5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में घोटाले का दावा करते अखबार के स्क्रीनशॉट का सच कुछ और निकला!
सोशल मीडिया पर अखबार की कटिंग वायरल है.

28 के पीछे 14 जीरो. एक बार गिनने बैठो तो गिनते ही रह जाओ. फिलहाल आप दिमाग पर ज्यादा जोर मत लगाइए, हम आपकी मुश्किल आसान कर देते हैं. आसान भाषा में इसे कहेंगे 28 लाख अरब. इस संख्या का जिक्र इसलिए क्योंकि एक अखबार की कटिंग में ये संख्या लिखी है और सोशल मीडिया पर वायरल है. दावा है कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में 2.8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है.
DMK विधायक Dr. T R B Rajaa ने वायरल कटिंग ट्वीट कर इसे भाजपा का 5G स्कैम बताया. (आर्काइव)
लेखक अशोक कुमार पांडेय ने अखबार की वायरल कटिंग ट्वीट कर लिखा, (आर्काइव)
इनके अलावा गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक छोटूभाई वसावा, यूपी कांग्रेस और कई और सोशल मीडिया यूज़र्स ने अखबार की कटिंग को शेयर कर ऐसे ही दावे किए हैं.
पड़ताल'दी लल्लनटॉप' ने वायरल दावे का सच जानने के लिए पड़ताल की. हमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत निकला. जिस अखबार की कटिंग को शेयर किया जा रहा है वो असल में एडिटेड है.
कुछ कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें अखबार की वायरल कटिंग की असली कॉपी मिली. ई-पेपर की असली कॉपी में अखबार की हेडलाइन है-
वायरल कटिंग और असली कॉपी की तुलना करने पर दोनों में अंतर साफ देखा जा सकता है.
गौर से देखने पर हमें ख़बर में Pankaj Doval की बाइलान दिखाई देती हैं. इसके बाद सर्च से हमें ट्विटर पर पंकज डोभाल का अकाउंट मिला. पंकज ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 2 अगस्त, 2022 को वायरल कटिंग की असली ई-कॉपी ट्वीट की है.
ज्यादा जानकारी के लिए हमने पंकज से संपर्क किया. उन्होंने बताया,
इसके अलावा 2 अगस्त, 2022 को टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर भी इस रिपोर्ट को पब्लिश किया गया था.
नतीजाहमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ. अखबार की वायरल कटिंग फर्जी है जिसे असली कटिंग के साथ छेड़छाड़ कर बनाया गया है. वायरल कटिंग की हेडिंग में 2.8 लाख करोड़ रुपए के नुकसान होने के बात की जा रही है जबकि अखबार की असली कटिंग में 1.5 लाख करोड़ की कमाई होने की बात लिखी गई है.

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