यों में सिर्फ राज्यपाल के पास ही अधिकार था.करुणानिधि की वजह से ही अब मुख्यमंत्री भी स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहरा पाते हैं.लेकिन फरवरी1974 में दक्षिण भारत का एक नेता उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीसे मिला. उसने इस नियम को बदलने की मांग की और कहा कि जैसे स्वतंत्रता दिवस पर देशकी राजधानी दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं, वैसे ही स्वतंत्रतादिवस पर राज्य की राजधानी में मुख्यमंत्रियों को झंडा फहराने का नियम बनाया जाए.इंदिरा गांधी से इस नियम की मांग करने वाले नेता का नाम था एम करुणानिधि, जो उसवक्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे.एम करुणानिधि की वजह से ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों को तिरंगा फहराने का अधिकारमिला था. ( फोटो : Twitter)ये वो वक्त था, जब केंद्र और राज्य के रिश्तों पर राजामन्नार कमेटी की सिफारिशेंसामने आई थीं. और करुणानिधि इन सिफारिशों के आधार पर ही राज्यों को और ज्यादाअधिकार देने की मांग कर रहे थे. करुणानिधि की इस मांग को इंदिरा गांधी ने मान लिया.इसके बाद जुलाई में केंद्र सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया गया कि गणतंत्र दिवसपर राज्यों के राज्यपाल तिरंगा फहराएंगे, वहीं स्वतंत्रता दिवस पर राज्यों केमुख्यमंत्री ही तिरंगा फहराएंगे. इसके बाद 15 अगस्त 1974 को तमिलनाडु की राजधानीचेन्नई में सेंट जॉर्ज किले पर जो तिरंगा फहराया गया, उसे उस वक्त के तमिलनाडु केराज्यपाल कोडरदास कालिदास शाह ने नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि नेफहराया था. उस साल पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने ही तिरंगाफहराया था. उसके बाद से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर राज्यों के मुख्यमंत्री हीतिरंगा फहराते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:सिर्फ काला चश्मा ही क्यों पहनते थे करुणानिधि?करुणानिधि को ‘कलईन्यार’ क्यूं पुकारते थे उनके चाहने वाले?क्यों ये जगह खास है, जहां करुणानिधि को दफनाने के लिए विवाद हुआकरुणानिधि : वो नास्तिक, जिसे समर्थकों ने ‘भगवान’ बना दियाकरुणानिधि नहीं रहे, 94 की उम्र में कावेरी हॉस्पिटल में निधनवो मौका, जब सोनिया को किनारे ले जाकर करुणानिधि ने अपने ही भांजे की कहानी लगा दीतमिलनाडु: करप्शन का कालीन और मुफ्तमाल का खेलाकरण थापर की किताब डेविल्स एडवोकेट के किस्से