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'अपनी भावनाएं यहां न लाएं' महात्मा गांधी के परपोते की याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट, मामला साबरमती आश्रम से जुड़ा है

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के परपोते तुषार गांधी (Tushar Gandhi) ने साबरमती आश्रम के पुनर्विकास की गुजरात सरकार की योजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है.

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तुषार गांधी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के परपोते तुषार गांधी (Tushar Gandhi) की याचिका खारिज कर दी. इस याचिका में गुजरात सरकार की साबरमती आश्रम पुनर्विकास योजना को चुनौती दी गई थी. तुषार गांधी ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि सरकार का यह प्रोजेक्ट साबरमती आश्रम की सादगी को खत्म कर देगा. इतना ही नहीं, यहां से हरिजन परिवारों को हटा दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने गांधी की यह दलील नहीं मानी और कहा कि वो अपनी भावनाएं लेकर यहां न आएं. इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी थी.

साबरमती आश्रम प्रोजेक्ट

गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे महात्मा गांधी ने एक आश्रम बनाया था, जिसे साबरमती आश्रम कहा जाता है. इसे गांधीजी का घर भी कहा जाता था. यहां वह रहते थे और इसके आसपास खेती-बाड़ी भी करते थे. साल 1930 तक गांधी यहां रहे. स्वतंत्रता आंदोलन की यादें संजोए यह आश्रम भारत के प्रमुख विरासत स्थलों में से एक है. गुजरात सरकार इसके पुनर्विकास के लिए एक योजना लेकर आई है, जिसमें 54 एकड़ में फैले साबरमती आश्रम के आसपास के 48 हेरिटेज साइट्स के कायाकल्प की योजना है. सरकार का मकसद इस जगह को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है. इस परियोजना पर कुल 1200 करोड़ रुपये की लागत आने वाली है.

गुजरात सरकार के इस प्रोजेक्ट का विरोध

गुजरात सरकार के इस प्रोजेक्ट के खिलाफ महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने कोर्ट चले गए. उन्होंने पहले गुजरात हाईकोर्ट में इस परियोजना के खिलाफ याचिका डाली. 25 नवंबर 2021 को गुजरात हाईकोर्ट ने तुषार गांधी की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट में राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि वह मुख्य आश्रम के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थानों को नहीं छूएगी. एक एकड़ में बने मौजूदा आश्रम को भी नहीं बदला जाएगा.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, तुषार गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की. तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह परियोजना गांधीजी के साबरमती आश्रम की सादगी को खत्म कर देगी और इसे गांधीवादी मूल्यों से दूर एक स्टेट-कंट्रोल्ड स्मारक बना देगी. तुषार गांधी ने आगे कहा कि यह गांधीवादी विरासत के साथ विश्वासघात है. पुनर्विकास परियोजना के लिए आश्रम में रहने वाले हरिजन परिवारों को हटाया जाएगा और उन गांधीवादी ट्रस्टों को नजरअंदाज किया जाएगा, जो सालों से इस आश्रम का प्रबंधन कर रहे हैं.

उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा 1933 में घनश्यामदास बिड़ला को लिखे गए पत्र का हवाला दिया और कहा कि गांधीजी ने खुद आश्रम की जमीन हरिजन सेवा संघ को सौंपने की इच्छा जताई थी. तुषार गांधी ने आशंका जताई कि सरकार गुजरात हाईकोर्ट में दिए गए अपने आश्वासन का पालन नहीं करेगी.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तुषार गांधी की सभी दलीलें खारिज कर दीं. कोर्ट ने उनसे कहा, 

आप यहां अपनी भावनाएं लेकर न आएं. हम आगे बढ़ रहे हैं. देश आगे बढ़ रहा है. चीजों को देखने का एक तरीका होता है.

याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह केवल आशंका के आधार पर दायर की गई थी. आशंका को किसी आदेश को चुनौती देने का आधार नहीं बनाया जा सकता.

कोर्ट ने कहा,

ये दलील दी गई कि आशंका है कि राज्य सरकार अपने वादों का पालन नहीं करेगी. हम इस याचिका को खारिज करते हैं. क्योंकि यह केवल एक आशंका है. ऐसे मामलों में हमारी भूमिका सीमित है. हाईकोर्ट ने आपकी आशंकाओं और सरकार के आश्वासनों पर विचार किया था. हमने सब कुछ देखा और इसमें कुछ भी ऐसा नहीं पाया जो दखल की मांग करता हो.

सुप्रीम कोर्ट ने तुषार गांधी से कहा कि अगर गुजरात सरकार अपने वादों से हटती है तो वह गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. 

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