जून की उस उमस भरी दोपहर में राजधानी एकदम शांत थी. आसमान साफ़ था. लेकिन कल्पना के लिए आप सीपिया रंग जोड़ सकते हैं. काहे की ये एक गरीब देश था. और हॉलीवुड फिल्मों की मानें, तो ऐसे देशों का रंग सीपिया ही होता है. बहरहाल देश में अभी-अभी चुनाव हुए थे. जिनमें सत्ता में वापसी तो पुराने राष्ट्रपति की ही हुई, लेकिन पुराना होकर भी वो शख्स एकदम नया हो चुका था. उस रोज़ जब जीत का जश्न मनाने के लिए वो सड़कों पर रैली के लिए निकला, उसका पहनावा एकदम बदल चुका था. कोट पेंट के ऊपर उसने लम्बा काला लबादा ओढ़ रखा था. सर पर एक काली हैट और साथ ही चेहरे पर एक काला चश्मा लगाया हुआ था. उसकी आवाज भी आज कुछ अलग थी. जैसे ज़ोर लगाकर कोई नाक से बोलने की कोशिश कर रहा हो. इस वेशभूषा और आवाज का सिर्फ एक ही मतलब था. मौत के देवता की वापसी. कौन था ये मौत का देवता? (Francois Duvalier)
तानाशाह जो अमेरिकी राष्ट्रपति की गुड़िया बनाकर उसमें सुइयां चुभोता था!
पापा डॉक की कहानी जो खुद को तंत्र मंत्र का मालिक और 'मौत का देवता' बुलाता था.
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चलिए जानते हैं उस खूंखार तानाशाह की कहानी, जिसने अपने ही देश के 60 हजार लोगों की हत्या करवा डाली थी. जो अपने दुश्मनों को तेज़ाब के तालाब में डाल देता था. जो कहता था कि अमेरिका के राष्ट्रपति जैक कैनेडी की हत्या उसने करवाई है. कैसे? तंत्र मन्त्र से. वो कहता था कि उसके तंत्र मन्त्र में इतना दम है कि बन्दूक की गोली भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती था.
दानव जो बच्चों को खा जाता हैजिस दोपहर का जिक्र हमने किया था. वो साल 1961 में गुज़री थी. उस साल पापा डॉक (Papa Doc) ने दुबारा हैती (Haiti) की सत्ता में वापसी की. 13 लाख 20 हजार, 748 वोटों से जीत कर. चुनाव तो हुआ था. बस बात इतनी थी कि विपक्ष में कोई खड़ा नहीं हो सकता था. बैलेट पेपर पर एक ही नाम था, पापा डॉक का. और लोगों को बस हां या ना में वोट डालने की इजाज़त थी. 99.99 % लोगों ने हां में वोट किया.

आपके मन में सवाल उठ सकता है कि जितना हम बता रहे, अगर पापा डॉक इतना ही क्रूर तानाशाह था, तो आखिर सब लोगों ने उसके पक्ष में वोट क्यों दिया. इस सवाल का जवाब था, टोंटोन मकूटे. ये एक मिथकीय दानव का नाम था, जो बच्चों को बोरी में बंद कर ले जाता है और बाद में उन्हें खा जाता है. हैती के लोगों ने ये नाम दे रखा था राष्ट्रपति के सुरक्षा दस्ते को. इन्हें ये नाम क्यों मिला था. एक घटना से समझिए,
एक बार पापा डॉक के एक विरोधी ने उसके बेटे को अगवा करने की कोशिश की. किडनैपिंग सफल न हुई लेकिन पापा डॉक का गुस्सा सातवें आसमान तक पहुंच गया. उसने टोंटोन मकूटे के हेड को बुलावा भेजा. इसका नाम लकनर कैमब्रोन था. लेकिन हैती के लोग उसे ‘कैरेबियन का वैम्पायर’ कहकर बुलाते थे. खाली समय में वो हैती के लोगों का खून निकालकर अमेरिकियों को बेचा करता था. और जब खून की बिक्री नहीं होती थी, उसे खुलेआम बहाया जाता था. उस रोज़ भी लकनर कैमब्रोन ने कुछ ऐसा ही किया. हैती की राजधानी है पोर्ट औ प्रिंस. यहां एक पुराने फौजी का घर था. लकनर कैमब्रोन के लोगों ने उसके माता पिता को गोलियों से भून डाला और घर में आग लगा दी. तब घर के अंदर एक सात महीने का बच्चा था. ये शुरुआत थी.
पापा डॉक की खून की प्यास तब तक शांत न हुई जब तक गुनाहगार का सर काट कर, चावल से भरी तश्तरी में सजा कर पापा डॉक के आगे पेश न किया गया. मौत का ये नंगा नाच जब ख़त्म हुआ, पूरे पोर्ट औ प्रिंस में लाशें ही लाशें बिखरी पड़ी थीं. लोगों को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस राष्ट्रपति को कभी उन्होंने भगवान समझा था, जिसे प्यार से पापा कहकर बुलाते थे, वो मौत का फरिश्ता बन गया था. इस सब की शुरुआत हुई थी एक देवता की कहानी से. बैरन समेडी से. ये कौन था?
