The Lallantop

क्या है ई-सिगरेट, जिस पर सरकार ने बैन लगाया है

सस्ती है, टिकाऊ है, धुआं भी नहीं छोड़ती तो फिर इससे दिक्कत क्या है?

post-main-image

"मैं 48 साल तक भारी मात्रा में सिगरेट पीता रहा था. मैंने कई बार इसे छोड़ने की कोशिश की, लेकिन तंबाकू की लत ने मुझे जकड़ रखा था. अपनी इस आदत के लिए मैं हर महीने 350 डॉलर के लगभग खर्च कर रहा था. मतलब हर साल 4,000 डॉलर से ज़्यादा. लगभग तीन लाख रुपए. ये एक बहुत बड़ी राशि है. फिर कुछ दिनों पहले मैंने ई-सिगरेट ट्राई की. उसके बाद मैंने वापस मुड़कर नहीं देखा. पिछले डेढ़ साल में मेरे केवल 28,000 रुपए के लगभग खर्च हुए हैं. ई-सिगरेट अपनाने के बाद मैं बेहतर महसूस करता हूं. मैं बेहतर तरीके से सांस ले पाता हूं. भोजन ज़्यादा स्वादिष्ट लगता है. मैं कहीं भी ई-सिगरेट पी सकता हूं, फिर चाहे वो विमान के अंदर हो या किसी रेस्तरां में. मेरे पास से, मेरे कपड़ों में से या मेरे घर के अंदर अब धुएं की दुर्गन्ध नहीं आती है. आम सहमति यह है कि ई-सिगरेट, सिगरेट से लगभग 95% कम हानिकारक है. लेकिन इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता. ये एक सिगरेट पीने वाले को तंबाकू कंपनियों के 600 घातक रसायनों से बचाती है. मुझे ई-सिगरेट के रूप में एक प्यारा दोस्त मिला. अब पीछे नहीं मुड़ा जा सकता. काश कि मैंने इसे कई साल पहले ही शुरू कर दिया होता. लेकिन इससे भी बड़ा काश तो इस बात से जुड़ा है कि मैंने 14 साल की उम्र में धूम्रपान करना ही शुरू नहीं किया होता."

ये कहना है एक बहुत ज़्यादा सिगरेट पीने वाले बंदे माइकल मैक-कॉय का, जिसने कुछ महीनों पहले ही ई-सिगरेट पीना शुरू किया है. E Cig - 8 ये बातें उन्होंने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में शेयर की थी. कई और ‘फर्स्ट हैंड यूजर्स’ की राय भी अलहदा नहीं थी. एक का कहना था कि उनके फेफड़ों के एक्स-रे में डॉक्टर तक नहीं जान पाए कि वो ई-सिगरेट पी रहे हैं. ज़्यादातर की राय थी कि अव्वल तो सिगरेट पीनी ही नहीं चाहिए लेकिन अगर सिगरेट और ई-सिगरेट में से एक को चुनना हो तो ई-सिगरेट बेहतर विकल्प है. एक कमेंट बड़ा रोचक था. उसके अनुसार सिगरेट की लॉबी बहुत स्ट्रॉन्ग है और वेपर-स्मोकिंग को बैन करना या उसपर कई अन्य प्रतिबंध लगाना, लोगों का काम है. तो ऑनलाइन तैरते ऐसे कमेंट्स से यही निष्कर्ष निकलता है कि -
# सिगरेट पीने वाले वैपर (ई सिगरेट) में स्विच कर रहे हैं. # ई सिगरेट नॉर्मल सिगरेट से कम हानिकारक है. # कई देशों में इसे बैन किया जा रहा है. # बैन करने के पीछे सिगरेट वालों की लॉबी काम कर रही है.
वैसे तो किसी भी सर्वे में यूज़र की राय सबसे महत्वपूर्ण होती है लेकिन अकेली वो राय किसी प्रोडक्ट के लिए सौ फीसदी ‘सच’ मान लेना एक बड़ी भूल होगी. इसलिए हमने कुछ विशेषज्ञों से बात की, कई ऑनलाइन पोर्टल खंगाले और साथ ही कुछ वाइट पेपर पढ़े और जो कुछ भी हमें मिला उसका निष्कर्ष हम आपके पास लेकर आए हैं. हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के तंबाकू के उपयोग को प्रोत्साहित करना नहीं है, और न ही किसी ब्रांड या प्रोडक्ट को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रमोट करना. E Cig - 2 उद्देश्य केवल ‘महत्तम सच’ को जानना है और उसे जस का तस दी लल्लनटॉप के पाठकों को परोसना है.

