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भारत के उस जादूगर की कहानी, जिससे खौफ खाती थीं ब्रिटिश लड़कियां

भारत से निकले एक जादूगर ने पूरी दुनिया को अपने जादू के सम्मोहन में बांध लिया था. कश्मीर में पैदा हुआ Khuda Bux आंखों पर पट्टी की कई लेयर चढ़ाकर भी सामने रखी पूरी किताब पढ़ देता. खुदाबख्श के इस कारनामें का लैब में परीक्षण भी हुआ. उस परीक्षण में क्या निकला और उसके बाद क्या हुआ, ये कहानी हम आपको बताएंगे.

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खुदा बख्श के डर से ब्रिटेन में लड़कियों ने घर से निकलना बंद कर दिया.

1930 का दशक. ये वो दौर था जब लंदन पेरिस, और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में जादूगरों की धूम मची रहती थी. लड़की को बीच से काट देना, हवा से कबूतर निकाल देना, ऐसे तमाम शो चलते थे. इनमें सबसे रोमांचकारी था- the man with X-ray eyes. भारत से आया एक जादूगर, जो दावा करता था कि वो बिना आंख के देख सकता है. आंखों पर पट्टी बांधकर देखने का दावा, यूं कोई विशेष बात नहीं थी. लेकिन ये शख्स सिर्फ पट्टी नहीं बांधता था. आटे की लोई के ऊपर ढेर सारी रुई लगाकर आंखों के सॉकेट के ऊपर रखी जाती. उसके ऊपर पट्टियों के ढेर सारे फोल्ड. इसके बावजूद वो सामने रखी पूरी किताब पढ़कर सुना देता.

 ये शो इतना फेमस हुआ कि उसे टीवी शो मिलने लगे. खूब शोहरत मिली. लेकिन फिर एक रोज़ एक ब्रिटिश रिसर्चर ने कहा, ये जादू-वादू कुछ नहीं है. मैं प्रूव करके दिखाऊंगा. रिसर्चर इससे पहले कई जादूगरों, तांत्रिकों की पोल पट्टी खोल चुका था. लेकिन जादूगर फिर भी तैयार हो गया. तय हुआ कि एक साइंस लैब में सबके सामने परीक्षण होगा. परीक्षण हुआ. और फिर जो रिज्लट सामने आया, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. ब्रिटिश लड़कियां डरने लगी और कहने लगी कि वो उस जादूगर के आसपास भी नहीं फटकेंगी, क्यों? ऐसा क्या किया था जादूगर ने?

कौन था ये जादूगर, जिसके ऊपर एक फेमस अमेरिकन डायरेक्टर ने फिल्म भी बनाई! आज हम आपको ये पूरी कहानी विस्तार से बताएंगे.

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खुदा बख्श, क्रेडिट - इंडिया टुडे

कहानी की शुरुआत होती है, साल 1905 से. कश्मीर का अखनूर इलाका. यहां पैदाइश हुई खुदा बख्श की. पिता रेलवे में TC थे. परिवार अच्छा खासा अमीर था. लेकिन खुदा बख्श का दिल पढ़ाई में न था. उसे जादू में दिलचस्पी थी. इसलिए उसने ट्रेन का टिकट कटाया और एक दिन पहुंच गया लाहौर. लाहौर में उन दिनों प्रोफ़ेसर मूर नाम के एक जादूगर का जलवा था. खुदाबख्श उनसे जादू सीखना चाहता था. लेकिन अंत में निराशा हाथ लगी. एक मशहूर ब्रिटिश लेखक रोआल्ड डाल के साथ बातचीत में बख्श ने बताया, 

प्रोफ़ेसर के साथ रहना स्कूल जाने से अच्छा था. लेकिन जल्द ही मुझे समझ आ गया कि ये हाथ की कलाकारी है. इसमें असली जादू जैसा कुछ भी नहीं. 

हरिद्वार में सीखा जादूगरी का हुनर

खुदा बख्श असली जादू सीखना चाहता था. कई बरस यहां वहां भटकने के बाद वो पहुंचा हरिद्वार. बकौल बख्श, हरिद्वार में उसने एक योगी के साथ साधना की. और कई साल के अभ्यास के बाद वो अपने माइंड को स्थिर करने में पारंगत हो गया. इसके बाद खुदा बख्श ने बर्मा, सीलोन, और बॉम्बे की कई यात्राएं की. जहां वो जादू के शो दिखाने लगा. ये सामान्य जादू की तरकीबें थी. जो लोगों का मनोरंजन करती थीं. 

