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डीजीपी हेमंत कुमार की हत्या करने वाले यासिर की डायरी में क्या मिला?

जेल विभाग के डीजी एचके लोहिया का गला घोंटा गया, फिर कांच से काट दिया गया!

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(बाएं-दाएं) कारावास निदेशक हेमंत के लोहिया और घर का नौकर यासिर. (तस्वीरें- आजतक/इंडिया टुडे)

देश के गृहमंत्री के जम्मू कश्मीर दौरे से कुछ घंटे पहले ही अगर सूबे में महानिदेशक रैंक के पुलिस अधिकारी की हत्या हो जाए, तो पूरे देश का उस ओर ध्यान जाना लाज़मी है. आज सुबह सुबह खबर आई कि जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी प्रिज़न्स हेमंत कुमार लोहिया की हत्या हो गई है. और हत्यारा फरार है.

जम्मू कश्मीर में उग्रवाद और आतंकवाद के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसिया सतत अलर्ट पर रहती हैं. फिर जब सूबे में केंद्रीय गृहमंत्री के स्तर का VVIP मूवमेंट  होना होता है, हफ्तों पहले से तैयारी शुरू हो जाती हैं. ऐसे माहौल में 57 साल के हेमंत कुमार लोहिया की हत्या ने एक वक्त के लिए पुलिस प्रशासन को भी हैरान कर दिया था. हेमंत कुमार 1992 बैच के IPS अफसर थे. इसी साल अगस्त में उन्हें जम्मू कश्मीर में महानिदेशक (कारागार) बनाया गया था. उनके अपने घर में मरम्मत चल रही थी. इसीलिए वो सपरिवार अपने पारिवारिक दोस्त दीपक खजूरिया के घर में रुके हुए थे, जो जम्मू शहर के उदयवाला इलाके में है. लोहिया परिवार के साथ उनके घर पर काम करने वाला यासिर अहमद भी खजूरिया के यहां आया था.

3 अक्टूबर की रात दोनों परिवार और यासिर घर में ही थे. उसके बाद क्या हुआ, इसके बारे में जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग़ सिंह बताते हैं, 

"हेमंत कुमार के पैर में चोट थी. रात में खाना खाने के बाद वे अपने कमरे में गए. उस समय यासिर उनके पर पर दवाई लगाने के लिए आया, उसने दरवाजा बंद कर हेमंत कुमार पर किसी धारदार हथियार से हमला किया."

यासिर ने पहले हेमंत का दम घोंटने की कोशिश की. कांच की बोतल से उनका का गला रेता. और फिर शव को आग लगाने की भी कोशिश की. लेकिन जब वो ये सब नहीं कर पाया, तो घर से निकल भागा. जब घर की सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई तो यासिर घटना के बाद घर से भागता हुआ नज़र आ गया. पुलिस ने तुरंत छापेमारी शुरू की. पुलिस ये तो जानती थी कि हत्या यासिर ने की. बड़ा सवाल था - आखिर क्यों?

बीते दिनों जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों का पैटर्न बदला है. हमलों के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया गया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा. इसीलिए ये लोग कभी पुलिस के रडार पर नहीं रहे और टार्गेटेड किलिंग्स कर पाए. जिनमें पुलिस अधिकारियों, पुलिस के जवानों, घाटी के नामचीन कश्मीरी हिंदुओं और देश के दूसरे हिस्सों से कश्मीर काम करने आए लोगों की जान ली गई. फिर जम्मू कश्मीर में DG प्रिज़न्स पर एक से एक खूंखार कैदियों की ज़िम्मेदारी होती है. और पूर्व में कैदियों को छुड़ाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए हैं. तो इन सारी दिशाओं में कयास लगने लगे. इतने में सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल होने लगा. इसके मुताबिक People Against Fascist Forces (PAFF)नाम के एक संगठन ने हेमंत कुमार की हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी. मैसेज में लिखा था,

''स्पेशल सेल ने जम्मू के उदयवाला इलाके में एक इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इसमें एक हाई वैल्यू टार्गेट - डीजी प्रिज़न्स, एचके लोहिया को एलिमिनेट किया गया. सख्त सुरक्षा के बीच जम्मू कश्मीर की यात्रा पर आ रहे गृहमंत्री के लिए ये हमारा तोहफा है. हम कहीं भी, कभी भी सटीक हमला कर सकते हैं.''

PAFF को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा बताया जाता है. हाल के दिनों में जम्मू कश्मीर में हुए कई आतंकी हमलों की ज़िम्मेदारी PAFF ने ही ली है. इनमें वो हमले भी शामिल हैं, जिनमें जम्मू कश्मीर में बाहर से आए लोगों की टार्गेटेड किलिंग्स हुईं. लेकिन हेमंत कुमार की हत्या के बाद जारी हुए PAFF के कथित बयान की सत्यता स्थापित नहीं हो पाई. अभी ये साफ नहीं है कि किसी ने मौके का फायदा उठाने के लिए PAFF के नाम से ये बयान चला दिया. या फिर ये बयान खुद PAFF की तरफ से किया गया एक पीआर स्टंट था.

