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पैगंबर मोहम्मद के किस काम की वजह से बना वक्फ? भारत में कैसे आया?

क्या वक्फ का मतलब वही होता है जो अमित शाह ने बताया? ये शब्द अगर दूसरे खलीफा के समय में अस्तित्व में आया था तो भारत में इसे सबसे पहले कब इंट्रोड्यूस किया गया? इसका इतिहास (Waqf Board History) क्या है और कैसे इसका कनेक्शन हदीस तक जाता है?

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वक्फ संशोधन बिल का विरोध (India Today)

“'वक्फ' का अर्थ है अपनी जमीन, महत्त्वपूर्ण संपत्ति या एसेट को इस्लाम की भलाई के लिए अल्लाह के नाम पर दान करना. दान केवल अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है. सरकार या किसी और की संपत्ति का नहीं.” 

ये बातें गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill 2025) पर विपक्ष के सवालों के जवाब देते हुए कहीं. उन्होंने बताया कि वक्फ का समकालीन अर्थ इस्लाम के दूसरे खलीफा के समय में अस्तित्व में आया. उन्होंने वक्फ को एक ‘चैरिटेबल एंडोनमेंट’ यानी धर्मार्थ संस्था बताया. 

सवाल है कि क्या वक्फ का मतलब वही होता है जो अमित शाह ने बताया? ये शब्द अगर दूसरे खलीफा के समय में अस्तित्व में आया था तो भारत में इसे सबसे पहले कब इंट्रोड्यूस किया गया? इसका इतिहास (Waqf Board History) क्या है और कैसे इसका कनेक्शन हदीस तक जाता है? 

क्या है वक्फ और इसका इतिहास?

‘वक्फ’ अरबी भाषा का शब्द है. बताते हैं कि ये शब्द 'वक्फा' से निकला है जिसका मतलब होता है ‘ठहराव’. दी लल्लनटॉप से बातचीत में लेखक हाफिज किदवई बताते हैं, “यह शब्द ‘वक्फा’ से बना है. बातचीत में हम बोलते हैं न कि ‘थोड़ा वक्फा ले लें तो हम उनसे बात कर लें.’ ये जो थोड़ा सा वक्त लेना है, यही (बाद में) वक्फ (बना) है. ठहराव या रोका जाना. ये लफ्ज यहीं से लिया गया है.” 

लेकिन इसका मतलब ‘धर्मार्थ के लिए दान की संपत्ति’ से कैसे जुड़ गया? हाफिज किदवाई कहते हैं, “हजरत मोहम्मद साहब हिजरत के बाद जब मक्का से मदीना गए थे. तब वहां उन्होंने एक मस्जिद तामीर कराई थी. इस्लाम में ये वो पहली प्रॉपर्टी थी, जिसे उन्होंने समाज को समर्पित कर दिया था. तब उन्होंने कहा था कि जो भी चीजें बनाई जाएं, वो मुसलमानों के किसी काम की हों." 

लेखक ने आगे बताया, “वह मक्का से गए थे. मदीना उनकी कोई जगह नहीं थी. वहां उन्होंने जमीन खरीदी और मस्जिद बनवाई. तब उन्होंने कहा कि जो भी प्रॉपर्टी बनाई जाए, वो सार्वजनिक हो और सबके काम आए. ऐसी संपत्ति को ही आज वक्फ कहा जाता है. हालांकि तब ये लफ्ज (वक्फ) प्रयोग में नहीं लाया गया.”

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वक्फ की गई पहली संपत्ति

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि वक्फ पहली बार दूसरे खलीफा उमर के समय में अस्तित्व में आया था. इसे लेकर हाफिज किदवई किस्सा बताते हैं, 

“हजरत उमर ने जब इस्लाम स्वीकार किया और मोहम्मद साहब के पास आए, तो उन्होंने कहा कि खैबर में हमारी कुछ जमीन है. इसे हम दान करना चाहते हैं. तब मोहम्मद साहब ने उनसे कहा कि जमीन को ऐसे दान मत करो. इसको वक्फ कर दो, ताकि इसको न कोई बेच सके, न ही इसको किसी के नाम किया जा सके. इस जमीन से जो भी फसल और जो भी पैसा होगा वो इस्लाम को मानने वाले कमजोर तबकों के काम आएगा. यही वो सबसे पहली प्रॉपर्टी थी जो वक्फ की गई. यहां ’वक्फ' शब्द का इस्तेमाल हो गया. वैसे पहली तो मस्जिद-ए-नबी है जिसकी तामीर हजरत मोहम्मद ने हिजरत के वक्त की थी.”

