बिहार के लखीसराय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में जिलाधिकारी (DM) संजय कुमार सिंह एक स्कूल के प्रिंसिपल को उनके पहनावे के लिए डांटते नजर आ रहे हैं. प्रिंसिपल कुर्ता पायजामा और गमछा ओढ़े नजर आ रहे हैं. डीएम प्रिंसिपल से कहते नजर आ रहे हैं कि उन्हें लगा कि वे कोई नेता हैं. आप शिक्षक हैं तो शिक्षक की तरह रहिएगा. अपने आपको इस वेशभूषा में रखिएगा तो आप शिक्षक रहने लायक नहीं हैं.
टीचर के कुर्ता-पायजामा वाले वीडियो पर डीएम ने लल्लनटॉप से कहा - "मुझसे गलती हो गई"
टीचर को हड़काते हुए डीएम ने कहा था - "आप टीचर हैं? मुझे लगा आप नेता हैं."

मामला लखीसराय के बालगुदर पंचायत का है. डीएम संजय कुमार सिंह 6 जुलाई को पंचायत में विकास कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे. इसी दौरान वे कन्या प्राथमिक विद्यालय भी चले गए. जिस प्रिंसिपल को डीएम डांट रहे हैं, उनका नाम निर्भय कुमार सिंह है. स्थानीय न्यूज कवर करने वाले पोर्टल 'लखीसराय Live' ने यह वीडियो पोस्ट किया है.
डीएम जिस क्लास में घुसते हैं, उसमें छात्र अपनी किताबों के साथ जमीन पर बैठे हैं. वहां कोई बेंच नहीं है. इसके अलावा कोई भी छात्र स्कूल ड्रेस में नजर नहीं आए. इसपर जब डीएम ने छात्रों से पूछा तो उन्होंने बताया कि स्कूल ड्रेस नहीं मिला है. डीएम ड्रेस को लेकर प्रिंसिपल से सवाल करते हैं. जवाब में वे कहते हैं कि ड्रेस का पैसा अभिभावक के खाते में जाता है.
इस ड्रेस में मत रहिए- डीएमवीडियो में डीएम कहते हैं,
"किसी तरीके से आप शिक्षक जैसा लग रहे हैं? मुझे तो लगा कि आप स्थानीय जनप्रतिनिधि हैं. शिक्षक हैं आप? अगर शिक्षक हैं तो इस वेशभूषा में मत रहिए. क्लास में आइये तो शिक्षक की तरह रहिये. क्लास के बाद आपको जैसे भी पहन के रहना है तो रहिये. आपको तो यह भी समझ नहीं आता है कि जब कोई निरीक्षण के लिए आ रहा है तो कैसी तैयारी रखनी चाहिए."
जिस वक्त डीएम स्कूल पहुंचे तो बिजली भी नहीं थी. क्लासरूम में बहुत कम रोशनी थी. इस पर प्रिंसिपल कहते हैं,
"बिजली तो नहीं ही है. बिजली बहुत कम रहती है. कभी रहती है, कभी नहीं रहती है. बहुत कम रहती है."
इस पर डीएम का पारा गरम हो गया और वे प्रिंसिपल को फटकारने लगे. वे कहते हैं,
तुरंत वेतन रोकने का आदेश"अरे कितनी देर रहती है. आप हमसे बहस कर रहे हैं. ऐसे मत बताइये कि बहुत कम देर रहती है. आप किसको बता रहे हैं, मालूम नहीं है. कितनी रहती है ये बताइये, 2 घंटे या 4 घंटे? हर चीज को ऊपर वालों पर मत फेंकिये. अपनी जवाबदेही भी समझिए. चार बल्ब लगाना कोई मुश्किल नहीं है."
क्लास से बाहर निकलते हुए प्रिंसिपल कहते हैं कि एक रुपया भी फंड नहीं है. क्लास के भीतर प्रिंसिपल को फटकार लगाने के बाद डीएम बाहर निकलते हैं. स्कूल परिसर में ही मीडिया के सामने एक अधिकारी को वो कहते हैं कि आपका प्रिंसिपल कैसा है जी, हमारे सामने कुर्ता और पायजामा पहनकर आराम से नेता की तरह बैठे हुए हैं. डीएम अधिकारी को कहते हैं,
"ना हम उनकी कोई तत्परता देख रहे हैं कि वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं. उनको कारण बताओ नोटिस भेजिए कि उन्हें यहां से क्यों नहीं हटा दिया जाए. इनका वेतन तुरंत बंद कर दीजिए. वे प्रिंसिपल रहने लायक नहीं हैं."
