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काजोल की परनानी का वो भजन, जो सावन भर हमारे मन में बजता है

इनके पति ने एक बार अंग्रेज़ कलेक्टर को तमाचा मार दिया था.

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मेरी मंझली बुआ. जिनके पास रहकर हम भाई पढ़े. कानपुर में. कृष्ण की आराधना करती थीं वह. इस दौरान एक भजन गातीं. छुटपन में सुने उन भजनों में कुछ की पंक्तियां अब तक अटकी हैं. ऐसा ही एक भजन था.
तेरे पूजन को भगवान. बना मन मंदिर आलीशन.
अभी कुछ पढ़ रहा था तो पता चला. इस भजन को रतन बाई ने लिखा और गाया. रतन बाई की बेटी थीं शोभना समर्थ. शोभना समर्थ की बेटी थीं नूतन और तनूजा. और उनके बच्चों के नाम से आप बखूबी वाकिफ होंगे. मोहनीश बहल और काजोल.
रतन बाई, कारवां ए हयात 1935. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स)
रतन बाई, कारवां ए हयात में 1935. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स)

रतन बाई ने 1936 में आई फिल्म 'भारत की बेटी' के लिए ये भजन लिखा और गाया. इसमें संगीत है अनिल बिश्वास का.
एक बात और. रतन बाई ने खुद भी एक मराठी फिल्म में बतौर एक्ट्रेस काम किया. उनके पति अमेरिका से इकॉनमिक्स में पीएचडी थे. लौटे तो ब्रिटिश इंडिया में अपना बैंक शुरू किया. अंग्रेजों के इस मुल्क में तौर तरीकों से चिढ़ते थे. बताते हैं कि एक बार तो कलेक्टर को तमाचा रसीद कर दिया क्योंकि वह बैंक के कैश की सुरक्षा के लिए बंदूक का लाइसेंस नहीं दे रहा था. बाद में अंग्रेजों ने उन्हें तकनीकी मामलों में फंसा राजा से रंक बना दिया. दो साल की कैद हुई और जब छूटे तो कुछ ही दिनों बाद गुज़र गए.
इन हालात में रतन बाई ने भजन लिखना, गाना और बेटी को पालना शुरू किया.



वीडियो देखें : फिल्म रिव्यू 'धड़क'