गृह मंत्रालय (Home Ministry Of India) ने 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (SIMI) को UAPA के तहत बैन कर दिया है. SIMI पर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप हैं. गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. पोस्ट में गृह मंत्रालय ने बताया,
SIMI पर गृह मंत्रालय का अब कौन सा फैसला आया?
SIMI को इससे पहले साल 2014, 2019 में बैन किया जा चुका है. साल 2001 में SIMI को पहली बार बैन किया गया था.
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'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाले विज़न को बढ़ावा देते हुए 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (SIMI) को अगले पांच साल के लिए UAPA के तहत ग़ैरकानूनी संगठन घोषित किया जाता है. '
गृह मंत्रालय ने पोस्ट में आगे बताया,
' SIMI को भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है.'
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पहले भी बैन हो चुका हैइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले एक फरवरी 2019 को SIMI को बैन किया गया था. उस वक्त गृह मंत्रालय की तरफ से नोटिफिकेशन जारी किया था. तब SIMI पर आरोप था कि संगठन गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल है.
जारी किए गए नोटिफिकेशन में गृह मंत्रालय ने SIMI के खिलाफ दर्ज किए 58 मुकदमों का हवाला दिया था. इनमें से कुछ मामले साल 2017 में गया में हुए धमाकों, 2014 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए धमाकों और साल 2014 में भोपाल में जेल ब्रेक की घटना से जुड़े थे. गृह मंत्रालय का ये फैसला 15 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के फैसले के बाद आया था. साथ ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल पुलिस ने सरकार को SIMI के लीडर सफदर नागोरी और अबु फैजल के खिलाफ आपराधिक मामलों में संप्लित होने के दस्तावेज दिए थे.
बता दें कि 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में SIMI की स्थापना हुई थी. साल 2001 में इसे सबसे पहली बार गैरकानूनी घोषित किया गया था. तब से कई बार संगठन पर बैन लगाया जा चुका है.
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