# आज क्यूं ई-सिगरेट की बात हो रही है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 18 सितंबर को ऐलान किया है कि केंद्रीय कैबिनेट ने ई-सिगरेट पर बैन लगाने  का फैसला किया है. इसका मतलब है कि ई-सिगरेट के निर्माण, इम्पोर्ट/एक्सपोर्ट, उसकी बिक्री और विज्ञापन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा.

# ई-सिगरेट पर बैन क्यूं लगाया गया?

इसलिए क्यूंकि डीसीए के द्वारा एक ख़ास तरह का निकोटीन ही स्मोकिंग के लिए स्वीकार्य है. डीसीए मने – ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940. और ई-सिगरेट्स में यूज़ होने वाला निकोटिन इस स्वीकार्य वाली कैटेगरी से बाहर है. यानी ई-सिगरेट्स से जुड़े खतरे को देखते हुए इसे बैन किया गया है. तो खतरे और फायदे (यदि कोई हों तो) के बारे में इस खबर में हम आगे बात करेंगे.  उससे पहले ई-सिगरेट को जान लेते हैं.

# दी एंडस –

इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (एंडस) बैटरी संचालित उपकरण होते हैं, जो शरीर में निकोटिन पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग करते हैं. इसमें सबसे ज़्यादा यूज़ होने वाला उपकरण ई-सिगरेट है. ई-सिगरेट मने इलेक्ट्रॉनिक-सिगरेट. इसकी प्रणाली बहुत आसान है. इसे बाहर से सिगरेट के आकर का ही बनाया जाता है. जैसे इसके अंत में एक एलईडी बल्ब लगाया जाता है, जिसकी ज़रूरत नहीं है, लेकिन कश लगाने पर जब ये जलता है तो लगता है कि सिगरेट का तंबाकू जल रहा है. E Cig - 7 अंदर लिक्विड निकोटिन की कार्टेज़ होती है, जिसके खत्म हो जाने पर आप नई कार्टेज़ खरीद सकते हैं. कुछ यूज़-एंड-थ्रो ई-सिगरेट्स में कार्टेज़ बदलने का कोई विकल्प नहीं होता. इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का आविष्कार चीनी फार्मासिस्ट हॉन लिक ने किया था. उसने 2003 में डिवाइस को पेटेंट करवा लिए था और 2004 में इसे बाजार में पेश किया था. इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में निकोटीन लिक्विड जलता नहीं इसलिए इससे धुआं नहीं बनता. वो गर्म होकर भाप बनता है. इसलिए इसे पीने वाला भाप खींचता है न कि धुआं. एक ई-सिगरेट में तीन मुख्य भाग होते हैं -
# रिचार्जेबल लिथियम बैटरी # निकोटीन कार्टेज़ # वाष्पीकरण चैम्बर (जिसमें एक छोटा सा हीटर होता है, जो बैटरी से एनर्जी पाकर जलता है और निकोटिन को भाप बनाता है. धुआं नहीं भाप)
E Cig - 4 मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फ़िक्र को ‘भाप’ में उड़ाता चला गया. इनमें और सामान्य सिगरेट्स में सबसे मुख्य अंतर ये होता है कि ई-सिगरेट्स में तंबाकू नहीं होता. यानी लॉजिक ये है कि ई-सिगरेट्स से आपको निकोटिन से होने वाले तो सारे नुकसान होंगे लेकिन तंबाकू से होने वाले नुकसान नहीं होंगे. एंडस और ई-सिगरेट को अक्सर धूम्रपान छोड़ने या तम्बाकू के स्वस्थ विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है. बेशक इनमें सिगरेट में पाए जाने वाले ‘तार’ जैसे जहरीले बाई-प्रोडक्ट्स नहीं होते लेकिन इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं हैं कि ई-सिगरेट धूम्रपान छुड़वाने में लाभदायक है. तो केवल तर्क के आधार पर दोनों में से ई-सिगरेट्स कम हानिकारक लगती है. है न?