किदवई ने बताया कि आगे जाकर जब उमर इस्लाम के दूसरे खलीफा बने तो उन्होंने ‘वक्फ’ को बहुत सपोर्ट किया ताकि लोग अपनी प्रॉपर्टी दान करें. उसको वक्फ करें जिससे कि वो किसी को बेची या हस्तांरित नहीं की जा सके.

हजरत उमर के बाद के बाकी तीनों खलीफाओं हजरत अबूबख्श सिद्दीक, हजरत उस्मान और हजरत अली ने भी इसे अपनाया. फिर इस्लामी हुकूमतें आती गईं तो इस पर और ज्यादा काम किया गया. हाफिज किदवई ने साफ कहा, “वक्फा लेना यानी रोकना ही मूल शब्द है. जैसे- हजरत उमर ने कहा कि हम ये जमीन दान करना चाहते हैं तो पैगंबर मोहम्मद ने कहा कि इसको दान मत करो. इसको रोक लो. इससे होने वाली कमाई को दान करो. इस तरह से यह भलाई के लिए किए जाने वाले दान से भी जुड़ गया और उसका पर्यायवाची बन गया.”

भारत में कब आया ‘वक्फ’?

भारत में इस्लाम पहुंचा तो वक्फ भी पहुंच गया. आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 7वीं सदी में इस्लामिक व्यापारियों के कदम भारत में पड़े. उन्हीं के साथ वक्फ भी भारत आया. बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश जैसे शासकों ने वक्फ की परंपरा को आगे बढ़ाया.

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हाफिज किदवई बताते हैं कि मुगलों ने वक्फ पर काफी फोकस किया था. वहीं इस पर कानून अंग्रेजों के समय में बना. हाफिज ने बताया, “इस्लामिक वक्फ ऐक्ट करके एक कानून 1913 में बना था. बाद में हिंदुस्तान में वही जारी रहा. इसके कई सालों बाद 1995 में वक्फ बोर्ड  बना. बोर्ड अलग चीज है. इसका मतलब वक्फ में जो प्रॉपर्टी दी जा रही है उसका प्रबंधन करने वाली संस्था है.”

भारत में कबसे मौजूद है वक्फ?

आजतक  से बातचीत में जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब ने बताया, “भारत में वक्फ की प्रथा पहले भी व्यक्तिगत स्तर पर मौजूद थी. लोग अपनी संपत्ति गरीबों की मदद के लिए या धार्मिक कार्यों के लिए छोड़ जाते थे. ब्रिटिश लोगों ने इस व्यवस्था को संगठित करने की कोशिश की. इसकी शुरुआत 1913 से हुई. 1923 में इसे लेकर एक कानून बना. आजादी के बाद भी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के तहत ये व्यवस्था चल रही थी. बाद में साल 1995 में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया. इसका काम देश में वक्फ की संपत्तियों की देखरेख करना था.”

वहीं लखनऊ के मौलाना और ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ पर्सनल बोर्ड के सदस्य खालिद रशीद फिरंगी महली ने ‘आजतक’ को बताया, “आसाना भाषा में कहा जाए तो वक्फ वो संपत्ति है, जिसे इंसान अपनी मिल्कीयत से निकालकर अल्लाह को दे देता है. इसके पीछे नीयत होती है कि इसका फायदा अल्लाह के बंदों को पहुंचे. यही वक्फ है.”

हदीस से कनेक्शन
इसे समझना मुश्किल नहीं. हाफिज किदवई बताते हैं, “हदीस क्या है? मोहम्मद साहब ने जो कहा वही हदीस है. वही सुन्नत है. ये तो मोहम्मद साहब ने कहा था उमर से कि जमीन दान मत करो. उसे वक्फ कर दो. तो वो हदीस हो गई. मोहम्मद साहब के कहे गए हर काम को हदीस कहा जाता है.”

वक्फ के बारे में पैगंबर ने कहा तो यह भी हदीस हो गई. इसी हदीस को चारों खलीफाओं ने जारी रखा, जिसे बाद में भी इस्लामिक शासकों ने कायम रखा.

वीडियो: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम होंगे या नहीं, अमित शाह ने बता दिया