हाल में म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप में हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई. न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक, तीन हजार से अधिक लोगों के मरने की खबर हैं. मौत के आंकड़ों के बीच एक प्राइमरी टीचर टिन माउंग के सर्वाइव की कहानी सामने आई है. टिन पांच दिनों तक अपने होटल के बेड के नीचे फंसे रहे. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने जिंदा रहने के लिए अपना पेशाब पिया और स्कूल के एक सबक ने उनकी जान बचाई.
'पांच दिन मलबे में दबा रहा, अपना पेशाब पिया...', म्यांमार भूकंप में फंसे टीचर की कहानी सुन आंसू आ जाएंगे!
भूकंप आया तो टिन ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे में फंस गए और मलबे के बीच वो पांच दिन फंसे रहे.

न्यूज एजेंसी AFP ने लिखा है कि 47 साल के टिन एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए म्यांमार सागाइंग शहर आए थे. सागाइंग, भूकंप के केंद्र के सबसे करीब स्थित इलाकों में से एक था. टिन ने बताया कि भूकंप आते ही पूरा होटल हिलने लगा. उन्हें तुरंत स्कूल में सिखाया गया एक सबक याद आया, “भूकंप आए, तो बिस्तर के नीचे छिप जाओ.”
टिन ने बताया,
“जैसे ही मैं बिस्तर के नीचे गया, पूरा होटल गिर पड़ा और सब कुछ मलबे में बदल गया. मैं बस इतना कह सका, 'मुझे बचाओ!'. मेरा गेस्ट हाउस, ईटों और मुड़ी हुई धातु की चादरों के ढेर में तब्दील हो गया था."
टिन ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे में फंस गए थे और मलबे के बीच वो पांच दिन फंसे रहे.
पानी न मिलने पर पेशाब पियाअस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए ऑक्सीजन ट्यूब और ड्रिप लगे होने की हालत में टिन ने बताया कि
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं नर्क में हूं. मेरा शरीर जल रहा था और मुझे सिर्फ पानी चाहिए था. लेकिन मुझे कहीं से भी पानी नहीं मिल पा रहा था. इसलिए मैंने शरीर से निकलने वाले तरल (यानी पेशाब) को ही पिया.
भूंकप से मांडले शहर की तुलना में सागाइंग में कहीं ज्यादा नुकसान हुआ. सड़कों के टूट जाने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भी बाधा उत्पन्न हुई. इरावदी नदी पर बना फेमस ‘अवा ब्रिज’ भी टूट गया. म्यांमार रेड क्रॉस टीम रेस्क्यू के काम में लगी थी. उन्हें किसी के बचने की उम्मीद नहीं थी. लेकिन टिन के बारे में पता चलते ही मलेशिया की एक रेस्क्यू टीम द्वारा उन्हें बचा लिया गया.
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टिन के आठ भाई-बहनों में से एक नान योन रेस्क्यू के दौरान वहां मौजूद थीं. उन्होंने कहा- मैं उस पल को शब्दों में बयां नहीं कर सकती. मैं खुशी से नाचने लगी, रोने लगी.
जब टिन को अस्पताल में लाया गया, तो उन्होंने अपनी बहन को ‘थम्ब्स-अप’ दिया और कहा,"दीदी, मैं बिल्कुल ठीक हूं." बहन नान योन ने कहा कि टिन की इच्छाशक्ति बहुत मजबूत है, शायद इसी वजह है कि वो बच पाए.
खुली जगहों पर हो रहा इलाजभूकंप के डर से अस्पताल में किसी भी मरीज का इलाज अंदर नहीं किया जा रहा है. टिन को भी एक स्ट्रेचर पर बाहर रखा गया है, जहां नर्सें लगातार उनकी देखभाल कर रही हैं. टिन ने AFP को बताया,
“मुझे खुशी है कि अब मैं आजाद हूं. अगर मैं मर गया होता, तो कुछ नहीं कर पाता. लेकिन अब मैं जो चाहता हूं वो कर सकता हूं.”
टिन ने बताया कि वो अपने टीचिंग के काम पर वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन साथ ही वो एक बौद्ध भिक्षु बनने पर भी विचार कर रहे हैं.
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