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हैदराबाद यूनिवर्सिटी से सटी जमीन पर बुलडोजर लेकर पहुंचा था पुलिस-प्रशासन, HC ने रोक लगाई

तेलंगाना हाई कोर्ट में जमीन की सफाई के खिलाफ NGO वाता फाउंडेशन और एक अन्य व्यक्ति कालापाला बाबू राव ने याचिका डाली थी. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भले ही जमीन कागजों में जंगल के रूप में दर्ज न हो लेकिन यह ‘जंगल जैसी’ है.

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छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच तेलंगाना हाई कोर्ट ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी से सटे 400 एकड़ की 'जमीन की सफाई' पर रोक लगाई.(तस्वीर:PTI)

तेलंगाना हाई कोर्ट ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी से सटी 400 एकड़ ‘जमीन की सफाई’ पर 24 घंटे के लिए रोक लगा दी है. इस मामले की अगली सुनवाई 3 अप्रैल को होगी, तब तक रोक जारी रहेगी. इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि जमीन को नष्ट करना सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का उल्लंघन होगा.

24 घंटे तक लगी रोक

तेलंगाना हाई कोर्ट में जमीन की सफाई के खिलाफ NGO वाता फाउंडेशन और एक अन्य व्यक्ति कालापाला बाबू राव ने याचिका डाली थी. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भले ही जमीन कागजों में जंगल के रूप में दर्ज न हो, लेकिन यह ‘जंगल जैसी’ है. कारण, इसमें पेड़-पौधे, चट्टानें, जंगली जानवर और झीलें मौजूद हैं. उनकी दलील थी कि ऐसे में इसे नष्ट करना सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का उल्लंघन है. यह फैसले वन संरक्षण कानून और वन संरक्षण नियमों से जुड़े हैं.

लेकिन तेलंगाना राज्य की तरफ से पेश हुए एडवोकेट जनरल सुदर्शन रेड्डी ने दावा किया कि यह जमीन कभी जंगल की नहीं थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कहना था कि यह जमीन हमेशा इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए रही है और यह औद्योगिक जमीन है. इसे साल 2003 में एक प्राइवेट खेल मैनेजमेंट कंपनी को दे दिया गया था.

कोर्ट में इस मामले की सुनवाई तेलंगाना हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस रेणुका यारा की बेंच कर रही थी. बेंच ने मामले की सुनवाई को 3 अप्रैल की दोपहर के लिए टाल दिया. साथ ही अगली सुनवाई तक जमीन पर सारी गतिविधियां रोकने का आदेश दिया.

यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन जारी

उधर जमीन पर सरकार की कार्रवाई के खिलाफ हैदराबाद यूनिवर्सिटी का प्रोटेस्ट जारी है. 3 अप्रैल को यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ और छात्रों के समूह ने पूर्वी कैंपस तक विरोध मार्च निकाला. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच फिर झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाईं. छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार तीसरे दिन पेड़ काटे जा रहे हैं और झाड़ियां साफ की जा रही हैं. छात्रों ने अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया. उन्होंने पुलिस और खुदाई करने वाली मशीनों को तुरंत कैंपस से हटाया जाने की मांग की.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रोफेसर बसुथकर जगदीश्वर राव ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की और कहा कि छात्रों और शिक्षकों का ध्यान यूनिवर्सिटी की जमीन को सुरक्षित करने पर होना चाहिए. वाइस चांसलर ने कहा कि ‘विवादित जमीन’ हैदराबाद यूनिवर्सिटी की नहीं है, लेकिन इस पर किसी भी तरह के अतिक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका है कि यूनिवर्सिटी के नाम पर जमीन का आधिकारिक पंजीकरण हो.

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मामले का बैकग्राउंड

तेलंगाना सरकार 400 एकड़ जमीन को विकसित करने और वहां एक आईटी पार्क स्थापित करने की योजना बना रही है. ये जमीन कांचा गाचीबोवली में है जोकि हैदराबाद यूनिवर्सिटी की बाउंड्री से सटा इलाका है. लेकिन यूनिवर्सिटी के छात्रों और कुछ पर्यावरणविद इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय इकोसिस्टम पर असर पड़ेगा.

यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध तब शुरू किया जब बीते दिनों तेलंगाना औद्योगिक अवसंरचना निगम (TGIIC) ने आईटी पार्क बनाने के लिए जमीन की नीलामी के लिए पेड़ और चट्टानों को साफ करने का काम शुरू किया. रविवार को हालात तब बिगड़ गए जब जमीन को समतल करने के लिए बुलडोजर आए. इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ.

उधर, तेलंगाना सरकार का कहना है कि उसने यूनिवर्सिटी की जमीन नहीं ली है. राज्य सरकार ने विपक्षी दलों पर राजनीतिक फायदे के लिए जमीन को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है.

वीडियो: हैदराबाद यूनिवर्सिटी विवाद: इस 400 एकड़ की जमीन को लेकर क्यों मचा है बवाल?