90 के दशक में टीवी पर आयोडीन वाले नमक के एड हममें से ज़्यादातर लोगों ने देखे हैं. वैसे इतनी दूर क्यों जाएं. आजकल भी जो एड आते हैं, उसमें भी नमक में आयोडीन होना कितना ज़रूरी है, उस पर बड़ा जोर दिया जाता है. सरकार से लेकर सेलेब्स जो ये एड करते हैं, वो आयोडीन पर इतना जोर इसलिए इतना देते हैं, क्योंकि इसकी कमी से होता है घेंघा. अब इस बीमारी का नाम अपने बहुत सुना होगा. टीवी पर इसके एड भी देखें होंगे. इसमें गले के अंदर बहुत ज़्यादा सूजन आ जाती है.
हमें सेहत पर मिल आया प्रदीप का. वो पटना स्थित एक एनजीओ के लिए काम करते हैं. जो घेंघा से जूझ रहे लोगों के इलाज में मदद करता है. उनका कहना है कि हालांकि इंडियन गवर्नमेंट बहुत सालों से इस बीमारी को खत्म करने की कोशिश कर रही है, पर छोटे शहरों और गांवों में ये रोग अभी भी बहुत आम है.
साल 2021 में डाउन टू अर्थ मैगज़ीन में एक आर्टिकल छपा था. उसके मुताबिक, देश में लगभग 5 करोड़ लोगों को घेंघा है. ये प्रेग्नेंट औरतों में भी बहुत आम है, जिनको खाने में आयोडीन की सही मात्रा नहीं मिलती. प्रदीप चाहते हैं हम अपने शो पर घेंघा के बारे में बात करें. ये क्या होता है, क्यों होता है, इसके लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में सही जानकारी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाएं. तो सबसे पहले समझ लेते हैं घेंघा क्या होता है. घेंघा रोग क्या होता है? ये हमें बताया डॉक्टर विनीता तनेजा ने.
-घेंघा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें गले की जगह सूजन आ जाती है.
-हमारी सांस की नली के ऊपर एक ग्रंथी होती है.
-जिसको थायरॉइड ग्लैंड कहते हैं.
-इस थायरॉइड ग्लैंड में विकार या बीमारी होने के कारण घेंघा होता है. कारण -सबसे आम कारण, ख़ासतौर पर हमारे देश में है आयोडीन की कमी.
-हमारे देश की मिट्टी में, जिसमें सब्जियां उगती हैं, उसमें आयोडीन की कमी होती है.
-जिसके कारण शरीर को आयोडीन की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलती है.
-इससे धीरे-धीरे थायरॉइड ग्लैंड में सूजन आती है.
-वो बढ़ता जाता है और घेंघा हो जाता है.
-जब इस ग्लैंड में सूजन आ जाती है तो इसमें दो तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं.
-पहला. सांस की नली में दबाव हो सकता है.
-दूसरा. ग्लैंड के कम या ज़्यादा काम करने से, ग्लैंड जो हॉर्मोन बनाता है उसमें गड़बड़ी के कारण अलग तरह के लक्षण आ सकते हैं.

-इसके अलावा जो कारण होते हैं घेंघा रोग के, उन्हें जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना ज़रूरी है. डायग्नोसिस -इसके लिए आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा.
-कुछ ब्लट टेस्ट होंगे.
-हो सकता है एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड भी करवाना पड़े.
-जिससे डॉक्टर पता करेंगे कि ये किस तरह का रोग है.
-मेडिकल भाषा में घेंघा को अलग-अलग रोगों में बांटा जाता है. टाइप -एक साधारण घेंघा होता है.
-जिसमें हॉर्मोन की मात्रा नॉर्मल होती है.
-दूसरी तरह का घेंघा है जिसे टॉक्सिक नॉड्यूलर गॉयटर कहते हैं.
-इसमें होता तो घेंघा ही है, पर हॉर्मोन की मात्रा ज़्यादा होती है.
-इसके लक्षण शरीर में मौजूद ज़्यादा हॉर्मोन के कारण होते हैं.
-अगर इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं करेंगे तो ये बीमारी बहुत बढ़ती जाएगी. लक्षण -जब घेंघा का दबाव विंड पाइप या फ़ूड पाइप पर पड़ता है तो सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.
-खाना निगलने में दिक्कत हो सकती है.

-अगर हॉर्मोन की कमी हो जाती है तो बच्चे और बड़ों में अलग-अलग तरह के लक्षण आते हैं.
-बहुत छोटे बच्चों की ग्रोथ पर फ़र्क पड़ता है.
-मानसिक और शारीरिक ग्रोथ, दोनों पर असर पड़ता है.
-बड़ों में वेट गेन हो सकता है.
-सुस्ती आ सकती है.
-इसकी वजह से अलग-अलग तरह की समस्या हो सकती है.
-अगर थायरॉइड ग्लैंड कम हॉर्मोन बनाता है तो वज़न कम भी हो सकता है.
-दिल की धड़कन ज़्यादा महसूस हो सकती है.
-ये लक्षण दबाव और हॉर्मोन की कमी या ज़्यादा बनने के कारण होते हैं. बचाव -सबसे ज़रूरी बचाव है खाने में आयोडीन सही मात्रा होना.
-देश में जो भी नकम मिलता है वो सब आयोडाइज़्ड होता है.
-यानी उसमें आयोडीन पहले से डला होता है.

-जितनी मात्रा में हम नमक इस्तेमाल करते हैं, उतनी मात्रा में हमें आयोडीन मिल सकता है.
-ऐसा करने से ये बीमारी नहीं होगी. इलाज -इलाज में कभी-कभी दवाइयां दी जाती हैं.
-कुछ जांच में पता चलता है पेशेंट को सर्जरी करवाने की ज़रूरत है.
-अगर इस बीमारी का इलाज सही समय पर हो जाता है तो शरीर पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ता है.
-दवा से इसका इलाज बहुत अच्छी तरह हो जाता है.
-खाने-पीने का ध्यान रखें.
-सही समय पर इलाज करवाइए.
-ताकि घेंघा रोग आपके शरीर के लिए बड़ी मुसीबत न बने.
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, एडल्ट्स को हर दिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है. प्रेग्नेंसी में हर दिन 220 माइक्रोग्राम जबकि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को रोजाना 290 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है. तो अपने खाने में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा लें. अगर घेंघा हो जाता है तो भी उसका इलाज उपलब्ध है. लक्षण दिखने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं.