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रतन टाटा ने अपनी वसीयत में ऐसा क्लॉज जोड़ा कि विरोध करने वालों को कोई लाभ नहीं मिलेगा

Ratan Tata की वसीयत में को लेकर कई जटिलताएं सामने आई हैं. इसके कारण उनकी संपत्ति के लाभार्थियों में कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. एक लाभार्थी Mohini Mohan Dutta ने अपने हिस्से को लेकर स्पष्टता मांगी है.

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रतन टाटा की वसीयत में को लेकर कई जटिलताएं सामने आई हैं. (फाइल फोटो: एजेंसी)

रतन टाटा ने अपनी वसीयत (Ratan Tata Will) में ‘नो-कॉन्टेस्ट क्लॉज’ जोड़ा था. इसका मतलब है कि उनकी वसीयत को चुनौती देने वालों को उनकी संपत्ति से कुछ भी नहीं मिलेगा. वसीयत के मामले में उन्हें अपने अधिकारों और लाभों से वंचित होना पड़ेगा. रतन टाटा ने अपनी संपत्ति के दावेदारों के बीच विवाद की आशंका को देखते हुए ऐसा किया था. अब खबर है कि लंबे समय तक रतन टाटा के सहयोगी रहे मोहिनी मोहन दत्ता (Mohini Mohan Dutta) ने उनकी संपत्ति में अपने हिस्से पर स्पष्टीकरण मांगा है.

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले को रिपोर्ट किया है. पिछले साल 9 अक्टूबर को टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा का निधन हो गया था. इसके कुछ महीनों बाद ही मोहिनी मोहन दत्ता सुर्खियों में आ गए. दावा किया गया कि रतन टाटा ने अपनी वसीयत में दत्ता के लिए करोड़ों की संपत्ति छोड़ी है. 

पिछले हफ्ते ये मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा. वसीयत के निष्पादकों (executors) ने कोर्ट में वसीयत को ‘प्रोबेट’ के लिए पेश किया था. यानी कि इसे कानूनी तौर पर लागू करने की मंजूरी मांगी गई है. निष्पादक का मतलब उन व्यक्तियों से है जो वसीयत में दिए गए निर्देशों को लागू करने का काम करते हैं. वो ये सुनिश्चित करते हैं कि वसीयत के मुताबिक संपत्ति का बंटवारा और अन्य आदेश सही तरीके से पूरे हों. इस मामले में निष्पादकों ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को मध्यस्थता करने के लिए नियुक्त किया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दत्ता को रतन टाटा की संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा मिल सकता है. उनकी सपंत्ति की कीमत लगभग 3,800 करोड़ रुपये के बराबर है. दत्ता के हिस्से में टाटा संस के शेयर भी शामिल हैं. टाटा संस के शेयर्स की कुल कीमत 1,684 करोड़ रुपये है. लेकिन टाटा संस के ये शेयर रतन टाटा द्वारा स्थापित दो फाउंडेशन्स को दिए गए हैं, जिससे दत्ता के हिस्से को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन गई है. यानी कि बहुत ज्यादा साफ नहीं है कि दत्ता को कितनी संपत्ति मिलेगी. उन्होंने इसी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है.

संपत्ति से वंचित हो जाएंगे दत्ता?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, दत्ता ने सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा है. उन्होंने वसीयत की शर्तों को चुनौती नहीं दी है. कोर्ट इस वसीयत की जटिलताओं को सुलझाने की कोशिश कर रहा है. रतन टाटा की विशाल संपत्ति का भाग्य अदालत में तय किया जाएगा. उनकी वसीयत में ज्यादतर संपत्ति चैरिटी के कामों के लिए है. इसमें रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट प्राथमिक लाभार्थी हैं. ये संगठन इस धन का उपयोग परोपकारी उद्देश्यों के लिए करेंगे.

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