वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) बुधवार को 12 बजे लोकसभा में पेश कर दिया गया. संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि बिल पर बहस के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. इसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है. हालांकि, बिल को लेकर मोदी सरकार और इंडिया गठबंधन के बीच टकराव के पूरे आसार हैं. एनडीए के सभी दलों ने वक्फ बोर्ड बिल को समर्थन देने का एलान किया है. वहीं, इंडिया गठबंधन इस बिल के खिलाफ है. एनडीए सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत है. ऐसे में उसे पूरा भरोसा है कि वह ये बिल पास करा लेगी.
वक्फ बोर्ड बिल लोकसभा में पेश, क्या है नए बिल में जिसका हो रहा है विरोध?
वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया. मोदी सरकार के पास इसे पास कराने के लिए बहुमत है. फिर भी इंडिया गठबंधन की ओर से विरोध के कारण सदन में टकराव के आसार हैं.

वक्फ संशोधन बिल पुराने वक्फ एक्ट-1995 का संशोधन है. पिछले साल अगस्त में भी इसे संसद में पेश किया गया था. विपक्ष और तमाम मुस्लिम संगठनों के तीखे विरोध के बाद विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था. हफ्ते भर तक चली चर्चा के बाद जेपीसी ने विधेयक में 14 संशोधनों को मंजूरी दे दी. वहीं, विपक्षी सांसदों की ओर प्रस्तावित 44 संशोधनों को जगदंबिका पाल के नेतृत्व वाले पैनल ने खारिज कर दिया. इसे लेकर भी विपक्ष सरकार से नाराज है. जेपीसी की मीटिंग में भी पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने गुस्से में कांच की बोतल तोड़ दिया था. बाद में उन्हें एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया.
क्या है विरोध की बातनए वक्फ बिल में 5 ऐसे प्रावधान हैं, जिन पर विवाद हो रहा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) समेत तमाम मुस्लिम संगठनों ने इन पर आपत्ति जताई है. बिल के एक प्रस्ताव में सेंट्रल वक्फ काउंसिल और राज्य वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव शामिल है. बिल में गैर-मुस्लिमों को इसके सदस्यों के रूप में शामिल करना जरूरी कर दिया गया है. कोई भी संपत्ति वक्फ की है या नहीं, इस पर राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का फैसला अंतिम होगा. 2024 वाले संशोधन बिल में यह अधिकार जिला कलेक्टर को दिया गया था.
नए बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल की संरचना में भी बदलाव का प्रस्ताव है. इसमें एक जिला न्यायाधीश और एक संयुक्त सचिव के पद पर राज्य सरकार का अधिकारी शामिल होगा. इसके अलावा,ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. चौथा विवादित प्रावधान ये है कि कानून लागू होने के 6 महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय पोर्टल पर रजिस्टर किया जाएगा. हालांकि, वक्फ ट्रिब्यूनल कुछ खास मामलों में समय सीमा बढ़ा सकता है. आखिरी विवाद की बात ये है कि पुराने वक्फ बिल में हर वो संपत्ति बोर्ड की मानी जाती थी, जिस पर मस्जिद बनी हो या जो किसी इस्लामिक कार्य में प्रयोग हो रही हो. नए कानून में इस खंड को हटा दिया गया है.
नया बिल Vs पुराना कानूनबार एंड बेंच के अनुसार, पुराने कानून के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम था. अन्य कोर्ट में इसके फैसलों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती थी. बोर्ड या पीड़ित पक्ष के आवेदन पर हाई कोर्ट अपने विवेक से मामलों पर विचार कर सकता था. नए बिल में उन प्रावधानों को हटा दिया गया है. इसके अनुसार अब वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है.
अगर किसी जमीन पर मस्जिद है या उसका प्रयोग इस्लामिक कामों के लिए हो रहा है तो वह अपने आप वक्फ की संपत्ति हो जाती है. ऐसा प्रावधान पुराने कानून में है. नए कानून में इसे हटा दिया गया है. कहा गया है कि जब तक किसी ने वक्फ को संपत्ति दान न की हो, वह वक्फ की प्रॉपर्टी नहीं होगी. भले उस पर मस्जिद ही क्यों न बनी हो.
सबसे ज्यादा विवाद जिस बिंदु पर है वो है कि वक्फ बोर्ड में अब अन्य धर्म के लोगों और महिलाओं की भी नियुक्ति की जा सकेगी. हालांकि, पुराने कानून में इसकी सख्त मनाही थी.नए कानून के हिसाब से वक्फ बोर्ड में 2 महिलाएं और अन्य धर्म के 2 सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी.
किसने पास कितनी ताकतवक्फ बिल पास कराने के लिए भाजपा के पास लोकसभा में पर्याप्त वोट हैं. 543 सदस्यों वाली लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसदों का बहुमत है. इसमें जेडी(यू) के 12 सांसद शामिल हैं. टीडीपी के 16 सांसद हैं. दोनों ही दल बिल के पारित होने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. दोनों ही दल अपने राज्य में मुस्लिम वोटों पर आश्रित हैं. ऐसे में इनके स्टैंड को लेकर स्थिति साफ नहीं थी लेकिन बिल के सदन में पेश होने से पहले दोनों ने इसके समर्थन का एलान किया है. राज्यसभा की बात करें तो वहां इस विधेयक को लेकर कोई अड़चन नहीं आने वाली है. राज्यसभा में एनडीए को 125 सांसदों का समर्थन प्राप्त है. यह बहुमत के 118 के आंकड़े से 7 ज्यादा है.
क्या है वक्फ बोर्डसरल शब्दों में वक्फ मुसलमानों द्वारा किया जाने वाला धार्मिक दान है, जो ज्यादातर संपत्ति के रूप में होता है. इनमें से अधिकांश दान वैलिड डॉक्युमेंट के बिना किए जाते हैं. ऐसे दान से मिलने वाली आय का प्रयोग मस्जिदों, कब्रिस्तानों के रख-रखाव में किया जाता है. इसके अलावा मदरसों और अनाथालयों को फंडिंग भी इसी से दी जाती है. कोई भी संपत्ति एक बार जब वक्फ के रूप में नामित हो जाती है तो उसे किसी को बेचा नहीं जा सकता. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में वक्फ बोर्ड 8.72 लाख संपत्तियों को कंट्रोल करते हैं. यह 9.4 लाख एकड़ से भी ज्यादा है.
वीडियो: संसद में आज: Waqf Board Bill पर हंगामा, Akhilesh Yadav का गुस्सा, वक्फ बिल पेश होने से पहले संसद में क्या हुआ?