हरियाणा कैडर की एक महिला IAS अफसर अनीता यादव को फिरौती के लिए कॉल आ रहे हैं. उन्होंने इसके खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई है. कितनी और किस लिए फिरौती मांगी गई? अधिकारी अनीता यादव के मुताबिक कथित 200 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले की जांच के सिलसिले में उनसे 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी जा रही है. उनका आरोप है कि कॉल करने वाला शख्स उन्हें धमकी देते हुए कहता है कि अगर वो रकम दे देती हैं तो जांच से बच जाएंगी. पिछले साल सितंबर में अनीता यादव का नाम फरीदाबाद में हुए एक घोटाले में सामने आया था. इस मामले की जांच अभी चल रही है.
हरियाणा की IAS को फोन कर बोला, '5 करोड़ दो, घोटाले में क्लीन चिट लो, नेता जी ने कहा है'
मामला 2004 बैच की IAS अनीता यादव से जुड़ा है. उनके कार्यकाल में फरीदाबाद नगर निगम में 200 करोड़ रुपये का घोटाला होने का आरोप है.

अनीता यादव ने सोमवार 6 मार्च की रात को गुरुग्राम के सेक्टर 50 पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई. इंडिया टुडे/आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने शिकायत में बताया,
'3 मार्च को मुझे एक फोन कॉल आया था. कॉल करने वाले शख्स ने खुद का नाम ऋषि बताया. एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा इन्वेस्टिगेट किए जा रहे केस में मेरा नाम है. उस केस में क्लीन चिट देने के एवज में पांच करोड़ रुपये की मांग की. कॉल करने वाले शख्स ने बताया कि उसे किसी नेता ने ऐसा करने के निर्देश दिए हैं.'
शिकायत में अनीता ने आगे बताया,
'4 मार्च को उसी शख्स का फिर से कॉल आया. वो मुझे धमका रहा था कि अगर मैंने फिरौती की रकम नहीं दी तो इसका अंजाम मेरे लिए अच्छा नहीं होगा. पिछले दो दिनों में जिस तरह से ये घटनाएं हुई हैं, उनसे मैं सदमे में हूं. मुझे अपने परिवार की बहुत चिंता हो रही है.'
महिला अधिकारी की शिकायत के बाद आरोपी ऋषि के खिलाफ IPC की धारा 385 (फिरौती के लिए शख्स को डराना धमकाना) और 506 (आपराधिक साजिश के तहत डराना धमकाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने मामले पर केस दर्ज होने की पुष्टि की है.
अनीता यादव 2004 बैच की IAS हैं. मार्च 2019 में वो फरीदाबाद नगर निगम (FMC) में आयुक्त के पद पर नियुक्त की गईं थीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2020 में फरीदाबाद नगर निगम के तत्कालीन पार्षद दीपक चौधरी, दीपक यादव, महेंद्र सरपंच और सुरेंद्र अग्रवाल ने FMC में करोड़ों का घोटाला होने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों ने मिलीभगत कर बिना काम हुए ही एक ठेकेदार को करीब 200 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था.
मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी थी. सितंबर 2022 में इस मामले में अनीता यादव का भी नाम सामने आया था. इसके बाद उनके खिलाफ भी जांच शुरु हो गई जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती भी दी थी. अनीता यादव का कहना था कि उनके खिलाफ इंक्वायरी करने के अधिकार ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास हैं. अनीता के मुताबिक पुलिस अधिकारी इन्वेस्टिगेशन कर सकते हैं, इंक्वायरी नहीं. अब उन्होंने दावा किया है कि इसी मामले की धमकी देकर उनसे करोड़ों रुपये मांगे जा रहे हैं.
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