वैज्ञानिक आए दिन भूकंप के खतरों के बारे में बताते ही रहते हैं. तो आइए आपको भूकंपके बारे में तसल्ली से बताते हैं. सबकुछ.--------------------------------------------------------------------------------धरती पर भूकंप आता क्यों है?हम सभी कुछ ना कुछ गड़बड़ करते रहते हैं. कभी-कभी धरती भी गड़बड़ कर देती है, बल्कि रोजकर देती है. पूरे ग्लोब पर रोज-रोज कहीं ना कहीं कुछ खटपट होता रहता है. छोटे-छोटेवाले तो कुछ नहीं कर पाते. पर जब कहीं कुछ बड़ा हो जाता है, तो पता चलता है कि भूकंपआ गया है.अगर धरती को छेद के देखें तो ये तीन लेयर में होती है. सबसे ऊपरी लेयर को क्रस्टकहते हैं. ये क्रस्ट पूरी धरती को घेरे रहता है. मतलब हमारे पांव के नीचे की जमीनऔर नदी-समंदर के नीचे की भी जमीन. ये बहुत ही मोटी परत होती है. जो हम देख पातेहैं, इससे बहुत गहरी.धरती के लेयर्सतो हमारी जमीन के नीचे बहुत सारी प्लेट्स होती हैं. आड़ी-तिरछी. इधर-उधर. एकदम फंसीहुई. एक हिली तो दूसरी भी हिलेगी. एक खिंची तो कई और खिंच जाएंगी. और जब ये ज्यादाहो जाता है, तो ऊपर की जमीन खड़खड़ा जाती है. भूकंप आ जाता है. करोड़ों बरसों पहले जबकई प्लेट्स ऐसे ही टकराई थीं, तब इसी टक्कर से कई सारे पहाड़ बने थे. मतलब हल्के मेंनहीं लेना है इस टक्कर को. हिमालय भी ऐसे ही बना था. कहीं-कहीं भूकंप के अलावाज्वालामुखी भी फट जाते हैं. इसमें क्या होता है कि धरती के अन्दर का लावा बाहर आजाता है. गरम-गरम.इंडिया और यूरेशिया के प्लेट्सतो पूरी धरती पर कई फॉल्ट जोन हैं. मतलब कई जगह प्लेट्स एक-दूसरे से मिलती हैं. अबजहां मेल-जोल होगा, खटपट होगी ही. तो भूकंप ऐसे ही फॉल्ट जोन में आता है.पूरी दुनिया के प्लेट्स और फाल्ट लाइन्सप्लेट्स के हिलने के भी कई तरीके हैं1.Strike-Slipइसमें प्लेट्स अगल-बगल में खिसक जाती हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है अमेरिका केकैलिफ़ोर्निया का सैन एंड्रियाज फॉल्ट.-------------------------------------------------------------------------------- 2.Dip-Slipजब प्लेट्स ऊपर-नीचे हिलती हैं, तो भी भूकंप आता है. उत्तरी अमेरिका और प्रशांतमहासागर वाली प्लेट में ऐसा होता है.-------------------------------------------------------------------------------- 3.Obliqueयहां मामला टेढ़ा है. ऊपर-नीचे और अगल-बगल दोनों तरफ प्लेट खिसकती है. सैनफ्रांसिस्को में ऐसा होता है. इंसान भी इसमें पीछे नहीं है. लगे हाथ ऐसे काम करदेता है कि भूकंप आ जाता है. जैसे एटम बम और हाइड्रोजन बम का टेस्ट. नॉर्थ कोरियाके तानाशाह ने जब एटम बम फोड़ा था, तब जमीन हिलने से ही पता चला था. इसके अलावाकिसी-किसी प्रोजेक्ट में इंसान इतना गहरा गड्ढा खोद देता है कि धरती उसे संभाल नहींपाती. हल्के भूकंप आ ही जाते हैं. समुद्र के नीचे भूकंप आ जाए, तो पानी की धार बदलजाती है और सुनामी आ जाती है. भूकंप प्रकृति का एक नियम है. जैसे हर चीज टूट-फूट केफिर कुछ नई चीज बन जाती है, वैसे ही धरती के अन्दर भूकंप प्लेटों को फिर सेव्यवस्थित कर देता है.अब कैसे नापते हैं? इंची-टेप से? नहीं यार. ऐसे होता तो सब लोग साइंटिस्ट बन जाते.पुराना ज़माना1.इंडिया में वराह मिहिर की लिखी बृहत् संहिता और बल्लाल सेना की अद्भुत सागर मेंभूकंप का जिक्र है. इसको ज्यादा पढ़ा नहीं गया.--------------------------------------------------------------------------------2.चीन में 2000 साल पहले भूकंप नापने के लिए एक जुगाड़ था. खुले मैदान में एक कांसे का6 फीट डायमीटर का जार रख दिया जाता था. डायमीटर के चारों ओर खुले मुंह के 8 ड्रैगनलगा दिए जाते थे. नीचे 8 मेंढक लगा दिये जाते थे. सब कांसे के ही. ड्रैगन के मुंहमें एक बॉल रख दी जाती थी. जब भूकंप आता तो बॉल उसके मुंह से छिटक कर मेंढक के मुंहमें चली जाती. जिस दिशा में जाती, उसे भूकंप की दिशा मान लिया जाता था.चीन का जुगाड़: Houfeng Didongनया ज़मानाजब भी भूकंप की न्यूज़ आती है, कुछ ऐसे ही आती है: जापान में 7.5 रिक्टर की तीव्रताका भूकंप आया. डिटेल 10 बजे. इसका मतलब क्या है?भूकंप में दो चीजें देखी जाती हैं: मैग्नीट्यूड और इंटेंसिटी. मतलब कितना आया औरकितनी जोर से. ये नापा जाता है रिक्टर स्केल से.जब प्लेट्स टकराती हैं, तो एनर्जी निकलती है. ये तरंग के रूप में निकलती है. तोइसके लिए एक यंत्र बैठाया जाता है. सीज्मोमीटर. वैसे एरिया में जिससे 100-200किलोमीटर दूर भूकंप आते हैं. तो भूकंप की तरंग आ के सीज्मोमीटर से टकराती है. येइसको बढ़ा-चढ़ा के नापता है. फिर दूरी और इस तरंग के आधार पर एक फ़ॉर्मूले के तहतरिक्टर स्केल पर नंबर बताया जाता है. और भी एक-दो तरीके हैं, पर रिक्टर वाला ज्यादाचलन में है.रिक्टर स्केल पर 3 तक के तो पता भी नहीं चलते. पर 4 से गड़बड़ शुरू हो जाती है. 6वाले गंभीर खतरा पैदा करते हैं.tremor.nmt.eduधरती के नीचे जहां भूकंप शुरू होता है, उसको फोकस कहते हैं. इसके ठीक ऊपर की दिशामें जमीन पर जो पॉइंट होता है, उसको एपीसेंटर कहते हैं. सीज्मोमीटर इसी पॉइंट सेभूकंप की तीव्रता नापता है.भूकंप का एपीसेंटर और फोकस--------------------------------------------------------------------------------दी लल्लनटॉप के लिए ये लेख ऋषभ ने लिखा था.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःहम भूकंप से नहीं डरते, सुसाइड से डरते हैंतूफान समंदर में उठता है तो उसे नाम कौन देता है?सिलाई होती है कि थान कच्चा होता है जो बादल फट पड़ता है?कहानी उस चेन्नई महानगर की, जहां हर साल बारिश अपने साथ मौतें भी लाती हैVideo:ठंडी में बार-बार हमें सूसू क्यों लगती है?