Ghibli Art Style. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का वो नया 'बवाल' जो दुनिया में छाया हुआ है. मगर हम आज इसके किसी फीचर की बात नहीं करने वाले. मुफ़्त बनेगा या पैसे लगेंगे, वो भी नहीं बताने वाले. हम तो इसके नाम पर जो डेटा में सेंध की बात कही जा रही, उस पर चर्चा करेंगे.
OpenAI ने कहा, "ChatGPT का डेटा भारत में स्टोर नहीं होता", तो Ghibli से डरना है या नहीं?
Ghibli Art Style दुनिया में छाया हुआ है. मगर हम आज इसके किसी फीचर की बात नहीं करने वाले. मुफ़्त बनेगा या पैसे लगेंगे, वो भी नहीं बताने वाले. हम तो इसके नाम पर जो डेटा में सेंध की बात कही जा रही, उस पर चर्चा करेंगे.

ये क्या भौकाल है, अब बताने की जरूरत नहीं. आते ही इसने जो गदर काटा. खुद OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन को कहना पड़ा- भईया जरा रुक जाओ. हमारे सर्वर गरम हो रहे. थोड़ा ठंड रख लो.

मगर अब इस Ghibli Art Style को लेकर कुछ अजीब बातें हो रही हैं.
ChatGPT के इस शानदार प्रोडक्ट के बारे में कहा जा रहा है कि इसने ‘आपके फेस का डेटा ले लिया’ है. आपके फोटो ऐप के पास हैं. अब इनका गलत इस्तेमाल होगा. फेस को ‘हैक करके आईफोन’ भी खोल लिया जाएगा, वगैरा-वगैरा-वगैरा. एक एक्स्ट्रा इसलिए क्योंकि कुछ ज्यादा ही ज्ञान दिया जा रहा है.
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Ghibli Art Style, ChatGPT, सैम बाबू इतने सारे डेटा का क्या करेंगे, वो समझते हैं. मगर पहले जरा बेसिक्स पर वापस आते हैं. याद कीजिए जब आपने अपना जीमेल अकाउंट बनाया था. याद कीजिए जब आपने कोई ऐप डाउनलोड किया था तो क्या हुआ था. वही हुआ था जो ‘मंजूर-ए-ऐप’ हुआ था.
आपने तमाम किस्म का एक्सेस अपने पूरे होश-ओ-हवास में ऐप को दिया था. लोकेशन से लेकर माइक्रोफोन और इमेज गैलरी तक का एक्सेस. कॉन्टैक्ट से लेकर एसएमएस पढ़ने के लिए भी हामी भरी थी. आज भी ऐसा ही होता है. हालांकि अब क्या एक्सेस देना है और क्या नहीं, उसका कंट्रोल जरूर आपके हाथ में होता है. फिर भी कई जरूरी ऐप्स, मसलन WhatsApp में आपको सारे एक्सेस देने ही पड़ते हैं. गूगल पे को अगर लोकेशन का एक्सेस नहीं दिया तो फिर पेमेंट करके देख लीजिए.

कुल कथा सार ये कि आपके डेटा का एक्सेस तमाम ऐप्स के पास है. अब तो कई ऐप और उनके डेवलपर्स ने खुलकर मान भी लिया है कि हां भईया हम आपके डेटा पर नजर रखते हैं. फ्री में ऐप चला रहे तो अपना डेटा हमें दो. हम इसे कंपनियों को बेचेंगे और कमाई करेंगे.
आज का ही उदाहरण ले लीजिए. OpenAI ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि उनका डेटा सेंटर इंडिया में नहीं बल्कि बाहर है. वो इस डेटा का इस्तेमाल अपने Large Language Model (LLM), बोले तो ChatGPT को ट्रेंड करने में करते हैं. माने आपके और हमारे डेटा का इस्तेमाल. हालांकि ये मामला Indian Copyright Act से जुड़ा हुआ है, मगर बात तो डेटा की है.

डेटा के एक्सेस को लेकर टेक कंपनियां भी खुद लड़ती रहती हैं. मेटा और ऐप्पल तो ऐसे लड़े कि आईफोन में आपकी एक्टिविटी को ट्रैक होने से बचाने का ऑप्शन तक आ गया. मगर इसमें गूगल बच गया. बोले तो कंपनियों के लिए आपका डेटा ही उनका असल खजाना है. अब खजाना लूटने से बचाना है तो हो जाओ ऑफ़लाइन. सब डिलीट मारकर आराम से 30 साल पुरानी जिंदगी जियो.
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कहने का मतलब, ये कभी ना खत्म होने वाली बहस है! Ghibli Art Style को बिला-वजह टारगेट किया जा रहा. ChatGPT या दूसरे ऐप्स पर आप अपनी मर्जी से तस्वीरें पहले भी अपलोड करते रहे हैं. उनके पास आपकी गैलरी से लेकर माइक्रोफोन का एक्सेस पहले से है. सभी टेक कंपनियां इस डेटा को सेफ रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च भी करती हैं. ये अलग बात है कि कोई हैकर इनके सिस्टम में सेंध लगा ले तो क्या ही करेंगे. वैसे अगर कोई इनके सिस्टम में घुस सकता है तो फिर आपका सिस्टम...
तो ज्यादा टेन्शन नहीं लेनी है. जिब्ली-जिब्ली खेलते रहो. बस किसी फर्जी ऐप को अपना डेटा मत देना.
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