एक ही प्रॉपर्टी कई लोगों को बेची, 500 करोड़ कमाए, गुरुग्राम के ध्रुव शर्मा का ये खेल डरा देगा
Gurugram स्थित 32nd एवेन्यू (32 Avenue) के फाउंडर Dhruv Sharma ने एक ही प्रॉपर्टी का बार-बार सौदा कर लोगों को सपने दिखाए. करीब 500 करोड़ की इस ठगी का पता तब चला, जब शहर के एक शख्स ने पुलिस को शिकायत दी. पुलिस ने जांच शुरू की, फिर पता चला कई लोगों के साथ ये खेल हुआ है. ठगे गए लोगों की असली संख्या 500 से 1 हजार के बीच हो सकती है.
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हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट 32nd एवेन्यू (32 Avenue) के फाउंडर, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर ध्रुव दत्त शर्मा (Dhruv Sharma Arrested) को गिरफ्तार कर लिया है. ध्रुव शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने एक ही प्रॉपर्टी यूनिट को कई बार बेचकर और 'गारंटीड' रेंटल रिटर्न का झूठा वादा करके सैकड़ों निवेशकों को धोखा दिया है. ध्रुव शर्मा का नाम 2018 में Forbes की 30 Under 30 लिस्ट में भी आ चुका है.
अधिकारियों के मुताबिक यह घोटाला लगभग 500 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक का हो सकता है. ध्रुव शर्मा को 7 फरवरी को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने ध्रुव को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. दूसरी तरफ इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने पैसे के लेन-देन और प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है.
पुलिस के मुताबिक ध्रुव ने निवेशकों को 30 साल तक गारंटीड लीज रेंटल, बायबैक ऑप्शन और रेगुलर मंथली इनकम का वादा जैसे कई लुभावने ऑफर दिए. कई खरीदारों को इस प्रोजेक्ट में कमर्शियल यूनिट्स में करोड़ों रुपये इन्वेस्ट करने के लिए राजी कर लिया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट कहती है कि खरीदारों को प्लॉट की घेराबंदी (बाउंड्री) और कब्जे का भरोसा दिलाया गया. लेकिन आरोप है कि अगस्त 2025 से रेंटल पेमेंट बंद हो गए, और बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद TDS, GST, PF और ESI जैसी कानूनी फीस को भी जमा नहीं किया गया.
कैसे खुला पूरा मामला?32nd एवेन्यू में हुई यह कथित धोखाधड़ी पहली बार पुलिस कमिश्नर द्वारा की जा रही जनसुनवाई में सामने आई थी. कमिश्नर ने शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए, मामला EOW को सौंप दिया. फिर EOW ने इस मामले में कई गंभीर धाराओं के तहत कई FIR दर्ज कीं. अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अब तक 5 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं. अब तक 40-50 शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. लेकिन अनुमान ये है कि ठगे गए लोगों की असली संख्या 500 से 1 हजार के बीच हो सकती है. पुलिस को शक है कि हर इन्वेस्टर से करीब 1 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये तक की ठगी की गई है.
कब्जा मिलेगा या नहीं, इसपर भी शकपुलिस को यह शक है कि कई यूनिट्स कई खरीदारों को बेची गईं, जिससे इस बात पर शक पैदा होता है कि असली कब्जा कभी दिया भी जा पाएगा या नहीं. क्योंकि एक ही यूनिट पर कई दावे सामने आ सकते हैं. शुरुआती पूछताछ के दौरान, ध्रुव ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि निवेशकों से इकट्ठा किया गया पैसा लग्जरी इन्वेस्टमेंट में लगाया गया था, जिसमें गोवा के समुद्र तट के किनारे हाई-एंड विला और राजस्थान के नीमराना में प्रॉपर्टी खरीदना शामिल है.
पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ, गुरुग्राम की एक अदालत ने एक सीनियर सिटीजन निवेशक अरविंद गुप्ता द्वारा दायर की गई एक याचिका पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. अरविंद ने प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है. याचिका में 32nd Vistas Pvt Ltd, Growth Hospitality LLP, और प्रमोटर ध्रुव दत्त शर्मा, शिरीन शर्मा और ममता शर्मा का नाम है. आवेदन में बैंक खातों को फ्रीज करने, संपत्तियों को अटैच करने, फोरेंसिक ऑडिट, पासपोर्ट निलंबित करने और आरोपियों को देश से भागने से रोकने के लिए लुक-आउट सर्कुलर जारी करने की मांग की गई है.
अरविंद ने आरोप लगाया कि निवेशकों को गुमराह करने के लिए जाली TDS सर्टिफिकेट बांटे गए ताकि उन्हें यह भरोसा दिलाया जा सके कि कानूनी नियमों का पालन किया गया है. EOW के मुताबिक अब उनका ध्यान डाइवर्ट किए गए पैसों का पता लगाने, अतिरिक्त लाभार्थियों की पहचान करने और यह वेरिफाई करने पर होगा कि क्या उन्हीं प्रॉपर्टीज को बार-बार बेचा गया था, जिसे पुलिस एक प्लान्ड, बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट धोखाधड़ी ऑपरेशन बता रही है.
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