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म्यांमार भूकंप में इस इमाम ने खोए 170 रिश्तेदार, दोस्त और करीबी लोग

सागाइंग क्षेत्र में भी भूकंप ने काफी ज्यादा तबाही मचाई. भूकंप से यहां कम से कम तीन मस्जिदें गिरने की बात सामने आई है. इनमें यहां की सबसे बड़ी म्योमा मस्जिद भी शामिल है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सागाइंग में नमाज के दौरान भूकंप से मारे गए अधिकतर लोग एक मस्जिद के पूर्व इमाम सोए ने ऊ के करीबी हैं.

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सोए ने बताया कि उनके लिए अपनी पूर्व मण्डली से दूर रहना कठिन है. म्यांमार से विदेश चले गए कई अन्य लोगों की तरह उन्हें भी बचे हुए लोगों का दुख महसूस होता है. (फोटो- BBC)

म्यांमार में 28 मार्च को आए भीषण भूकंप (Myanmar earthquake) से अब तक लगभग 2900 लोगों की जान चली गई है. इस त्रासदी ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है. इस जलजले ने यहां की दर्जनों मस्जिदों को भी गिरा दिया. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक मस्जिदों के गिरने से सैकड़ों मुस्लिमों की मौत हुई है. ये लोग शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए इन मस्जिदों में इकट्ठा हुए थे. उसी वक्त जमीन इतनी जोर से हिली कि कई मस्जिदें ढह गईं और बड़ी संख्या में नमाजी मलबे में दब कर मारे गए.

सागाइंग क्षेत्र में भी भूकंप ने काफी ज्यादा तबाही मचाई. भूकंप से यहां कम से कम तीन मस्जिदें गिरने की बात सामने आई है. इनमें यहां की सबसे बड़ी म्योमा मस्जिद भी शामिल है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सागाइंग में नमाज के दौरान भूकंप से मारे गए अधिकतर लोग एक मस्जिद के पूर्व इमाम सोए ने ऊ के करीबी हैं. वो इस समय थाईलैंड बॉर्डर पर स्थित माई सोत शहर में रह रहे हैं.

‘आंसू नहीं रोक पाता’

माई सोत शहर, म्योमा मस्जिद से सैकड़ों किलोमीटर दूर है. बीबीसी के ज़ेयार हटन और टेस्सा वोंग से बातचीत में सोए ने बताया कि इतनी दूर रहते हुए भी उन्होंने भूकंप को महसूस किया था. बाद में उन्हें त्रासदी की जमीनी हकीकत पता चली तो वो दंग रह गए. सोए का कहना है कि कुछ दिन बाद उन्हें पता चला कि उनके करीब 170 रिश्तेदार, दोस्त और सागाइंग में उनके समुदाय के करीबी लोग भूकंप में मर चुके हैं. इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत मस्जिदों में ही हुई. कुछ लोग शहर के मुस्लिम समुदाय के प्रमुख व्यक्ति भी बताए जा रहे हैं. 

सोए ने बताया,

"मैं उन सभी लोगों के बारे में सोचता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई, और पीड़ितों के बच्चों के बारे में - उनमें से कुछ छोटे बच्चे हैं. जब भी मैं इस बारे में बात करता हूं तो मैं अपने आंसू नहीं रोक पाता."

रिपोर्ट के मुताबिक देश के नेता मिन आंग ह्लाइंग द्वारा 1 अप्रैल को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, करीब 500 मुसलमान मस्जिदों में नमाज पढ़ते समय भूकंप आने से मारे गए. सागाइंग में प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि म्योमा स्ट्रीट सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. इस सड़क पर सबसे ज्यादा मस्जिदें थीं. वहां बने कई अन्य घर भी ढह गए हैं.

सोए ने ऊ ने समुदाय के जीवित बचे सदस्यों के हवाले से बताया कि मस्जिदों में आए लोगों ने अपनी जान बचाने की कोशिश भी की थी, लेकिन वो वहां से निकलने में कामयाब नहीं हो पाए. सोए ने भूकंप में जिन प्रियजनों को खोया है, उनमें उनकी पत्नी की चचेरी बहन भी शामिल है. उन्होंने कहा,

“इमाम के तौर पर अपने 13 सालों के कार्यकाल में उनकी मृत्यु सबसे दर्दनाक घटना थी जिसे मैंने सहा है."

सोए ने आगे बताया कि वो एक ऐसी महिला थी जिसने उन पर सबसे ज्यादा प्यार दिखाया, उनका जाना परिवार के लिए असहनीय है. सोए की पत्नी के एक अन्य चचेरे भाई, जो एक प्रतिष्ठित बिजनेसमैन, वो भी इस भूकंप में मारे गए हैं. इमान ने कहा,

"वो हमेशा मुझे न्यी ले (बर्मी भाषा में 'छोटा भाई') कहकर बुलाते थे...जब मैंने अपनी पत्नी से विवाह किया, तो उन्होंने कहा कि अब हम परिवार हैं और उन्होंने हमेशा मेरे साथ अपने छोटे भाई की तरह व्यवहार किया. जब भी हमें उनकी जरूरत होती थी, वो हमेशा हमारे लिए मौजूद थे. मैंने उन लोगों को खो दिया है जिन्हें मैं भाइयों की तरह प्यार करता था."

सोए आगे कहते हैं कि उनके लिए पीछे छूट गए लोगों से दूर रहना कठिन है. म्यांमार से विदेश चले गए कई अन्य लोगों की तरह उन्हें भी बचे हुए लोगों का दुख महसूस होता है. वो कहते हैं,

"यदि मैं अभी भी इमाम होता, तो भूकंप के समय मैं उनके साथ ही मर जाता, जिसे मैं शांतिपूर्वक स्वीकार कर सकता हूं. यदि नहीं, तो कम से कम मैं वहां पर रहकर कुछ भी कर सकता था."

सोए कहते हैं कि इसके बारे में सोचना दुखद है. वो अपने लोगों के बारे में सुनकर रोने भी लगते हैं. वो बताते हैं,

"ये दुख और निराशा की भावना मुझे अभी महसूस हो रही है, मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया. मैं ऐसा आदमी हूं जो शायद ही कभी रोता हो.”

सोए फिलहाल अपनी पत्नी और बेटी के साथ थाई शहर माई सोत में रहते हैं. वो 2021 में हुए तख्तापलट के तुरंत बाद म्यांमार से चल गए थे. उन्होंने बताया कि वो कई दिनों से सो नहीं पाए हैं. उनकी चिंता इस बात से और बढ़ गई है कि उन्हें अभी तक अपने परिवार के कुछ सदस्यों से कोई खबर नहीं मिली है, जिनमें उनके अपने भाई-बहन भी शामिल हैं. वे मंडाले में थे. 

सोए ने थाईलैंड में एक मानवाधिकार समूह के लिए अपना काम रोक दिया है. वो वर्तमान में सागाइंग में बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं. साथ ही शहर में अपने लोगों से मिलने वाली सभी जानकारियां साझा कर रहे हैं. सोए का अनुमान है कि क्षेत्र में कम से कम 1,000 मुसलमान प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अभी भी सहायता की आवश्यकता है.

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