वूडू के बारे में सुना है आपने? अक्सर काले जादू, तंत्र मन्त्र के लिए इस शब्द का इस्तेमाल होता है. गूगल करेंगे तो काली गुड़िया पर सुईंया चुभाई हुई तस्वीरें दिखाई देंगी. असल में ये 400 साल पुराना धर्म है. जिसकी शुरुआत तब हुई थी, जब स्पेन और फ़्रांस जैसे देशों ने अफ्रीका और कैरेबियन लोगों को गुलाम बनाकर उनका धर्म परिवर्तन करना शुरू किया था. इसके जवाब में विभिन्न लोक प्रथाओं को मिलाकर एक नया धर्म बना. वूडू. वूडू का अर्थ होता है आत्मा. इसके फॉलो करने वाले लोगों की मान्यता है कि अलग-अलग आत्माएं होती हैं, जो इस दुनिया को चलाती हैं. कुछ अच्छी कुछ बुरी. इन्हीं आत्माओं में से एक है बैरन समेडी. मौत का देवता. जो काले कपड़े पहनता है, काली हैट लगाता है, काला चश्मा पहनता है, तीखी आवाज में बोलता है. साथ ही मादक पदार्थों का सेवन भी करता है. रम और सिगार पीने वाला ये देवता 1960 के दशक में अचानक जीवित शरीर के रूप में प्रकट हो गया. ऐसा दावा था पापा डॉक का. 1957 से 1971 तक पापा डॉक हैती का राष्ट्रपति रहा.

ऊपर नक़्शे पर नजर डालिए. बड़ा सा अमेरिका दिख रहा होगा. नीचे पूर्व की तरफ कैरेबियन सागर है. जिसके कई द्वीपों में से एक है हैती. ये देश एक ज़माने में फ्रांस का ग़ुलाम था. वो यहां की ब्लैक आबादी से गन्ने के खेतों में ग़ुलामी खटवाते और मुनाफ़ा कमाते. अपनी दुर्दशा से बौखलाए ब्लैक्स ने बग़ावत कर दी. उन्होंने नेपोलियन की भेजी सेना को हरा दिया. इस जीत के बाद 1804 में हैती आज़ाद हो गया. और बना दुनिया का पहला ब्लैक रिपब्लिक. मगर ये आज़ादी हैती को बहुत महंगी पड़ी. फ्रांस ने ग़ुलाम हाथ से निकलने के कारण हुए अपने नुकसान का हर्जाना मांगा. कितना हर्जाना? आज की वैल्यू में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये. ये रकम कहलाई इंडिपेंडेंस डेट. यानी, आज़ादी का कर्ज़ा. हैती गरीब था. इतना गरीब कि 127 बरस तक कर्ज़ा भरता रहा, तब भी पूरा नहीं दे पाया.
इन हालात में साल 14 अप्रैल 1907 को हैती की राजधानी, पोर्ट औ प्रिंस में डुवॉल डुवेलियर के यहां एक बेटे का जन्म हुआ. नाम रखा गया फ्रांस्वा. डुवॉल डुवेलियर स्कूल टीचर थे, वहीं फ्रांस्वा की मां बेकरी चलाती थी. फ्रांस्वा पढ़ाई में अच्छा था, सो स्कूल के बाद उसने मेडिकल में दाखिला ले लिया. यहां से निकला तब तक उसके नाम के आगे डॉक्टर जुड़ चुका था. हैती में उन दिनों एक बीमारी फ़ैल रही थी. जिसमें शरीर में फोड़े फुंसी हो जाते थे. डॉक्टर फ्रांस्वा ने पूरे हैती में घूम-घूम कर लोगों का इलाज किया. लोग कम पढ़े लिखे थे, सो उन्हें डॉक्टर की दवा चमत्कार लगती थी. जल्द ही लोग उसके मुरीद हो गए. खासकर वो, जो वूडू परंपराओं में विश्वास करते थे. प्यार से लोग उसे पापा डॉक बुलाने लगे. और जल्द ही इस शोहरत के बल पर उसने राजनीति में एंट्री ले ली और सरकार में मंत्री बन गया. हालांकि जल्द ही देश में तख्तापलट हो गया और पापा डॉक को जान बचाने के लिए अंडर ग्राउंड होना पड़ा. 7 साल अंडरग्राउंड रहने के बाद 1956 में उसकी वापसी हुई. उस साल हैती में चुनाव होने वाले थे. पापा डॉक ने भी अपनी उम्मीदवारी पेश कर दी.
