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"संविधान को कमजोर करना, भ्रम फैलाना, समाज को बांटना..." कांग्रेस सांसद ने वक्फ बिल के मूल उद्देश्य बताए हैं

Waqf Bill 2024: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पूछा कि सरकार मुसलमानों से उनके धर्म का सर्टिफिकेट क्यों मांगना चाहती है. क्या वो दूसरे धर्म के लोगों से भी पूछेंगे कि उन्होंने पांच सालों तक अपने धर्म का पालन किया है या नहीं?

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लोकसभा में बोलते गौरव गोगोई. (तस्वीर: संसद टीवी)

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संसोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) 2024 को पेश किया. अपने भाषण के दौरान उन्होंने इस बिल के विभिन्न प्रावधानों की चर्चा की. इसके बाद विपक्षी दलों की ओर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को बोलने का मौका दिया गया. रिजिजू ने आरोप लगाए थे कि 2014 से पहले UPA की सरकार ने देश की प्रमुख संपत्तियों को वक्फ के नाम कर दिया. गोगोई ने इन सारे आरोपों को खारिज कर दिया.

असम के जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई ने कहा,

उन्होंने (रिजिजू) हाउस को मिसलीड किया. 2013 के UPA सरकार के बारे में जो भी कहा, वो सब झूठ है. राम मंदिर के मामले में और इस बिल के मामले में मेरा मार्गदर्शक है- भारत का संविधान. ये कहता है कि हमारे भारत में हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता का अधिकार है. साथ ही व्यक्ति की गरिमा और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता… ये पूरा भाषण (रिजिजू का), संविधान के मौलिक अधिकार पर और हमारे संघीय ढांचे पर आक्रमण था.

इस बिल के चार उद्देश्य

गौरव गोगोई ने आगे कहा,

इस बिल से इनके (सरकार के) चार मूल उद्देश्य हैं. पहला- संविधान को कमजोर करना. दूसरा- अल्पसंख्यकों को लेकर भ्रम फैलाना. तीसरा- भारतीय समाज को बांटना. ये चाहते हैं कि हमेशा मसला बढ़ता जाए. चौथा- अल्पसंख्यक समुदाय को वंचित करना. कुछ समय पहले ईद मनाई गई. डबल ईंजन की सरकार वाले राज्यों में रास्ते पर नमाज भी नहीं पढ़ने दिया गया. इनकी सरकार में कितने अल्पसंख्यक सांसद हैं. पहले इसका जवाब दें. 

किसने बनाया ये बिल?

कांग्रेस सांसद ने कहा,

उन्होंने (रिजिजू ने) पहले भी कहा कि बिल पर बहुत विस्तार से चर्चा हुई थी. पूरा का पूरा मिसलीड किया. 2023 में चार बार मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स की बैठक हुई. किसी भी बैठक में इस बिल का जिक्र नहीं हुआ. आप मीटिंग के मिनट्स उठा कर देख लिजिए. मैं पूछना चाहता हूं कि ये बिल मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स ने बनाया या किसी और ने. कहां से आया ये?

इस पर कुछ सदस्यों चिल्ला के कहा, “नागपुुर से”. गोगोई ने कहा कि ये बिल संविधान के विरोध में है. उन्होंने कहा,

ये चाहते हैं कि अल्पसंख्यकों को अपने धर्म का सर्टिफिकेट देना पड़ेगा. देश में ऐसी स्थिती हो गई है. क्या ये दूसरे धर्म से सर्टिफिकेट मांगेगे कि किसी ने पांच साल तक अपने धर्म का पालन किया है या नहीं. 

‘वक्फ बाई यूजर’ का प्रावधान हटाने को लेकर भी गौरव गोगोई ने सवाल उठाए और कहा कि इसको लेकर अलग-अलग जजमेंट भी आए हैं. उन्होंने कहा,

इसे अलग-अलग जजमेंट ने ताकत दी. वक्फ क्या है, ये भी हमें समझना चाहिए. ये कहते हैं कि पांच साल इस्लाम प्रैक्टिस करने वाला ही वक्फ में आ सकता है. वक्फ कोई भी व्यक्ति कर सकता है, ये अधिकार क्यों छीन रहे हो. पहले से ही था कि काउंसिल में दो से अधिक सदस्य महिलाएं हो सकती थीं, इन्होंने दो पर ही कैप कर दिया. विधवा, तलाकशुदा महिलाओं की सदस्यता का प्रावधान पहले भी था. इनको भ्रम फैलाना है कि वर्तमान का एक्ट महिलाओं के खिलाफ है. क्लॉज 33 में रेवेन्यू जो सात फीसदी आता था, उसे इन्होंने गिराकर पांच फीसदी कर दिया. 

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"आज एक समाज पर नजर है…"

पुराने कानून को लेकर गोगोई ने कहा,

अगर कोई खामियां हुई भी हैं, माना कि कोई भी कानून परफेक्ट नहीं है. केरल, आंध्र से लेकर अलग-अलग राज्यों में खामियां हुई भी हैं तो उस रेवेन्यू को घटाने की बजाय इसे और बढ़ाइए. आज इनकी एक समाज की जमीन पर नजर है. कल दूसरे अल्पसंख्यकों की जमीन पर इनकी नजर जाएगी. संशोधन की जरूरत है, ऐसा नहीं कहता कि इसकी जरूरत नहीं है. हम संशोधन के विपक्ष में नहीं हैं. संशोधन ऐसा हो जिससे ये बिल और ताकतवर हो. इन्होंने जो संशोधन लाए हैं, उससे मसले और बढ़ेंगे. सरकार धार्मिक मामलों में दखल दे रही है. ये देश में भाईचारे के माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं. राज्य सरकार की अनुमति से बोर्ड को कुछ नियम बनाने की इजाजत थी जिसे ये पूरा का पूरा हटा रहे हैं. सरकार वक्फ बोर्ड को कमजोर करना चाहती है.

जोरहाट सांसद ने कहा कि सरकार चुनाव की प्रक्रिया हटाना चाहती है. उन्होंने कहा,

ये बार-बार इस तरह का भ्रम फैला रहे हैं कि पुराने कानून में हाईकोर्ट का कोई रोल नहीं है. वक्फ ट्रिब्यूनल का आदेश ही अंतिम होगा. अगर कहीं अन्याय हो तो सेक्शन 96 के तहत केंद्र सरकार को ये पावर है कि वो डायरेक्शन जारी कर सकता है. मामला हाईकोर्ट भी जा सकता है. कहीं भी नाइंसाफी हुआ तो आप बताइए कि 10 साल में कितनी बार आपने इसका इस्तेमाल कर डायरेक्शन जारी किए. आपके पास ये ताकत है, कितनी बार इसे आजमाया. ये बताइए फिर कमजोर बोलिए. कहीं सुधार की जरूरत है तो करिए.

उन्होंने कहा कि आप हमें ये बताइए कि और कौन से बोर्ड, किस धर्म में आप एक्ट लाना चाहते हैं. आप क्या संदेश देना चाहते हैं. उस कौम पर आप दाग लगाना चाहते हैं जिसमें लगभग दो लाख उलेमा शहीद हुए. जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हमारा साथ दिया, दांडी मार्च का सपोर्ट किया, ब्रिटिश डिवाइड एंड रूल का खंडन किया, आप उस कौम पर दाग लगाना चाहते हैं. जब आप लोग भारत छोड़ो आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे थे, उस कौम ने किया.

वीडियो: वक्फ संशोधन बिल पेश होने से पहले क्या बोले Kiren Rijiju?