स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनकर तैयार है. पीएम नरेंद्र मोदी ने इनॉगरेशन भी कर दिया है. अच्छे खर्चे के बाद ये ग्रैंड स्टेच्यू बनकर तैयार हुई है. इस पर खुश होने वाले भी हैं, कोसने वाले भी हैं. दोनों की बातें छोड़ दें तो मेन कोसने वाले पीएम मोदी हैं. जो कांग्रेस और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ते. पहले बात सरदार पटेल के स्टेच्यू को लेकर. ये वाली तो सबसे ऊंची है. लेकिन पटेल की एक और मूर्ति का अनावरण खुद नेहरू ने किया था. वो भी उनके जीते हुए. उनके उप प्रधानमंत्री रहते हुए. ये हम नहीं कह रहे, एक अखबार की कटिंग कह रही है.

वैसे तो आपने पढ़ लिया होगा इसमें जो लिखा है. फिर भी सेफ साइड के लिए लिख देते हैं. लिखा है- सरदार पटेल की पहली प्रतिमा उनके उपप्रधानमंत्री रहते 1949 में गोधरा में स्थापित की गई थी. जिसका अनावरण नेहरू ने 22 फरवरी 1949 को किया था. गोधरा में ही पटेल की गांधी से पहली मुलाकात हुई थी, 1917 में. फोटो में नेहरू पटेल की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर मोरार जी देसाई से बात कर रहे हैं. ये किस अखबार में छपा था, हमने बहुत खोजा लेकिन नहीं मिला. ये पक्का हो गया कि तस्वीर फोटोशॉप्ड नहीं है. क्योंकि ये भारत की बड़ी अंग्रेजी पत्रिका Illustrated weekly of india का कवर बनी थी. 27 फरवरी 1949 को.

तार से तार जोड़ते हुए हम टाइम्स कॉन्टेंट वेबसाइट पर पहुंचे. वहां पर भी सेम टू सेम जानकारी लिखी थी. "गोधरा में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति के अनावरण के बाद प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मोरार जी देसाई के साथ बातचीत करते हुए." तारीख भी 22 फरवरी ही लिखी हुई है. लेकिन साथ में साल 1951 लिखा है जिसके साथ 'tentative' जुड़ा है. यानी ये तारीख पक्की नहीं है. इसको पक्का करने के लिए सरदार पटेल की जीवनी पढ़ लीजिए. वो 1950 तक ही गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री थे. यानी ये तस्वीर 1949 की ही है.

इन तस्वीरों की मानें तो जवाहर लाल नेहरू ने पटेल की मूर्ति का अनावरण किया था. पीएम मोदी का वो दावा धराशायी हो जाता है कि जवाहर लाल नेहरू ने या कांग्रेस ने अपने नेता की कद्र नहीं की.
देखें वीडियो, पीएम मोदी ने स्टेच्यू अनावरण के मौके पर भी कांग्रेस को घेरा