# नहीं!

जिस तरह ‘मेरियुआना’ को हानिरहित बताने वाले लोग भी ये ज़रूर मानते हैं कि ये बाकी ड्रग्स का एंट्री गेट होता है, वैसा ही ई-सिगरेट्स के मामले में भी है. यानी यदि एक वक्त को ई-सिगरेट्स और नॉर्मल सिगरेट की तुलना करने पर ई-सिगरेट्स को कम हानिकारक मान भी लिया जाए तब भी हमको ये बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए कि ऐसा केवल उनके केस में है जो पहले से ही सिगरेट पीते आए हैं. जो नहीं पीते उन्हें ई-सिगरेट ‘कूल’ लगती है. और ऐसा विभिन्न सर्वे से पता चलता है कि सिगरेट से ई-सिगरेट में स्विच करने वाले कम हैं और ई-सिगरेट से अपने धूम्रपान का सफ़र शुरू करने वाले लोग अधिक. ई-सिगरेट के हज़ारों फ्लेवर मार्केट में उपलब्ध हैं, जो सिगरेट छुड़ाने के लिए नहीं उसे शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं. E Cig - 5 तंबाकू नियंत्रण के मामले में पूरी दुनिया में काम हो रहे हैं, लेकिन ई-सिगरेट की बढ़ती लोकप्रियता वर्षों की कड़ी मेहनत को वही कर रही है जिसे मुहावरे में 'गुड़ का गोबर करना' कहते हैं. जहां युवाओं के बीच सिगरेट पीने की आदत में कमी आई है वहीं दूसरी तरफ आज, बीते कल से ज़्यादा युवा ई-सिगरेट पी रहे हैं. सिगरेट बनाने वाली कंपनियां कई तरह की सरकारी-ग़ैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं के अधीन आती हैं और उन्हें, उनके लिए बनाए गए कड़े नियमों का पालन करना भी ज़रूरी होता है, लेकिन ई-सिगरेट को कंट्रोल करने के विषय में संबंधित संस्थान निश्चित नहीं हैं. इसलिए इनकी मनमानी चल सकती है और खतरनाक और ग़ैरकानूनी पदार्थों का उपयोग इनके निर्माण के दौरान संभव है.

ई-सिगरेट में कैंसर पैदा करने वाले एजेंट्स भी

अब थोड़ी और स्टडी करें तो हमें पता चलता है कि ई-सिगरेट में केवल निकोटिन नहीं होता है. इसमें कैंसर पैदा करने वाले एजेंट भी होते हैं, जैसे फॉर्मेल्डिहाइड. और निकोटीन अकेले भी कम नुकसान नहीं करती. जो दिल, जिगर, गुर्दे कमोबेश सबके लिए ही नुकसानदायक है. इस सब के चलते सिंगापुर, सेशल्स और ब्राज़ील जैसे कई देशों में ऑलरेडी ई-सिगरेट बैन है. कनाडा और यूएस जैसे कुछ विकसित देश भी या तो इस पर कड़ी नज़र रखते हैं या इसपर ढेरों कानूनी नियम लादे रखते हैं. विकासशील दुनिया के कई देशों में ई-सिगरेट को नियंत्रित करने के लिए कोई नियम या उपाय नहीं हैं. डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल ई-सिगरेट के रेग्यूलेशन पर एक रिपोर्ट जारी की थी. रिपोर्ट में, डब्ल्यूएचओ ने ई-सिगरेटों के विभिन्न फ्लेवर्स को बैन करने की मांग की गई थी. यानी WHO भी यही मानती है कि ये ‘फ्लेवर्स’ युवाओं को ई-सिगरेट की ओर चुंबक की तरह आकर्षित करेंगे. E Cig - 6 डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से ई-सिगरेट पर या तो बैन लगाने या इसे भी ऐसे किसी कानून में लाने की अनुशंसा की है जिनके दायरे में पहले से ही अन्य तंबाकू उत्पाद आते हैं.

# मोटिवेशन -

और जब हम ई-सिगरेट के नुकसानों को जान चुके हैं तो अब ये भी जान लेते हैं कि लोग इसे यूज़ करने के लिए क्यूं प्रेरित होते हैं –
# ये कई फ्लेवर्स में आता है. # ये सिगरेट से सस्ता होता है. # कुछ लोगों का मानना है कि ये सिगरेट से कम नुकसानदायक होता है. # कई जगहों पर, जहां सिगरेट नहीं पी सकते वहां पर ई-सिगरेट पर कोई प्रतिबंध नहीं है. # इनमें सिगरेट की जैसी दुर्गंध नहीं होती. # कुछ लोग इसका उपयोग इसलिए भी करते हैं क्यूंकि उन्हें लगता है कि इससे सिगरेट छूट जाएगी.
अब पूछे गए सभी सवालों में एक सवाल और बच जाता है, कि क्या सिगरेट कंपनिया चाहती हैं कि ई-सिगरेट बैन हो जाए और यूं उनका कोई कंपटीशन न रहे? और इसलिए वो लॉबिंग करके सरकार पर दबाव डाल रही हैं? E Cig - 9 इसका उत्तर ये है कि नॉर्मल-सिगरेट बनाने वाली कंपनियां भी ई-सिगरेट बनाती हैं, और अगर ई-सिगरेट की सेल बढ़ेगी तो इनके पास जिस तरह का लॉजिस्टिक है सबसे बड़ा नुकसान तो ई-सिगरेट बैन का इनपर ही पड़ेगा.
वीडियो- अब पक्का पता चल जाएगा कि इसरो के चंद्रयान का क्या हुआ?