लोकसभा में बुधवार 2 अप्रैल को वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill) पेश किया गया. सरकार की ओर से केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने बिल सदन के पटल पर रखा. सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि संशोधन नहीं आता तो इस पार्लियामेंट को भी क्लेम किया जा रहा था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘संसद को वक्फ के कब्ज़े से बचाया’.
'संसद पर भी वक्फ का कब्ज़ा होता, PM मोदी ने बचाया', वक्फ बिल पर बहस के दौरान बोले किरेन रिजिजू
वक्फ बिल को लेकर काफी दिनों से विवाद चला आ रहा है. इस विधेयक को पारित कराने के लिए NDA और उसकी सहयोगी पार्टियां एकजुट हैं. वहीं विपक्ष का I.N.D.I.A. ब्लॉक इसके विरोध में है.

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने लोकसभा में कहा,
दिल्ली में 1978 से एक केस चल रहा था. दिल्ली वक्फ बोर्ड ने सीजीओ कॉमप्लेक्स, संसद भवन, एयरपोर्ट, वसंत विहार समेत कई अन्य सरकारी संपत्तियों पर दावा ठोक दिया था. अगर नरेन्द्र मोदी जी की सरकार नहीं आती, यूपीए की ही सरकार रह जाती तो पता नहीं क्या क्या बिल्डिंग को डिनोटिफाई कर दिया जाता. 123 संपत्ति तो डिनोटिफाई कर ही दिया गया था.
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर विपक्ष ने खूब हंगामा किया. तो रिजिजू ने कहा कि वे अपने मन से कुछ नहीं कह रहे हैं सभी आधिकारिक रिकॉर्ड में हैं. अगर तर्क नहीं है तो इस तरह से हंगामा करना ठीक बात नहीं है. स्पीकर ने विपक्ष से कहा कि आपकी बारी आएगी तो आप अपनी बात रखिएगा.
गौरतलब है वक्फ बिल को लेकर काफी दिनों से विवाद चला आ रहा है. इस विधेयक को पारित कराने के लिए NDA और उसकी सहयोगी पार्टियां एकजुट हैं. वहीं विपक्ष का I.N.D.I.A. ब्लॉक इसके विरोध में है.
‘मस्जिद के काम में दखल नहीं’विपक्ष के विरोध के बीच बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा,
वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक चीज़ों में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे. ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है. कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं. हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं.”
इस पर विपक्ष की ओर से टिप्पणी करने की कोशिश की गई. स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए नसीहत दी कि भारत की संसद में बैठे हो, गरिमा का ध्यान रखो. किसी भी व्यक्ति को बैठे-बैठे टिप्पणी का अधिकार नहीं है. बता दें कि विपक्ष का कहना है कि सरकार इस बिल के ज़रिए उनके धार्मिक मामलों में दखल देना चाहती है. वहीं सरकार इसे पारदर्शिता का कदम बताती है.
‘इसी बिल पर सबसे ज़्यादा याचिकाएं आईं’किरेन रिजिजू ने कहा कि इससे ज़्यादा संख्या में आजतक किसी भी बिल पर लोगों की याचिकाएं नहीं आईं. 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी है. 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष रखा. पॉलिसी मेकर्स, विद्वानों ने भी अपनी बात कमेटी के सामने रखी हैं. इस बिल का पॉजिटिव सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे.
उन्होंने आगे कहा,
आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार आजाद भारत का एक्ट बना और उसी में राज्य के बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था. 1995 में व्यापक रूप से एक्ट बना. उस समय किसी ने इसे असंवैधानिक, अनलॉफुल नहीं कहा. आज हम जब ये बिल ला रहे तो ये बोलने का विचार कैसे आया. जिसका बिल में कोई लेना-देना नहीं है, उसे लेकर आपने लोगों को गुमराह करने का काम किया.
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्ष की कई पार्टियों ने बिल के कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाया था. इसके बाद अगस्त 2024 में बिल जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजा गया. वहां कुछ बदलावों के बाद बिल को फिर एक बार संसद में पेश किया गया है.
वीडियो: संसद में आज: Waqf Board Bill पर हंगामा, Akhilesh Yadav का गुस्सा, वक्फ बिल पेश होने से पहले संसद में क्या हुआ?