क्लास के बाहर भी वे प्रिंसिपल पर चिल्लाते हैं. डीएम कहते हैं कि हमलोग आपको कह देंगे कि इनको जनप्रतिनिधि ही बना दिया जाए. आप जाकर लोगों से वोट मांगते रहिएगा. डीएम एक अधिकारी से कहते हैं कि आप इनके खिलाफ एक रिपोर्ट दीजिएगा. जिस तरीके से आए हैं. हमारे निरीक्षण के दौरान ये कुर्ता और पायजामा में थे और गमछा रखे थे. आपको (प्रिंसिपल) पता चल जाएगा.
सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगीडीएम स्कूल परिसर में कई लोगों से कहते हैं कि आप लोगों की अकर्मण्यता और शिथिलता चरम स्तर पर पहुंची हुई है. डीएम स्कूल की दूसरी कक्षा में भी जाते हैं जहां पंखे तक नहीं लगे हैं. इस पर वे शिक्षा अधिकारी को भी डांटते हैं.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रिंसिपल के साथ डीएम के इस व्यवहार पर नाराजगी जताई है. कई लोगों ने डीएम की तुलना अंग्रेजों से कर दी. आरजेडी की नेता प्रियंका भारती ने ट्विटर पर लिखा,
"शिक्षक ना पढ़ाए तो दिक्कत हो सकती है पर कुर्ता पायजामा से क्या दिक्कत है? कुर्ता पायजामा नेतागिरी होता है? कुर्सी का इतना धौंस दिखाना क्या है? अफसरशाही का नंगा नाच हो रहा है बिहार में. लखीसराय के डीएम संजय कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए."
बीजेपी नेता अजय सेहरावत ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा,
DM ने क्या जवाब दिया?"कौन हैं ये घमंडी और बदतमीज DM, जिसे हिंदुस्तानी वेशभूषा से दिक्कत हैं और नेताओं से भी. वीडियो बनाकर इस तरह से टीचर को बेइज्जत करना क्या सही हैं?"
वीडियो वायरल होने के बाद हमने लखीसराय के डीएम संजय कुमार सिंह से उनका पक्ष जाना. उन्होेंने कहा कि इसे अनावश्यक तरीके से तूल दिया जा रहा है. दी लल्लनटॉप से बात करते हुए संजय सिंह ने कहा कि पूरे मामले में सिर्फ एक हिस्से को शेयर कर सबको दिखाया जा रहा है. उन्होंने कहा,
“ये सही है कि हमने उनके पहनावे पर बोलकर गलती कर दी. इसे मैं भी महसूस कर रहा हूं. लेकिन इसे संदर्भ के साथ समझने की जरूरत है. बैकग्राउंड यह है कि उस प्राइमरी स्कूल के क्लासरूम में बेंच नहीं है, बल्ब नहीं है, पंखे नहीं हैं. लेकिन हेडमास्टर के रूम में बल्ब और पंखे हैं. मुझे जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि हर साल हर क्लास के लिए 20 हजार रुपये भेजे जाते हैं. इस राशि को प्रिंसिपल और विद्यालय समिति के अध्यक्ष ही निकालते हैं. इसका मतलब है कि उन्होंने उस राशि का दुरुपयोग किया."
डीएम ने आगे कहा कि इसी बैकग्राउंड के कारण वे नाराज हो गए. उन्होंने हमें बताया,
“जब हम कोई अच्छी चीज करना चाहते हैं तो लोग उसे नकारात्मक तरीके से लेते हैं. आप बच्चों के बीच में जा रहे हैं तो सही तरीके से रहना चाहिए. हम कुर्ता पायजामा के खिलाफ नहीं हैं आप आराम से पहनिए. लेकिन आपने कुर्ते का दो बटन खोला हुआ है, गमछा लपेट रखा है. बच्चे बड़े-बुजुर्गों और शिक्षकों से सीखते हैं. इसलिए हमें इसका ध्यान रखना चाहिए.”
डीएम ने कहा कि प्रिंसिपल और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस भेजा गया. उन्हें पता चला कि इस निरीक्षण के बाद वहां एक या दो कमरे में पंखे लग गए हैं. डीएम का कहना है कि उनके दिमाग में भी आया कि वे वहां पंखे के लिए पैसे दे दें लेकिन ये समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि जब सरकार फंड कर रही है तो आप उसका सही तरीके से इस्तेमाल करिए.
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