चुनाव में जीता और हमेशा के लिए राष्ट्रपति बन गयापापा डॉक, छोटे कद का नरम स्वभाव का आदमी था. उसके कंधे झुके रहते लेकिन वो हमेशा टिप टॉप बना रहता था. धीरे धीरे बोलना, हल्की सी मुस्कराहट, इन सब कारणों से सबको लगता था कि वो उससे आसानी से अपनी बात मनवा लेंगे. कोई उसे खतरा नहीं मान रहा था और चुनावों में उसे इन सब बातों का भी फायदा मिला. साथ ही उसने वो सब वादे भी किए जो कोई भी तानशाह सत्ता में आने से पहले करता है. उसने कहना शुरू किया कि 10 % जनसंख्या वाले मुलाटों ने सत्ता और शक्ति पर कब्ज़ा कर रखा है. मुलाटे यानी वो लोग, जिनके माता या पिता में से कोई एक गोरा हो. यानी मिक्स्ड रेस की संतानें. पापा डॉक ने इन लोगों को हैती का असली दुश्मन करार दिया और वादा किया कि सत्ता में आते ही वो इन लोगों को देश से निकाल देगा. हालांकि कमाल की बात ये थी कि उसने खुद एक मिक्स्ड रेस की महिला से शादी की थी. और अपने बच्चों को भी यही नसीहत देता था.

बहरहाल पापा डॉक की अच्छी छवि और चुनावी वादों की बदौलत उसकी जीत हुई. राष्ट्रपति बनते ही उसने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया. पहली गाज़ गिरी मिलिट्री के ऊपर, जिनसे उसे तख्तापलट का खतरा था. सेना के तमाम सीनियर जनरलों को ठिकाने लगाकर उसने फौज की गिनती 5 हज़ार तक सीमित कर दी. उनके बदले अपनी एक अलग आर्मी खड़ी की. गुंडों की इसी फौज को हैती के लोगों ने टोंटोन मकूटे का नाम दिया. इनकी मदद से पापा डॉक ने अपने तमाम राजनैतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया. पत्रकार गायब कर दिए गए और जो जो डॉक की मुखालफत कर सकता था, उसे देश निकाला दे दिया गया.
इस बीच देश गरीब से गरीब होता जा रहा था. लेकिन डॉक की मौज थी. अमेरिका से हैती को फंड मिलता था. वो सारा राष्ट्रपति के ऐश के लिए खर्च हो जाता था. हैती में हो रही घटनाओं से अमेरिका ने भी आंखें मूंदे रखी. काहे की पापा डॉक को कम्युनिस्टों से नफरत थी और अमेरिका को बस इसी बात से मतलब था. उनके पास एक बहाना ये भी था कि पापा डॉक को देश की जनता ने चुना है. लेकिन फिर जल्द ही पापा डॉक ने लोकतंत्र का दिखावा भी बंद कर दिया.
'अमेरिकी राष्ट्रपति को मैंने मारा है'1961 में उसने चुनाव कराए लेकिन सारी पार्टियों को बैन कर दिया. अपने गुंडों की मदद से लोगों को डरा धमका के सारे वोट अपने नाम से डलवाए. 1964 में उसने देश का नया संविधान लिखा और खुद को हमेशा के लिए राष्ट्रपति घोषित कर दिया. इसी बीच उसने खुद को बैरन समेडी का अवतार कहना भी शुरू कर दिया. वो खुद को तांत्रिक शक्तियों का मालिक बताने लगा. ये सारी ख़बरें इंटरनेशनल बिरादरी में भी फ़ैली. पता चला कि पापा डॉक अमेरिकी फंड से अपने नाम का एक शहर बना रहा है. इसके लिए उसने रोजमर्रा की चीजों पर एक्स्ट्रा टैक्स लगाए और लोगों पर जबरदस्ती सरकारी बांड खरीदने का जोर बनाया. ये सब देखकर अमेरिका को सख्त कदम उठाना पड़ा. और 1961 में उन्होंने हैती को दी जा रही मदद में 90 % तक कटौती कर दी. हालांकि पापा डॉक को इससे भी फर्क न पड़ा.

उसने अमेरिका को नस्लभेदी कहना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई, जब उसने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जैक कैनेडी की हत्या उसने करवाई है. तंत्र मन्त्र से. ऐसी कहानियां भी चलती हैं कि केनेडी की हत्या की सुबह उसने उनकी शक्ल की एक गुड़िया बनाई और उसमें 2222 बार सुई से छेद किया. 2222 बार इसलिए क्योंकि 22 को डॉक अपना लकी नंबर मानता था.
पापा डॉक ने 13 साल तक हैती पर शासन किया. इस दौरान लोगों को भयंकर गरीबी का सामना करना पड़ा. 60 हजार के लगभग लोग मारे गए और इससे भी बड़ी संख्या उनकी थी जिन्हें देश छोड़ना पड़ा. डॉक डायबिटीज का रोगी था. 1959 में जब उसे पहली बार दिल का दौरा पड़ा, अमेरिका से डॉक्टर उसके इलाज के लिए भेजे गए थे. हालांकि दूसरी बार उसकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी. 1971 में दिल की बीमारी के चलते उसने दम तोड़ दिया. तारीख थी 21 अप्रैल. आपको लग रहा होगा, चलो देर से ही सही हैती के लोगों को पापा डॉक के जुल्मों से निजात मिली. गलत. इसके बाद कहानी शुरू होती है बेबी डॉक के शासन की. जो क्रूरता में अपने पिता से भी दो कदम आगे था. लेकिन ये कहानी कभी और.
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