कर्नाटक के कोडगु जिले के एक आदिवासी मजदूर पर पुलिस की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुरेश नाम के इस शख्स को पुलिस ने उनकी पत्नी मल्लिगे के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया था. दो साल तक सुरेश जेल में रहे. लेकिन हाल में उनकी पत्नी मल्लिगे जिंदा मिलीं. सुरेश के दोस्तों ने मल्लिगे को उनके कथित प्रेमी के साथ होटल में कॉफी पीते हुए देखा. अब कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को 17 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
पत्नी की 'हत्या' के लिए दो साल जेल में रहा पति, अब वो रेस्तरां में कॉफी पीती मिली
सुरेश और मल्लिगे की शादी को 18 साल हो चुके हैं. दंपती का एक बेटा और एक बेटी है. सुरेश का कहना है कि गुमशुदगी की शिकायत करते समय ही उन्हें ही मल्लिगे के ‘प्रेम-प्रसंग’ की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने शिकायत में इसका जिक्र कभी नहीं किया.

35 साल के सुरेश कुशलनगर के बसवनहल्ली इलाके में रहते हैं. नवंबर 2020 में उन्होंने कुशलनगर ग्रामीण थाने में मल्लिगे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. पुलिस ने मल्लिगे की तलाश शुरू की. जून 2021 में बेट्टदपुरा पुलिस को एक अज्ञात महिला का कंकाल मिला. शव के साथ एक साड़ी, कुछ अंतर्वस्त्र और एक जोड़ी चप्पल भी मिले.
पुलिस ने इसे मल्लिगे का शव मान लिया और सुरेश पर हत्या का आरोप लगा दिया. इंडिया टुडे से जुड़े सगाय राज की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पर आरोप है कि उसने सुरेश और उसकी सास गौरी पर दबाव डालकर अवशेषों की पहचान मल्लिगे के रूप में करवाई और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवा लिए.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, सुरेश पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन साइन करना जानते हैं. उन्होंने बताया,
“जब पुलिस मुझे गिरफ्तार करने घर आई, तो मैंने उन्हें बताया कि मैंने खुद ही गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी. लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी और जबरन कुछ दस्तावेजों पर साइन करवा कर मुझे जेल भेज दिया.”
सुरेश और मल्लिगे की शादी को 18 साल हो चुके हैं. दंपती का एक बेटा और एक बेटी है. सुरेश का कहना है कि गुमशुदगी की शिकायत करते समय ही उन्हें ही मल्लिगे के ‘प्रेम-प्रसंग’ की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने शिकायत में इसका जिक्र कभी नहीं किया.
सुरेश के जेल में रहते हुए उनके पिता ने बेटे की रिहाई के लिए कई वकीलों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी केस लेने को तैयार नहीं हुआ. आखिर में जनवरी 2022 में मैसूर के वकील बीएस पांडु पुजारी केस लड़ने को राजी हुए. उन्होंने इसके लिए कोई भी फीस नहीं ली. उन्होंने चार्जशीट और गवाहों के बयान पढ़े और फिर कोर्ट से कंकाल और मल्लिगे की मां की DNA जांच करवाने की मांग की. कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद DNA सैंपल की जांच हुई.
साल 2023 में आई DNA रिपोर्ट ने पुलिस की थ्योरी को गलत साबित कर दिया. रिपोर्ट में साफ हुआ कि बरामद हुआ कंकाल मल्लिगे का नहीं था. इसके बाद पुजारी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सुरेश की जमानत की अर्जी दी. 27 सितंबर, 2023 को उन्हें जमानत भी मिल गई. हालांकि इसके बाद भी वो जेल से बाहर नहीं आ पाए क्योंकि एक लाख रुपये की जमानत राशि वो नहीं दे पाए थे. इस कारण उन्हें सितंबर 2024 तक जेल में ही रहना पड़ा.
रिहा होने के बाद सुरेश ने पुलिस से अपनी पत्नी की खोजबीन की मांग की, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली.
इस बीच एक संयोग ने कमाल कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, बीती 1 अप्रैल को सुरेश के दोस्तों को मदिकेरी इलाके के एक होटल में मल्लिगे दिखीं. इस दौरान वो अपने कथित प्रेमी के साथ कॉफी पी रही थी. उन्होंने घटना का वीडियो बनाकर सुरेश को भेजा. सुरेश ने तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस ने मल्लिगे को हिरासत में लेकर उसकी पहचान की पुष्टि की.
पूछताछ में पता चला कि मल्लिगे नवंबर 2020 से विराजपेट के टी शेट्टिगेरी गांव में अपने कथित प्रेमी के साथ रह रही थीं. ये जगह उनके पुराने घर बसवनहल्ली से मात्र 30 किलोमीटर दूर थी.
पुलिस ने मल्लिगे को कोर्ट में पेश किया. बुधवार, 2 अप्रैल को पुजारी ने मल्लिगे की तस्वीरें और वीडियो पुलिस को सौंपे. लेकिन पुलिस ने उसे मल्लिगे से मिलने नहीं दिया. इस पर पुजारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट के आदेश पर मल्लिगे को मैसूर की 5वीं जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया.
आखिरकार मल्लिगे ने कोर्ट में कबूला कि वो नवंबर 2020 से अपने प्रेमी के साथ रह रही थीं. उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि सुरेश, उन्हीं की हत्या के आरोप में गिरफ्तार हैं.
कोर्ट ने मैसूर के पुलिस अधीक्षक विष्णुवर्धन एन और बेट्टदपुरा थाने के जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है. साथ ही, कोर्ट ने पुलिस विभाग से इस मामले में कथित लापरवाही पर 17 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.
इस मामले पर वकील पुजारी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि जब मल्लिगे जीवित है तो असली मृत महिला कौन थी. वकील ने कहा कि पुलिस ने न सिर्फ सुरेश को झूठे केस में फंसाया, बल्कि मृत महिला की पहचान करने की कोशिश भी नहीं की.
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