पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने उत्तराखंड (Uttarakhand) में कई जगहों के नाम बदलने का फैसला लिया. इसमें सड़कों समेत 17 जगहें शामिल हैं. इन्हीं में एक क्षेत्र है- 'मियांवाला'. राज्य सरकार ने इस क्षेत्र का भी नाम बदलने का आदेश दिया है. लेकिन अब इस क्षेत्र के रहने वाले लोगों ने इस आदेश का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि ‘मियांवाला’ शब्द 'मियां' से बना है. इसका मुस्लिम समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है. ये एक राजपूत ‘उपाधि’ है.
'मियांवाला का नाम न बदलो, ये तो राजपूतों का... ', उत्तराखंड सरकार के आदेश के विरोध में उतरे लोग
Uttarakhand की Pushkar Singh Dhami की सरकार ने ऐसे कुछ जगहों के नाम बदले हैं, जो मुसलमानों से जुड़े हुए हैं. देहारादून के 'मियांवाला' इलाके का नाम बदलने का भी आदेश दिया गया है. लेकिन स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया है. इनका क्या कहना है?

स्थानीय लोगों ने देहरादून के जिलाधिकारी को एक आवेदन भी दिया है. उन्होंने दावा किया है कि ‘मियांवाला’ का अस्तित्व देहारदून से भी पुराना है. आवेदकों ने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि इस नाम को नहीं बदला जाए. उन्होंने लिखा है,
सत्ता में आने के बाद राजा फतेहशाह के पोते प्रदीपशाह ने ‘गुरु रामराय’ को 4 गांव भेंट किए थे. इनमें से एक ‘मियांवाला’ गांव भी था. प्रदीप शाह का शासनकाल साल 1717 से 1772 के बीच रहा. साल 1815 में दून पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया. इसका जिक्र कुछ पुरानी किताबों में भी मिलता है. उदाहरण के लिए इसका जिक्र दून के सुपरिटेंडेट रहे ‘जीआरसी विलियम्स’ की 1874 में लिखी गई किताब ‘मेमोयोर ऑफ देहरादून’ में मिलता है. इसके अलावा ‘एचजी वॉल्टन’ की 1990 की पुस्तक ‘देहरादून गजेटियर’ में भी इसका जिक्र है. दून के बारे में जानकारी देने वाली अन्य अग्रेंजी लेखकों की पुस्तकों में भी मियांवाला का उल्लेख मिलता है.
उन्होंने आगे लिखा,
‘मियांवाला’ ऐतिहासिक नाम और धरोहर है. इससे हमारे बड़े-बुजर्ग और पूर्वजों का मान-सम्मान जुड़ा है. हमारी पहचान ही ‘मियांवाला’ से है और रहेगी. परन्तु कुछ राजनीति करने वालो ने हमारे गांव का नाम बदलने की कोशिश की है. और हमारे समाज को बांटने की कोशिश कर रहे है. निवेदन है कि हमारे क्षेत्र का नाम न बदला जाए. उसे ‘मियांवाला’ ही रहने दिया जाए.

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पिछले दिनों ‘मियांवाला’ का नाम बदलकर ‘रामजीवाला’ रखने का आदेश दिया गया था. धामी सरकार ने ऐसे कुछ और क्षेत्रों के भी नाम बदले हैं, जो मुसलमानों से जुड़े हैं. रुड़की में औरंगजेब नगर और खानपुर का नाम बदला गया है. औरंगजेब नगर का नाम बदलकर शिवाजी नगर और खानपुर गांव का नाम बदलकर श्री कृष्ण नगर कर दिया गया है. पंनचक्की-आईटीआई मार्ग का नया नाम गुरु गोलवलकर मार्ग रखा गया है. हल्द्वानी के नवाबी रोड का नाम बदलकर अटल मार्ग रखने का आदेश दिया गया है.
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