इस तरह की चर्चा को देखते हुए प्रशासन ने कुछ देर के लिए जम्मू और राजौरी ज़िले में इंटरनेट सेवाओं को रोक दिया. लेकिन जैसे जैसे पुलिस को जानकारियां मिलती गईं, उसका ये शक दूर होता रहा कि हेमंत कुमार की हत्या का संबंध घाटी में चल रहे आतंकवाद से नहीं था. जम्मू कश्मीर पुलिस के एडीजीपी मुकेश सिंह इसके बारे में बताते हैं, 

"हथियार को जब्त कर लिया है. फिलहाल इस घटना में कोई आतंकी ऐंगल नजर नहीं आ रहा है."

मुकेस सिंह ने ये बयान दिया और कुछ ही घंटों के भीतर आज पुलिस ने यासिर को पकड़ लिया. अब तक उसके बारे में इतनी ही जानकारी है कि वो सूबे के ही रामबन में पड़ने वाले हल्ला धंदरथ गांव से है. उम्र है 23 साल और वो तकरीबन 6 महीने से लोहिया परिवार के यहां काम कर रहा था. उसने हेमंत की हत्या क्यों की, ये एक विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकता है. लेकिन जवाबों का एक हिस्सा उस डायरी में दर्ज बताया जाता है जो यासिर के पास से मिली. दोपहर बाद तक इस डायरी के अंश मीडिया में आने लगे. डायरी में कई हिंदी सैड सॉन्ग्स का ज़िक्र है. दिल टूटने, जीवन और मृत्यु जैसे विषयों पर नोट्स हैं. जैसे -

"आई हेट माय लाइफ. ज़िंदगी तो बस तकलीफ देती है, सुकून तो अब मौत ही देती है. आई वॉन्ट टू रीस्टार्ट माय लाइफ. माने मैं अपनी ज़िदगी में एक नई शुरुआत चाहता हूं.''

माना जा रहा है कि ये सब यासिर ने खुद लिखा है. डायरी में ऐसे कई नोट्स हैं, जिनसे उसके अंदर चल रही उथल-पुथल के बारे में मालूम चलता है. जैसे कि डायरी के एक पन्ने पर लिखा हुआ है,  

"My life -- 1% Happy 10% Love 0% Tension 90% Sad 99% Fake smile 100%"

हेमंत कुमार की हत्या के बाद जब प्रेस ने जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह से यासिर के बारे में सवाल किए थे, तब उन्होंने भी उसकी दिमागी हालत की तरफ इशारा किया था. दिलबाग़ सिंह ने बताया, 

"हमें एक डायरी मिली है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है है कि यासिर डिप्रेशन का शिकार है और उसने खुद की जान लेने की बात भी की है."

यासिर ने हेमंत की हत्या वास्तव में क्यों की, ये सामने आने में अभी वक्त लग सकता है. खासकर यासिर की डायरी सामने आने के बाद. उसकी मेडिकल जांच के बाद स्पष्ट होगा कि क्या वो वाकई डिप्रेशन या किसी मेंटल डिसॉर्डर का शिकार था. और क्या इस बिंदु की हेमंत की हत्या में कोई भूमिका थी.

हम इस खबर का अंत एक नोट के साथ करना चाहते हैं. अगर आप या आपके किसी परिचित को खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो आप 9152-98-7821 पर फोन करें. यहां आपको उचित सहायता मिलेगी. मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस करने पर डॉक्टर के पास जाना उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक बीमारी का इलाज. खुद को नुकसान पहुंचाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है.

चलते चलते आपको गृहमंत्री के दौरे के बारे में भी बताते चलें. अमित शाह तीन दिनों के लिए जम्मू कश्मीर में हैं. आज उन्होंने राजौरी में एक सभा की, जहां उन्होंने गुज्जर, बक्करवाल और पहाड़ी समुदाय के लिए आरक्षण का वादा किया. दर्शक जानते ही हैं कि गुज्जर और बक्करवाल समुदाय को 1991 से ही ST दर्जे के तहत 10 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है. सो आरक्षण का ऐलान अगर नया है, तो वो पहाड़ी समुदाय का है. गृहमंत्री ने ये भी साफ किया कि पहाड़ी समुदाय को आरक्षण देते हुए गुज्जर और बक्करवाल समुदाय के हितों का ध्यान रखा जाएगा.

वीडियो: जम्मू-कश्मीर के डीजीपी हेमंत कुमार की हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी?