महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में किसानों की आत्महत्या की खतरनाक दर को स्वीकार किया है. सरकार ने माना कि बीते 56 महीनों में हर रोज़ औसतन आठ किसान आत्महत्या कर रहे हैं. यह चौंकाने वाला खुलासा विधान परिषद के बजट सत्र में किसानों की आत्महत्या पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में हुआ. इस आंकड़े ने महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
रोजाना 8 किसान कर रहे खुदकुशी! महाराष्ट्र सरकार का सनसनीखेज कबूलनामा
महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने सोमवार, 10 मार्च को एक चौंकाने वाला कबूलनामा किया. उन्होंने कहा कि पिछले 56 महीनों में औसतन हर रोज़ आठ किसानों ने आत्महत्या की. वे विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान NCP MLC शिवाजीराव गरजे द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे. मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 के बीच छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 952 किसानों ने आत्महत्या की.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने सोमवार, 10 मार्च को पुष्टि की कि 56 महीनों में औसतन हर रोज़ आठ किसानों ने आत्महत्या की. वे विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान NCP MLC शिवाजीराव गरजे द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे. जाधव ने कहा...
छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती संभागों में किसानों की आत्महत्या की संख्या दूसरे क्षेत्रों की तुलना में ज़्यादा है.
ये भी पढ़ेंः Zepto बनाम Mohammad Arshad 'Zepto': दिल्ली हाई कोर्ट में आया ट्रेडमार्क का अनोखा केस
मंत्री ने किसानों की आत्महत्या के कारणों और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार की कोशिशों का ज़िक्र किया. मंत्री द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में मराठवाड़ा संभाग में 952, अकोला में 168, वर्धा में 112, बीड में 205 और अमरावती संभाग में 1,069 किसानों ने अपनी जान दी.
मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 के बीच छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 952 किसानों ने आत्महत्या की. इनमें से 707 को सरकार की ओर से सहायता दी जानी थी. 433 मामलों में मदद दी भी गई थी. वहीं, बीड जिले में 167 मामलों में सहायता के लिए मंज़ूरी दी गई थी और 108 मामलों में आर्थिक मदद दी गई. अमरावती डिवीजन में 441 मामलों में सहायता दी जानी थी, लेकिन 332 को ही मदद मिल पाई.
एक विशेष सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि जालना जिले के मंथा तालुका में अप्रैल 2023 और सितंबर 2024 के बीच 13 किसानों ने आत्महत्या की. सरकार आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है.
कर्ज़ और घाटे ने ली किसान की जान
इंडिया टुडे के इनपुट के मुताबिक, कर्ज़ और घाटे ने किसान केशव थोरात की जान ले ली. उन्होंने खेती के लिए बैंक से 30,000 रुपये का कर्ज़ लिया था, जो समय के साथ बढ़ता गया. अगले साल लोन चुकाने के लिए उन्होंने 13,000 रुपये और उधार लिए, लेकिन उसे चुका नहीं पाए. कर्ज़ चुकाने की नई उम्मीद के साथ उन्होंने एक ट्रैक्टर खरीदा, लेकिन खराब मौसम और फसल की गिरती कीमतों ने उन्हें और कर्ज़ में डुबो दिया. जब कोई रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने अपनी जान ले ली.
11वीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी जानवी ने कहा, "मैं अपने पिता पर किसान होने के कारण गर्व करती थी, लेकिन अब गर्व डर में बदल गया है. सरकार को किसानों की फसलों के लिए उनकी लागत से ज़्यादा कीमत तय करनी चाहिए, ताकि किसी और बेटी को अपने पिता को न खोना पड़े."
किसान संगठनों की नाराज़गी
किसान संगठन के नेता विलास ताथोड़ का कहना है कि सरकार कर्ज़माफी की बात करती है, लेकिन बजट में किसानों को कोई राहत नहीं दी गई. "2010 में फसलों के जो दाम थे, आज भी वही हैं, लेकिन खेती की लागत तीन गुना हो गई है. ऐसे में किसान अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे कर सकते हैं?"
वीडियो: राजस्थान: पुलिसवाले की शर्मनाक हरकत, 3 साल के बच्चे के सामने प्रेग्नेंट महिला से रेप