ऐश्वर्या राय. सचिन तेंदुलकर. सुनील गावस्कर. अर्जुन रणतुंगा. सनथ जयसूर्या. निर्मलचन्द्र सूरी. गुंडप्पा विश्वनाथ. अटल बिहारी वाजपेयी.इन सभी में क्या कॉमन है? ये सभी एक धोखेबाज़ के भक्त थे. धोखेबाज़, जिसने खुद कोबाबा कहना शुरू कर दिया था. सत्य साईं बाबा. इनसे मेरी पहली मुलाक़ात हुई मेरी ताईजी के घर पर. वो ऊपर लिखी महान हस्तियों में तो शामिल नहीं थीं मगर उनके ही जैसेसत्य साईं की भक्त थीं. कैंसर से मर गईं. अस्पताल जाने से पहले सत्य साईं की फ़ोटोके पैर छूकर गई थीं. ज़िन्दा वापस न लौटीं. बाद में मालूम चला कि सचिन तेंदुलकर भीसत्य साईं भक्त थे. बाबा की मौत पर आंसू बहाते भी दिखे. मगर सच्चाई का ऐसा है किसामने आ ही जाती है. दूरदर्शन पर एक अवॉर्ड सेरेमनी आ रही थी. सत्य साईं ने एकअवॉर्ड दिया. अपना हाथ हिलाया और उनके हाथ में एक माला आ गयी. अपने आप. ठीक वैसाजैसा दूरदर्शन के भगवान वाले सीरियल्स में दिखाई देता है. उन्होंने वो माला उसअवॉर्ड जीतने वाले के गले में पहना दी. सब खुश. लेकिन जब उस क्लिप को गौर से देखाजाए तो मालूम पड़ता है कि जिस व्यक्ति ने वो अवॉर्ड जीतने वाले को देने के लिए बाबाको पकड़ाया था, उसने चुपके से वो माला बाबा के हाथ में ट्रांसफर कर दी थी.https://www.youtube.com/watch?v=bYaJBHI_-Pc बाबा के भेद खुलने लगे थे. येइन्टरनेट की दुनिया है. यहां सब कुछ एक्सपोज़ होता है. बाबा की एक और गजब की ट्रिकथी. हाथ से भभूत निकालने की. वो हाथ को सीधा रख हवा में हिलाते थे. हथेली सीधी औरनीचे की ओर. वो गोल-गोल घुमाते थे और फिर भक्तों की हथेली में भभूत रख देते थे. मानो हवा में से निकाला हो. या स्वयं से लेकर आये हों. मालूम चला कि हाथ में पहलीदो अंगुलियों के बीच एक चाक का छोटा सा टुकड़ा रखते थे. ये चाक ज़्यादा कठोर नहींहोती थी. ऐसी होती थी कि ज़रा सा जोर लगाने पर मसली जा सकती थी. सत्य साईं उसे हीमसलते हुए भक्त के हाथों में भभूत गिरा देते थे. भक्त लोट जाते थे. दंभ करते थे किहजारों की भीड़ में बाबा ने उन्हें चुना. वो ये नहीं जान रहे थे कि बाबा ने उन्हेंचुना तो है लेकिन आशीर्वाद देने के लिए नहीं बल्कि उल्लू बनाने के लिए. भक्ति जबसिर पे चढ़ती है तो आंखें होते हुए भी आदमी अंधा हो जाता है. इससे बड़ा नशा कोई नहीं.इससे घातक भी नहीं. सत्य साईं एक घटिया जादूगर था. और कुछ नहीं. घटिया इसलिएक्यूंकि वो खुलकर अपने जादूगरी के पेशे को भी नहीं स्वीकारता था. बल्कि एकसिद्धपुरुष का चोगा पहने फिरता था. इस चोगे को उतारने की अभूतपूर्व कोशिश की तोजादूगर पीसी सरकार जूनियर ने. महीनों तक सत्य साईं से मिलने की अर्जी रिजेक्ट होतेजाने पर पीसी सरकार जूनियर ने एक स्वांग रचा. वो बंगाल के एक इंडस्ट्रियलिस्ट केबेटे का रूप धर के गए. तुरंत ही बाबा ने अन्दर बुला लिया. बाबा से कमरे के अन्दरहोती मुलाकात यानी दर्शन मिलने पर सरकार जूनियर ने उनसे एक गिफ्ट मांगा. बाबा नेइंतज़ार करने को कहा. दूसरे कमरे में गए. और 2 मिनट बाद बाहर आये. जिस दौरान बाबाकमरे के अन्दर थे, सरकार जूनियर ने कमरे में रखी खाने की एक प्लेट अपने पास छुपाली. वापस आने पर बाबा ने अपने हाथ को हवा में घुमाया और 'न जाने कहां से' उनके हाथमें संदेश मिठाई आ गयी. पीसी सरकार इसी का इंतज़ार कर रहे थे. उन्होंने तुरंत बाबासे कहा, "बाबा मुझे संदेश नहीं, रसगुल्ला पसंद है." और अपनी छुपी हुई मिठाई कीप्लेट से संदेश को रसगुल्ले में बदल दिया. बाबा जी को काटो तो खून नहीं. उन्होंनेसरकार को भगा दिया. बाद में सरकार ने कहा, "वो कोई बाबा नहीं है. वो जादूगर है. वोभी अच्छा नहीं है. वो इतना बेकार है कि जादूगरों का नाम बर्बाद कर रहा है." और इसीके बाद बाबा ने देश के प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के सामने एक जादू किया था जोदूरदर्शन पर भी रिकॉर्ड हुआ. एडिटर को जब सत्य साईं की कारीगरी दिखाई दी तो वोक्लिप कभी भी टीवी पर प्रसारित ही नहीं हुआ. मगर हां, सत्य साईं पर बीबीसी ने एकडाक्यूमेंट्री बनाई. इस डाक्यूमेंट्री में सत्य साईं की पोल-पट्टी खोली गयी है.