
भीड़ इतनी कि लोग एक के ऊपर एक चढ़कर ट्रेन के भीतर घुसते हैं.

ना दरवाजों की ज़रूरत. ना जान की चिंता. क्योंकि खतरों के खिलाड़ी बनना ज़रूरत है चॉइस नहीं.

किराया बढ़ा जा रहा है. लोग चक्का जाम किये पड़े हैं. परेशान वो लोग हैं जो वक़्त पर घर नहीं पहुंच पा रहे हैं.

किसी और की नाक कुरेदें. किसी और की कांख खुजाएं. क्योंकि 72 लोगों की जगह में 200-300 लोग फिट हो ही जाते हैं.



बोडो का प्रदर्शन. क्योंकि जिसका जब मन करे ट्रेन चलना रुकवा सकता है

नए ट्रैक बनेंगे. नई रेल लाइनें बिछेंगी. लेकिन पहले साफ़ पानी की व्यवस्था हो जाए.

औरतों की सुरक्षा के लिए अलग डिब्बे लग गए. लेकिन सबको उन डिब्बों में जगह भी मिलना मुश्किल है.

प्लेटफॉर्म पर भगदड़ मची. लोग कचर गए. दबकर मर गए. कुंभ मेले में आए थे. भगदड़ की वजह, ट्रेन ने प्लेटफॉर्म बदल लिया था.

रेलवे ट्रैक. शायद सबसे सुरक्षित जगह.
