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'ट्रंप ने तो यूएस को ही मंदी में डुबोने का काम कर दिया... ', अमेरिकी जानकार ने बताया कि ऐसा क्यों

डॉनल्ड ट्रंप के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ़’ पर अलग-अलग देशों ने नाराज़गी जताई है. चीन ने ट्रंप का जवाब देते हुए अमेरिकी निर्यात पर 34 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है. जानकार इसे लेकर क्या बता रहे हैं?

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'टैरिफ़ वॉर' शुरू होने के बाद ग्लोबल शेयर मार्केट में गिरावट आई है. (फ़ोटो - इंडिया टुडे)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ़ नीति दुनियाभर में चर्चा का विषय है. ट्रंप का कहना है कि ये कदम विदेशों में अमेरिकी सामानों पर ‘अनुचित टैरिफ़’ के ख़िलाफ़ है. लेकिन आलोचक और वैश्विक नेता इसे अलग तरह से देखते हैं. उनका कहना है कि इससे अमेरिका को फ़ायदा नहीं, बल्कि नुक़सान होगा. जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने भी ट्रंप की व्यापार नीति की आलोचना की है.

डॉनल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल की तारीख को लिबरेशन डे यानी मुक्ति दिवस बताया है. इस दिन से अमेरिका में सभी आयातों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लग रहे हैं. ट्रंप के इस फ़ैसले पर यूरेशिया ग्रुप के प्रेसिडेंट और एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने भी राय रखी. इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए उन्होेंने कहा कि ट्रंप टैरिफ़ के ज़रिए बाक़ी देशों को अमेरिका के ख़िलाफ़ खड़ा कर रहे हैं. उन्होंने कहा,

डॉनल्ड ट्रंप ने मैक्सिको, कनाडा और यूरोपियों सहयोगियों को अमेरिका के ख़िलाफ़ एकजुट कर दिया है. उनका मकसद दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त बाज़ार होना है. लेकिन उनकी नीति धीरे-धीरे अमेरिका के चारों तरफ़ टैरिफ़ की दीवार खड़ी कर रही है.

बता दें, ‘रेसिप्रोकल टैरिफ़’ को आसान भाषा में जवाबी टैरिफ़ कहा जाता है. यानी अगर एक देश टैरिफ़ लगा रहा है और दूसरा देश उसके बदले में टैरिफ़ लगाए, तो उसे रेसिप्रोकल टैरिफ़ कहते हैं. ट्रंप के इसी ‘रेसिप्रोकल टैरिफ़’ पर अलग-अलग देशों ने नाराज़गी जताई है. चीन ने ट्रंप का जवाब देते हुए अमेरिकी निर्यात पर 34 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है.

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे इस ट्रेड वॉर पर इयान ब्रेमर ने कहा,

ये शुरुआती नतीजे हैं और काफ़ी अहम हैं. विडंबना ये है कि ट्रंप के जवाब में चीन ने जो टैरिफ़ लगाया, उससे खतरा बढ़ता जाएगा. अब चीन कह रहा है कि वो वही रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगा रहा है, जिसकी ट्रंप बात करते हैं. ऐसे तो समान टैरिफ़ लगाने की बात कहते हुए सारे देश एक-दूसरे पर टैरिफ़ बढ़ाते जाएंगे.

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टैरिफ़ को लेकर जैसे-जैसे दुनियाभर में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. वैसे-वैसे अमेरिका में मंदी की आशंका भी बढ़ती जा रही है. इयान ब्रेमर के मुताबिक़,

इस साल अमेरिका के मंदी में फंसने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो गई है. यानी 60 प्रतिशत तक. इस जोखिम को ट्रंप ने पूरी तरह से ख़ुद से पैदा किया है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत थी. सिर्फ़ दो महीनों में एक व्यक्ति ने अपने फ़ैसलों के आधार पर ये संभावना बना दी है कि अमेरिका मंदी में चला जाएगा.

इयान ब्रेमर का कहना है कि भारत भी इसके असर से अछूता नहीं रहेगा. उन्होंने कहा,

भारत अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता और डिफेंस-टेक को लेकर संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है. इसके बावजूद ट्रंप भारत को इससे बख्शेंगे नहीं. ये भारत के लिए भी अच्छी ख़बर नहीं है. आप ग्रोथ खो रहे हैं. आप उन अमेरिकियों से दबे जा रहे हैं, जिनके साथ आपको साझेदारी करनी चाहिए.

बताते चलें, अमेरिका ने दुनिया के देशों पर 49 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है. सबसे अधिक टैरिफ (49 प्रतिशत) कंबोडिया पर लगाया गया है. लाओस पर 48 प्रतिशत और मेडागास्कर पर 47 प्रतिशत का टैक्स लगा है.

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