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   क्रेडिट - इंडिया टुडे
जलते कोयले पर चलने से मिली शोहरत

लेकिन फिर 1930 के आसपास एक रोज़ उसने ढाका में ऐसा शो दिखाया, जिसने खुदा बख्श को रातों रात पॉपुलर बना दिया. ढाका में एक शो के बाद उसने लोगों के सामने दावा किया कि वो आग पर चल सकता है. सामने कोयलों की चादर थी. खुदा बख्श से पहले तीन लोग लोग कोयलों के ऊपर चले लेकिन पैर जला बैठे. इसके बाद आई खुदा बख्श की बारी. वो बिना किसी दिक्कत, कोयलों के ऊपर चलता चला गया. उसके पैरों पर जलने का एक निशान तक नहीं था. 

इस करतब की बदौलत खुदा बख्श इतना पॉपुलर हुआ कि उसे विदेशों से ऑफर आने लगे. अंग्रेज़ी पहचान बनाने के लिए खुदा बख्श ने अपना नाम बदलकर कुडा बक्स कर लिया. उसने पेरिस और लंदन में शो शुरू किए. उसके सबसे प्रचलित शो का नाम हुआ करता था- “the man with X-ray eyes". इसमें वो आंखों पर पट्टी बांध कई तरह के करतब दिखाता, मसलन बिना देखे- किताब पढ़ना. सुई में धागा डालना, और सबसे रोमांचक खेल- आंख बंद कर सामने खड़े लड़के के सर पर रखे सेब पर गोली चलाना. 

रिसर्च लैब में हुआ जादू का परीक्षण

इन करतबों की बदौलत बख्श की शोहरत दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी. ऐसे में उस पर ध्यान गया- हैरी प्राइस का. हैरी प्राइस एक नामी psychic researcher थे. उन्होंने जादू टोने का दावा करने वाले तमाम जालजासों का भांडाफोड़ कर अपना नाम बनाया था. घोस्ट हंटर के नाम से मशहूर हैरी प्राइस ने खुदा बख्श को चैलेंज दिया कि वो एक लैब में उनके सामने अपना जादू दिखाएं. बख्श तैयार हो गए. इसके बाद खुदा बख्श के दो ऐसे टेस्ट हुए, जिनके परिणामों ने पूरे लंदन में सनसनी फ़ैली दी 

10 जुलाई, 1935 की तारीख. University of London Council for Psychical Investigation के एक कमरे में बख्श पर कुछ टेस्ट हुए. अपनी किताब, Confessions of a Ghost-Hunter में हैरी प्राइस लिखते हैं, 

हमने बख्श की आंखों में आटे की दो लोइयां बांध दीं. इसके बाद टेप और बैंडेज लगाकर उसके ऊपर एक काला मास्क पहना दिया. बख्श की आंखें बंद थीं. बस मुंह और नाक का हिस्सा खुला था. इसके बाद लोगों ने एक के बाद एक बख्श के सामने एक किताब रखी. और बख्श ने उन्हें वैसा का वैसा ही पढ़ डाला. 

शोधकर्ताओं ने कई बार बख्श की पट्टियां खोलीं और दोबारा बांधी लेकिन रिजल्ट सेम का सेम रहा. बाकायदा रिसर्चर्स ने बख्श के सर के पीछे किताब रखी, तब भी उन्होंने हूबहू पढ़ डाला. इस टेस्ट में हालांकि बख्श एक बार फेल भी हुए. जब सर पर काला कपड़ा डालने के बाद वो ये नहीं बता पाए कि कमरे की लाइट ऑन है या ऑफ.

इसके बावजूद टेस्ट के रिजल्ट्स चौंकाने वाले थे. जिसने हैरी प्राइस को हैरत में डाल दिया. उन्होंने बख्श से एक और टेस्ट देने को कहा. बख्श इसके लिए भी तैयार हो गए. लगभग दो महीने बाद, यानी सितम्बर में बख्श की काबिलियत का एक और परीक्षण किया गया. इस टेस्ट में बख्श से आग पर चलने को कहा गया. आग पर चलने का करतब आज आम है. लेकिन उस दौर में बख्श पहले इंसान थे, जिन्होंने ब्रिटेन में ये करतब दिखाया था. डॉक्टरों की मौजूदगी में बख्श जलते हुए कोयले से गुजर गए. डॉक्टरों ने उनके पैर कई बार टेस्ट किए. कई का मानना था कि बख्श ने अपने पैरों में खास मलहम लगाया है. लेकिन डॉक्टरों को उनके पैरों में कुछ न मिला. 

