(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
कॉटन बड्स और माचिस की तीली नहीं, कान का मैल साफ करने का सही तरीका ये है
माचिस की तीली और सेफ्टी पिन से कान के पर्दे में चोट लग सकती है. इनफेक्शन हो सकता है.

हम सब के कानों में मैल बनता है, जिसे हम ईयरवैक्स भी बोलते हैं. अब हममें से ज़्यादातर इसे घर पर ही कॉटन बड्स, माचिस की तीली, यहां तक सेफ्टी पिंस से निकालने की कोशिश करते हैं. जो भी लोग ऐसा करते हैं, उनसे हमारे व्यूअर दीपक अपनी कहानी शेयर करना चाहते हैं. दरअसल दीपक को हमेशा से ही कानों में ज़्यादा ईयरवैक्स बनने की समस्या रही है. इससे कभी-कभी उनके कान ब्लॉक हो जाते थे. उनमें दर्द होता था. तो दीपक अपने आप ही घर पर तीली या पिन से ये वैक्स निकाल लेते थे. अब इस चक्कर में उन्होंने अपने कान के पर्दे पर चोट लगा ली. नतीजा? भयानक दर्द और इन्फेक्शन. इसलिए दीपक चाहते हैं हम अपने शो पर ईयरवैक्स के बारे में बात करें. डॉक्टर्स से पूछकर बताएं कि उनको ज़्यादा ईयरवैक्स बनने की समस्या क्यों है और इसका क्या इलाज है?
कान में ईयरवैक्स क्यों बनता है?ये हमें बताया डॉक्टर राजेंद्र वाघेला ने.

-ईयरवैक्स बनना एकदम नॉर्मल प्रक्रिया है
-ये एक नेचुरल प्रोसेस है
-जिस तरह हमारे शरीर में पसीने की ग्रंथियां होती हैं
-पसीना तैयार होता है
-उसी तरह कान में भी ग्रंथियां होती हैं जिनको बोला जाता है सिरुमिनस ग्लैंड
-उसी द्वारा बनता है सिरुमिन यानी ईयरवैक्स
-ये एकदम नॉर्मल है
ज़्यादा ईयरवैक्स बनने का कारण?-ईयरवैक्स ज़्यादा या कम बनना बाहरी कारणों पर निर्भर नहीं करता है
-हमारे जेनेटिक्स तय करते हैं कि ईयरवैक्स कैसा है
-किसी का सूखा होता है, किसी का गीला होता है
-किसी का बहुत ही ड्राई और हार्ड होता है
-किसी का जेल जैसा होता है
-वैक्स का रंग भी अलग होता है
-जैसे भूरा, काला या सफ़ेद हो सकता है

-ये सब जेनेटिक्स तय करते हैं
-ये हमारे हाथ में नहीं होता, ये कंट्रोल के बाहर है
ज़्यादा ईयरवैक्स बनने से क्या परेशानी हो सकती है?-ईयरवैक्स ज़्यादा बनने से आमतौर पर कोई परेशानी नहीं होती है
-अगर वो अपने आप बाहर आ जाता है
-यदि ये वैक्स अंदर की तरफ़ फंस जाता है तब कम सुनाई दे सकता है
-कान ब्लॉक महसूस हो सकते हैं
-यदि ये वैक्स ईयरड्रम को छूता है तो कानों में सीटी जैसी आवाज़ सुनाई देती है
-यदि ये सूखा और हार्ड वैक्स है और ये फंस जाए अंदर तो कानों में दर्द हो सकता है
-कई बार ये दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ सकता है
-ये सब प्रॉब्लम्स ईयरवैक्स से आ सकती हैं
-आमतौर पर ईयरवैक्स किसी परेशानी का सबब नहीं बनता है
बचाव और इलाज-ज़्यादा ईयरवैक्स बनना हमारे कंट्रोल के बाहर होता है
-लेकिन अगर इस वैक्स से आपको परेशानी होती है
-तो उसको साफ़ करते रहना ज़रूरी है
-इसको किसी ENT स्पेशलिस्ट से ही साफ़ करवाएं
-क्योंकि कान का वैक्स साफ़ करना अपने आप में टेक्नीक है
-इसे अपने हाथों से नहीं करना चाहिए
-ENT स्पेशलिस्ट इसे प्रोबीन, सिरिंजिंग, सक्शनिंग या दूरबीन द्वारा निकाल सकते हैं
-ईयरवैक्स ख़ुद घर पर निकालने का प्रयास कभी न करें
-ख़ासतौर पर कॉटन बड्स, सेफ्टी पिंस, मेटल पिंस का इस्तेमाल न करें
-क्योंकि कान एक बहुत ही सेंसिटिव ऑर्गन है
-कान के अंदर चोट, ज़ख्म या कान के पर्दे में डैमेज होने का चांस ज़्यादा होता है
-इसलिए इसे ख़ुद से न छेड़ें तो अच्छा है
ज़्यादा ईयरवैक्स बनने से रोकना, आपके हाथ में नहीं है. पर जैसा डॉक्टर साहब ने कहा. इसे घर पर ख़ुद से निकालने की कोशिश न करें. ENT स्पेशलिस्ट से मिलकर उनसे साफ़ करवाएं.
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