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'राम मंदिर ट्रस्ट में मुस्लिम को शामिल करेंगे?...', वक्फ बिल पर खरगे ने ये सवाल उठा दिया

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने Waqf Amendment Bill 2025 पर राज्यसभा में विरोध जताया. उन्होंने बिल को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ और संविधान विरोधी बताया. उन्होंने पूछा कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम सदस्य है?

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राज्यसभा में वक्फ बिल 2025 पर बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे. (Sansad TV)

वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को राज्यसभा में पेश किया गया है. गुरुवार, 3 अप्रैल की रात बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वक्फ बिल पर कड़ा विरोध जताया. खरगे ने कहा कि अगर राम मंदिर ट्रस्ट में किसी मुस्लिम को जगह नहीं दी जाती, तो फिर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को क्यों शामिल किया जा रहा है. खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी दलित को भी इस तरह के धार्मिक ट्रस्ट में जगह दी जाती है.

राज्यसभा में खरगे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि नए बिल में मुस्लिम सदस्यों को चुनने के बजाय नामित किया जाएगा. यह सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए सरकार यह सब कर रही है. खरगे ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लैंड बैंक बनाकर सरकार बेच सकती है. उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्ति के विवाद में कलेक्टर अपने पक्ष में फैसला करेगा, वक्फ बोर्ड के पक्ष में नहीं.

सेंट्रल वक्फ काउंसिल में पहले सांसद, पूर्व जज और एमिनेंट का मुस्लिम होना अनिवार्य है. लेकिन वक्फ संशोधन बिल में इनका मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं है, और दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य किया गया है. खरगे ने सवाल किया कि इसमें गैर-मुस्लिमों को क्यों लाया जा रहा है?

खरगे ने पूछा कि क्या तिरुपति या राम मंदिर ट्रस्ट में किसी मुस्लिम सदस्य को शामिल किया जाता है? उन्होंने आगे कहा कि 

मुस्लिम तो छोड़िए, मैं हिंदू हूं, मेरे जैसे दलित समाज के लोगों को भी उस ट्रस्ट में नहीं रखते हैं. इतने मंदिर हैं, किसी में भी शेड्यूल्ड कास्ट (अनूसूचित जाति) लोगों को नहीं रखते हैं.

राज्यसभा में खरगे ने कहा कि वक्फ बिल की मंशा मुस्लिम समुदाय को तंग करने की है और यह बिल पूरी तरह से पक्षपाती है. खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है और यह बदलाव वक्फ बोर्ड के कामकाज में गैरजरूरी हस्तक्षेप करने के लिए लाया गया है. उन्होंने कहा कि यह बिल 1995 के वक्फ एक्ट में किए गए बदलावों के खिलाफ है और इसे देश में धार्मिक और जातीय असंतोष पैदा करने के लिए तैयार किया गया है.

खरगे ने आंकड़े पेश करते हुए सरकार पर आर्थिक अनियमितता बरतने का भी आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि सरकार ने माइनॉरिटी डिपार्टमेंट के बजट में कमी की है. उन योजनाओं को बंद कर दिया है जो गरीब मुस्लिम छात्रों और समुदाय के अन्य वर्गों के लिए थीं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी पैसे को खर्च नहीं किया जा रहा है. यह दिखाता है कि सरकार असल में अल्पसंख्यक के कल्याण में दिलचस्पी नहीं रखती है.

खरगे ने सरकार से अपील की कि वो इस बिल को वापस ले और मुस्लिम समुदाय के साथ इंसाफ करे. उन्होंने संविधान की बात करते हुए कहा कि यह बिल संविधान के खिलाफ है क्योंकि यह धार्मिक और जातीय आधार पर भेदभाव कर रहा है. खरगे ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंकने से बेहतर है कि शांति और एकता बनाए रखने की कोशिश की जाए.

सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शायरी का भी सहारा लिया. खरगे ने ये शेर सुनाकर सरकार पर हमला बोला-

"नजर नहीं है, नजारों की बात करते हैं,
जमीं पर चांद सितारों की बात करते हैं,
वो हाथ जोड़कर बस्ती को लूटने वाले,
भरी सभा में सुधारों की बात करते हैं,
बड़ा हसीन है उनकी जुबान का जादू,
लगा के आग बहारों की बात करते हैं.
मिली कमान तो अटकी नजर खजाने पर,
नदी सुखाकर किनारों की बात करते हैं,
वही गरीब बनाते हैं आम लोगों को,
वही नसीब के मारों की बात करते हैं."

खरगे ने कहा कि जिस धर्म में कोई विश्वास करता है, उसे ही उस धर्मस्थल का सदस्य बनाया जाना चाहिए. नेता विपक्ष ने मांग की कि बोधगया को बौद्ध धर्म के लोगों को वापस देना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह भारत ही नहीं बल्कि जापान, चीन, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका समेत पूरी दुनिया की मांग है. खरगे ने कहा कि अगर सरकार ने गलती की है, तो उसे ठीक करना चाहिए. सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए.

वीडियो: Sanjay Singh का तगड़ा भाषण, Waqf Bill 2025 पर सरकार को घेरा