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हैरी प्राइस, क्रेडिट - इंडिया टुडे
जलते कोयले पर चलकर ‘सोना’ बने खुदा बख्श

बख्श के करतब असल में जादू नहीं थे. कोयले पर राख की परत जम जाती है. इस कारण लोग कोयलों पर चल सकते हैं. ये बात आज सामान्य ज्ञान है. लेकिन उस समय बख्श पर हुए परीक्षणों की खबर जैसे ही अखबार में छपी, वे पूरे ब्रिटेन में मशहूर हो गए., प्रेस ने उन्हें "the wonder of the century" और "eighth wonder of the world" जैसे नाम दिए. और उनके शोज़ में भीड़ उमड़ने लगी. 

बाद में बख्श को अपना टीवी शो भी मिला. उनके करतब को Ripley's Believe It Or Not नाम के एक पॉपुलर शो में भी दिखाया गया. आंख बंद कर कुछ भी पढ़ लेने का उनका करतब इतना फेमस हुआ कि कई लोग इसे सच मानने लगे. बख्श के साथ परफॉर्म करने वाली तीन लड़कियों ने तो साफ़ कह दिया कि उनका ड्रेसिंग रूम बख्श के रूम से बहुत दूर होना चाहिए. क्योंकि उन्हें डर था कि बख्श दीवार के आरपार देख सकते हैं. बख्श ने इसके बाद भी कई साल तक ब्रिटेन में शोज़ किए. जिसके बाद वो अमेरिका चले गए. अमेरिका के लॉस एंजेलेस शहर में वो अपने शोज़ दिखाया करते और बाकी जादूगरों के साथ ताश खेला करते. इतिहासकार जॉन बूथ लिखते हैं, 

बंद आंखों से देख पाने की बख्श की काबिलियत का ऐसा डर था कि उनके साथ ताश खेलने वाले जादूगर भी कहते, अगर बख्श आंख में पट्टी बांधकर खेले तो उन्हें हराना लगभग नामुमकिन है.

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खुदा बख्श की कहानी पर बनी फिल्म

बख्श ने अपनी बाकी की जिंदगी लॉस एंजेलेस में यूं ताश खेलते ही बिताई, और 1981 में वहीं उनका निधन हो गया. खुदा बख्श की कहानी पर कुछ साल पहले फिल्म आई थी, The Wonderful Story of Henry Sugar . डॉक्टर स्ट्रेंज वाले बेनेडिक्ट कम्बरबैच ने इस फिल्म में मेन भूमिका निभाई थी. ये फिल्म रोआल्ड डाल नाम के एक मशहूर ब्रिटिश लेखक की कहानी पर बेस्ड है. रोआल्ड डाल खुदा बख्श से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बख्श का इंटरव्यू लिया था. और उन पर एक कहानी भी लिखी थी. रोआल्ड डाल ने जब खुदा बख्श से उनकी काबिलियत का राज़ पूछा तो बख्श ने बताया कि वो कई सालों तक हर रोज़ एक मोमबत्ती पर ध्यान केंद्रित किया करते थे. जिसके चलते उन्होंने बंद आखों से देखने की काबिलियत अख्तियार कर ली. हालांकि, ये बात कितनी सच है, कहना मुश्किल है.

जिन्होंने खुदा बख्श का टेस्ट लेने वाले हैरी प्राइस ने इस पर एक थियरी दी थी. उनके अनुसार बख्श की आंख में पट्टी बांध देने के बावजूद नाक और पट्टी के बीच में जगह बच जाती थी. संभवतः इसी के चलते वो बंद आंखों से भी सामने रखी किताब पढ़ लेते थे. हम इसी नोट पर ये कहानी खत्म करते हैं. और गेंद आपके पाले में छोड़ते है, आप तय करें ये खुदा बख्श का जादू था या कुछ और.

वीडियो: तारीख: कहानी खुदा बख्श की, एक इंडियन जादूगर जो बंद आंखों से देखने का दावा करता था