ई-कॉमर्स पोर्टल जैसे Flipkart या Amazon का इस्तेमाल आप करते ही होंगे. आजकल इनका डिलीवरी नेटवर्क छोटे-छोटे गांवों तक भी पहुंच गया है. जो आप बड़े शहरों या फिर मेट्रो सिटी में रहते हैं तो Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक कॉमर्स पोर्टल आपके रोज के जीवन का हिस्सा बन चुके होंगे. इन ऐप्स का इस्तेमाल तो ठीक है, लेकिन क्या आपने कभी ऑर्डर से पहले फाइनल अमाउंट (Bill Summary) पर गौर किया है?
Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart से ऑर्डर करते हैं, बिल का खेल समझ लीजिए
ई-कॉमर्स (Flipkart) और क्विक कॉमर्स पोर्टल (Blinkit, Zepto) से ऑर्डर करते समय प्राइस ब्रेकअप (Bill Summary) पर नजर डालिए. दन्न से कार्ट में आइटम ऐड करके फन्न से यूपीआई से पेमेंट करने की जल्दी में आप काफी महंगा सामान खरीद रहे. काफी मतलब वाकई में काफी.

नहीं किया, तो फिर जनाब जल्दी से अपनी कुर्सी की पेटी बांध लीजिए. दन्न से कार्ट में आइटम ऐड करके फन्न से UPI से पेमेंट करने की जल्दी में आप काफी महंगा सामान खरीद रहे. काफी मतलब वाकई में काफी.
ब्रेकअप से दोस्ती कर लोसारा गुणा-गणित बताते हैं. मगर एक बात क्विकली क्लीयर कर देते हैं. हमें किसी भी प्लेटफॉर्म के किसी भी चार्ज से, मसलन पैकिंग या डिलीवरी से कोई दिक्कत नहीं है. सर्विस देने पर सर्विस चार्ज लेना बनता है, जब-तक कि ग्राहक के तौर पर आपको दिक्कत नहीं. हम तो बस इसके एक प्रैक्टिकल इस्तेमाल की जानकारी आपसे शेयर करने वाले हैं.
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उदाहरण के लिए, जो आप फ्लिपकार्ट से कोई भी प्रोडक्ट ऑर्डर करते हैं तो आपको Platform fee, Handling fee, Secure packaging fee जैसे चार्ज देने पड़ते हैं. मगर अब उस काम के पैसे भी देने पड़ेंगे जिसका वादा खुद पोर्टल ने किया था. अब आपको Protect promise fee भी देना होगी. माने अगर ऑर्डर के टाइम ऐप पर लिखा है कि ऑर्डर फलां तारीख को डिलीवर होगा तो उस वादे को निभाने की कीमत भी आपसे वसूल की जाएगी.

जैसे हमने आपसे कहा, हम और आप आमतौर पर प्रोडक्ट के फाइनल अमाउंट को देखते हैं. मगर उसके प्राइस ब्रेकअप पर नजर नहीं डालते और ये सारे चार्जेज यूं ही निकल जाते हैं.
बात सिर्फ फ्लिपकार्ट की नहीं है. Blinkit और Zepto पर भी आप एक्स्ट्रा पैसा दे रहे. उदाहरण के लिए डार्क चॉकलेट पर आपको 210 रुपये अदा करने होंगे. जबकि इसकी एमआरपी 200 रुपये है. माने आप 5 फीसदी ज्यादा खर्च करेंगे.

शायद ये कम लगे तो 200 से कम का कोई प्रोडक्ट ऑर्डर करके देखिए. 103 की चॉकलेट 142 रुपये की पड़ेगी. लगभग 40 फीसदी एक्स्ट्रा. दूध के लिए आमतौर पर एक-दो पैकेट ही ऑर्डर किए जाते हैं, उसमें तो मामला डबल के पार है. अगर आपने एक पैकेट की जगह तीन पैकेट भी ऑर्डर किए तब भी पैसा ज्यादा ही लगेगा. यही हाल Zepto और दूसरे प्लेटफॉर्म्स का है.
अब सर्विस दे रहे तो पैसा ले रहे वाला मामला है. फूड डिलीवरी ऐप्स का भी यही हाल है. प्लेटफॉर्म फीस से लेकर डिलीवरी चार्जेज लगते ही हैं. मगर वहां शायद हम रोज नहीं जाते तो अभी बात क्विक कॉमर्स की ही करते हैं.

मामला बता दिया, अब वो बताते जो हमें आपको बताना है. कोई भी प्रोडक्ट ऑर्डर करने से पहले जरा प्राइस ब्रेकअप पर नजर डाल लीजिए. अगर पैदल जाकर मोहल्ले की किराना दुकान से 103 रुपये में चॉकलेट ला सकते हैं तो ले ही आइए. पैदल चलना भी हो जाएगा और मुमकिन है आप 103 की जगह 100 भी दिए तो दुकान वाले चाचा बुरा नहीं मानेंगे. स्पेशली सिर्फ एक प्रोडक्ट ऑर्डर करना है तो फिर प्राइस ब्रेकअप देख ही लीजिए.
नॉर्मल कंडीशन में ऐसा करना कोई मुश्किल भी नहीं होगा. हां जो आधी रात को या फिर इमरजेंसी में कुछ चाहिए तो फिर कोई बात ही नहीं. वैसे इसका एक पक्ष और भी है. ज्यादा सामान ऑर्डर करने पर डिलीवरी फीस आमतौर पर नहीं लगती, मगर हैंडलिंग चार्जेज तो लगते ही हैं. मतलब अगर आप पइयां-पइयां चलकर जा सकते हैं तो फिर सब खुद ही हैंडिल कर लीजिए. हैंडलिंग चार्जेज के बदले एक छोटी चॉकलेट भी मिल जाएगी.
मोटी बात ये कि ये सब बढ़िया सर्विसेज हैं जो मुसीबत में काम भी आती हैं. लेकिन बिला-वजह एक्स्ट्रा पैसा देना तो ठीक नहीं. बाकी आपका पैसा और आपका विवेक.
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