मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में दक्षिणपंथी संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान एक स्कूल में तोड़फोड़ की है (Jabalpur Protestors Vandalise School). करीब दो-तीन घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा. इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के मेन गेट पर लगे बोर्ड और कई खिड़कियों को तोड़ दिया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा.
स्कूल प्रिंसिपल के वॉट्सऐप स्टेटस पर ऐसा बवाल हुआ, दक्षिणपंथी संगठनों ने स्कूल में कोहराम मचा दिया
Jabalpur school ransacked: पुलिस ने बताया कि पोस्ट वायरल होने के बाद प्रदर्शनकारी स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने कीचड़ से भरे बैग रखे हुए थे. जिन्हें पुलिस और स्कूल स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद स्कूल परिसर में फेंक दिया गया. पूरा मामला क्या है?

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रिंसिपल ने व्हाट्सऐप स्टेटस पर भगवान राम को लेकर ‘विवादित टिप्पणी’ की थी.
वीएचपी के एक वरिष्ठ नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया...
ये विरोध उस स्टेटस के ख़िलाफ़ था, जो वायरल हो गया था. उसमें भगवान राम के ख़िलाफ़ टिप्पणी की गई थी. हमने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.
प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के डायरेक्टर से माफ़ी की मांग की और धमकी दी कि अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो वो बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे. वो क़रीब तीन घंटे तक स्कूल में रहे और पुलिस द्वारा कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद ही वे वहां से हटे.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामले की जांच चल रही है. उन्होंने कहा,
हमने अभी तक FIR दर्ज नहीं की है. हम इस बात की तकनीकी जांच कर रहे हैं कि असल में पोस्ट अपलोड किया गया था, या कोई एआई इमेज तो नहीं अपलोड किया गया. स्कूल प्रिंसिपल से जल्द ही पूछताछ की जाएगी. हमने शांति बनाए रखने के लिए यहां अतिरिक्त बल तैनात किया है.
पुलिस ने बताया कि पोस्ट वायरल होने के बाद प्रदर्शनकारी स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने कीचड़ से भरे बैग रखे हुए थे. जिन्हें पुलिस और स्कूल स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद स्कूल परिसर में फेंक दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने ग़ुस्सा जताने के लिए स्कूल की दीवारों पर काला पेंट भी पोत दिया.
स्कूल प्रशासन ने अभी तक प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ लगे आरोपों पर कोई बयान नहीं दिया है.
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मामला क्या है?टाइम्स ऑफ़ इंडि़या की ख़बर के मुताबिक़, 31 मार्च को रांझी थाना क्षेत्र में दक्षिणपंथी संगठन ने दो बसों को रोका था. संगठन ने आरोप लगाया था कि बसों में सवार आदिवासियों को बहला-फुसलाकर और डरा-धमकाकर धर्मांतरण कराया जा रहा है. बसों में सवार सभी लोगों के नाम और पते रांझी थाने में दर्ज किए गए.
इस दौरान दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर 'हमला' किया. थाने में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में. धर्मांतरण के आरोपों पर हंगामा मचने के बाद ही प्रिंसिपल ने कथित तौरपर ‘विवादित पोस्ट’ की. सोशल मीडिया के ज़रिए जब हिंदू संगठनों तक ये जानकारी पहुंची, तो उन्होंने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया.
हंगामा होने की सूचना पर पुलिस बल स्कूल पहुंचा. इसके बावजूद दक्षिणपंथी संगठनों का हंगामा जारी रहा, जिसके चलते अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा. भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में आखिरकार स्थिति पर काबू पाया जा सका.
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