बाबा के आश्रम पर एक बोर्ड लगा हुआ था. जो कहता था, "Why fear when I am here?"यानी मेरे होते हुए डर कैसा? और वही बाबा, खुद को मारने आये लोगों के सामने पहुंचताहै, तो भाग खड़ा होता है. अगर दिव्य शक्ति धारण की हुई थी तो क्यूं नहीं उन्हेंसदबुद्धि दी या उनके हथियारों को निरस्त कर दिया? उन्होंने तो वही किया जो आम आदमीकरता. सत्य साईं तो खुद को भगवान कहते थे. सत्य साईं के तमाम मंदिर, तमाम अस्पताल,तमाम वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट और स्कूल वगैरह मौजूद हैं. इन सभी बातों से मुंह नहींमोड़ा जा सकता. अस्पताल हैं तो उनमें लोगों का इलाज होता है. वॉटर सप्लाई प्रोजेक्टहै तो लोग पानी भी पी रहे हैं. स्कूल हैं तो बच्चे पढ़ भी रहे हैं लेकिन हमें ये बातमान लेनी चाहिए कि इनके पीछे लगा पैसा धोखेबाजी का पैसा है. उस पैसे कोहजारों-लाखों लोगों की भावनाओं से खेलकर, उन्हें अंधेरे में रखकर, उन्हें उनकी हीआंखों के सामने बुद्धू बनाकर, चंदे और डोनेशन के नाम पर वसूला गया है. ये सभी बातेंअभी तक छलावे की ओर इन्डिकेट कर रही थीं. लेकिन इसके अलावा भी ऐसा बहुत कुछ है जोबाबा के सामने खड़ा हुआ है. इनमें सेक्शुअल हैरासमेंट मुख्य है. सिडनी से आये बैंकरडि क्रेकर पांच साल तक बाबा के भक्त थे. साल 2000 में द सन्डे एज में उनके बुरेअनुभव छपे. "मैंने भारतीय परम्पराओं के हिसाब से ही उनके पैर छुए. उन्होंनेमेरा सिर पकड़ लिया और अपनी जांघों के बीच ले गए. उन्होंने कराहने की आवाज निकाली.वही आवाज़ जिसने मेरे शक को यकीन में बदल दिया. उनकी पकड़ जैसे ही ढीली हुई, मैंनेअपना सिर उठाया. बाबा ने अपने कपड़े उठाकर मुझे अपना लिंग दिखाया. और कहा कि मेरीक़िस्मत अच्छी है. उन्होंने अपना कूल्हा मेरे मुंह से सटा दिया. मैंने तय किया किमुझे इनके खिलाफ़ बोलना है. मैंने उनसे कहा कि मैं ये सब नहीं, उनका दिल चाहता हूं.बाबा ने कहा कि उनका दिल पहले ही मेरे पास है. उन्होंने अपने कपड़े ठीक किये. और एकबार फिर सुनहरा मौका देने की कोशिश की. मैंने उसे ठुकरा दिया." स्वीडन में रहनेवाले कोनी लारसन ने भी टेलिग्राफ को अपने साथ हुई बर्बरता को बताया. कोनी 21 साल तकबाबा के भक्त रहे थे. "बाबा ने मुझे कई बार निजी भेंट के लिए बुलाया. मुझे मालूमनहीं था कि उनके और मेरे बीच में क्या हो रहा था. लेकिन जब उन्होंने कहा कि वो मेरेभगवान हैं और मेरी समस्या दूर करेंगे, तो मैंने उन पर भरोसा कर लिया है. यह अजीबबात थी क्यूंकि वो कभी मेरे लिंग को छू रहे थे कभी उस पर तेल लगा रहे थे और मेरामास्टरबेट कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मैं ऐसा ही उनके साथ करूं. उन्होंने कई बारमेरे साथ ओरल सेक्स किया. हर बार लगता था कि उन्हें काफी मज़ा आ रहा है. जब उन्होंनेमुझे अपने साथ ओरल सेक्स करने को कहा, तो मैंने इनकार कर दिया."--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: 'बाबा के पास मुसीबत लेकर जाओ, तो ब्राह्मण के साथ सोने को कहता था'नरेंद्रस मोदुस को पीएम बनाने वाला नास्त्रेदमस सबसे बड़ा फ्रॉड थाझूठे कमांडो ट्रेनर शिफूजी शौर्य भारद्वाज की असलियत : दूसरा पार्टन फौजी न कमांडो ट्रेनर, बहुत बड़ा फ्रॉड है ये शिफूवीडियो देखें: