देश में जब Ola और Uber जैसी सर्विस आई तो यूजर्स को बड़ा आराम हुआ. ऐप में उंगली फिराते ही मन की कार दरवाजे पर होती थी. यात्रा से पहले 'बे-कार' की टेंशन खत्म हो चली थी. मगर ये खुशी वाली सवारी ज्यादा दिन चली नहीं. अनाप-शनाप किराये (Surge pricing) से लेकर चालकों की बदतमीजी और मनमानी के किस्से आम हो गए. ऐसे में एक इंडियन कैब सर्विस ने मार्केट में स्लो एंट्री मारी. उनके काम करने के तरीके से लगा कि भईया ये तो कैब का गेम बदल डालेंगे. मगर ऐसा हुआ नहीं और अब कंपनी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है.
BluSmart में इस्तीफों की स्पीड कैब सर्विस से भी तेज, कंपनी की 'चार्जिंग' खत्म होने की वजह क्या है?
BluSmart in trouble: ब्लूस्मार्ट इलेक्ट्रिक कैब सर्विस के CEO (अनिरुद्ध अरुण), CBO (तुषार गर्ग), CTO (ऋषभ सूद) और VP (प्रिया चक्रवर्ती) ने पिछले हफ्ते एक साथ कंपनी छोड़ दी है. Uber के इनको खरीदने की भी चर्चा है. आखिर इस कैब सर्विस को ब्रेक कैसे लग गए?

बात हो रही है BluSmart की. स्पीड से चल रही इलेक्ट्रिक कैब सर्विस के CEO (अनिरुद्ध अरुण), CBO (तुषार गर्ग), CTO (ऋषभ सूद) और VP (प्रिया चक्रवर्ती) ने पिछले हफ्ते एक साथ कंपनी छोड़ दी है. Uber के इनको खरीदने की भी चर्चा है. आखिर इस कैब सर्विस को ब्रेक कैसे लग गए?
BluSmart या ओवर स्मार्ट2019 में बनी इस कंपनी के साथ क्या हुआ है वो जानने से पहले जरा इनका बिजनेस मॉडल समझते हैं. Ola और Uber जैसी कैब सर्विस में गाड़ी का मालिक उसको चलाने वाला या फिर कोई और होता है. ऐप सिर्फ उनको अपने प्लेटफॉर्म पर जगह देते हैं और हर राइड पर कमीशन लेते हैं. कहने को उनका कंट्रोल होता है मगर जब भी कोई गड़बड़ हुई तो महज खानापूर्ति करके काम चला लिया जाता है.
इसके उलट ब्लूस्मार्ट में सारी कैब्स कंपनी की हैं. यहां ड्राइवर को महीने की पगार मिलती है. ये टेंशन नहीं है कि दिनभर में जितनी ज्यादा कार चलाओगे उतना पैसा कमाओगे. तय घंटे काम करो और घर जाओ. गाड़ी का रखरखाव भी कंपनी का तो उनकी गुणवत्ता भी टॉप क्लास.
इसीलिए ब्लूस्मार्ट को लॉन्च होते ही पब्लिक ने हाथोंहाथ लिया. कंपनी को BP Ventures और Mayfield India से फंडिंग भी मिली. लगा था कि ये इलेक्ट्रिक कैब पहले से जमे खिलाड़ियों को झटका देकर ही मानेगी. मगर अब तो इसको ही ‘चार्जिंग’ की जरूरत है.
Anmol Singh Jaggi ने BluSmart को बनाया. साथ ही उनकी एक और कंपनी है Gensol जो सोलर एनर्जी और EV सेक्टर में काम करती है. उसे भारत सरकार की Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) से लोन भी मिला हुआ है. फिन शॉट्स की रिपोर्ट के मुताबिक यही पैसा ब्लूस्मार्ट को 'धक्का' लगाने में इस्तेमाल हुआ. हालांकि (IREDA) को इसकी जानकारी थी.
मगर इस लेनदेन में एक लूप होल था जिसका पता Gensol के साल 2023-24 की वित्तीय डिटेल्स में मिला. बाहर से लगा कि Gensol और ब्लूस्मार्ट एक ही हुए. माने इधर का पैसा उधर गया तो वापस भी आ जाएगा. मगर Gensol की वार्षिक रिपोर्ट से पता चला कि उसने तो 148 करोड़ रुपये कॉन्ट्रैक्ट पर दे रखे हैं ब्लूस्मार्ट को. इस तरह तो ब्लूस्मार्ट एक अलग कंपनी हुई. और अगर उसने पैसा नहीं लौटाया तो?
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इसकी चिंता Gensol के इन्वेस्टर्स को भी हुई. हालांकि कंपनी ने कहा कि सब नियम कायदे में हुआ है. लेकिन बात इतनी ही होती तो शायद बिगड़ती नहीं. साल 2024 खत्म होते-होते पता चला कि Gensol के ऊपर IREDA का 470 करोड़ रुपये बकाया है.
ये खबर बाहर आते ही CARE और ICRA जैसी क्रेडिट एजेंसियों ने Gensol की रेटिंग गिरा दी. इसका असर कंपनी के शेयर पर पड़ा. उसने कर्जा उतारने के लिए Refex Green Mobility को 3,000 EV बेचने का फैसला किया. कंपनी को उम्मीद थी कि चलो सड़क से नदारद नहीं होंगे. मगर Refex ने डील को ‘डन’ नहीं की. और उधर ब्लूस्मार्ट की हालत भी बेदम.

साल 2023-24 में कंपनी का घाटा 215 करोड़ रुपये का निकला. माने कथित तौर पर पेरेंट कंपनी और सहायक कंपनी के ऊपर करोड़ों की देनदारी. इसका असर सर्विस पर भी दिखा. यूजर्स ने अपने बुरे अनुभव साझा किए. आज की तारीख में कंपनी के पास टॉप मैनेजमेंट ही नहीं है. वैसे कंपनी का कहना है कि उसने गाड़ियों की सप्लाई के लिए Orix, Kinto और Mahindra & Mahindra से साझेदारी की है. मगर सबसे बड़ा सप्लायर Gensol तो बाहर हो गया है.
ऐसे में अब एक्सपर्ट कंपनी की ट्रिप को खत्म मानकर चल रहे हैं. अब ये पता चलने का इंतजार है कि ब्लूस्मार्ट को वाकई में Gensol से गैर वाजिब लाभ मिला या वो अपने ही गेम में फंस गई.
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