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जॉर्ज सोरोस ने जिस भारतीय कंपनी को फंड्स दिए, उसे USAID से 8 करोड़ रुपये मिले

George Soros News: ASAR ने ये स्पष्ट किया है कि उनको USAID से फंड मिले थे. ये पैसे उनकी ओर से दी गई सर्विस के लिए थे. उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि ये किस तरह की सर्विस थी.

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जॉर्ज सोरोस द्वारा फंड की जाने वाली एक कंपनी को USAID से आठ करोड़ रुपये मिले थे. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

ED ने अपनी जांच पाया है कि जॉर्ज सोरोस (George Soros) द्वारा फंड की जाने वाली एक भारतीय कंपनी को USAID से आठ करोड़ रुपये मिले थे. हाल ही में अमेरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने USAID की आलोचना की थी. उनकी सरकार ने इसे बंद करने की घोषणा की है. ट्रंप ने आरोप लगाया था कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इसका इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए करते थे.

‘सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड’ (SEDF) से बेंगलुरु की तीन कंपनियों को 25 करोड़ रुपये दिए गए. SEDF सोरोस द्वारा स्थापित कई संस्थाओं में से एक है. इन कंपनियों को 2021 से 2024 के बीच सोरोस का फंड मिला. ED इसी मामले को लेकर जांच कर रही है. आरोप है कि फंडिंग के लिए ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम’ (FEMA) का उल्लंघन किया गया है. इन्हीं कंपनियों में से एक है 'ASAR सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स'. 2022-23 में इस कंपनी को USAID से आठ करोड़ रुपये मिले थे. 

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि ASAR ने ये स्पष्ट किया है कि उनको USAID से फंड मिले थे. ये पैसे उनकी ओर से दी गई सर्विस के लिए थे. ASAR ने ये सर्विस दिल्ली स्थित पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक, ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर’ (CEEW) को दी थी. ये थिंक टैंक वैश्विक स्तर पर भारत के विकास की चुनौतियों को समझने पर केंद्रित है.

CEEW ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने बताया है,

CEEW का जॉर्ज सोरोस या ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से कोई संबंध नहीं है. CEEW का कभी भी जॉर्ज सोरोस या ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से कोई संबंध नहीं रहा है और न ही उसे उनसे कोई फंडिंग मिली है. ASAR सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स को CEEW द्वारा स्वच्छ हवा से संबंधित USAID परियोजना के तहत विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए  कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. ये परियोजना पहले ही समाप्त हो चुकी है. CEEW का इस स्तर पर ASAR से कोई मौजूदा संबंध नहीं है. CEEW को ASAR से संबंधित किसी भी सरकारी प्राधिकरण से कोई प्रश्न नहीं मिला है. हमारे पास किसी तीसरे पक्ष से संबंधित किसी भी चल रही जांच पर टिप्पणी करने का कोई कारण या आधार नहीं है.

अन्य दो कंपनियां जिन्हें SEDF से फंडिंग मिली वो हैं- रूटब्रिज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और रूटब्रिज एकेडमी लिमिटेड. SEDF ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ की निवेश शाखा है. 

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क्या खोज रही है ED?

ED जांच कर रही है कि USAID से मिले पैसों को किस मकसद के लिए इस्तेमाल किया गया. TOI की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को 2016 में गृह मंत्रालय द्वारा "अवांछनीय गतिविधियों" के कारण 'पूर्व संदर्भ श्रेणी' में रखा गया था. इस कैटेगरी में किसी भी भारतीय गैर-लाभकारी संगठन को फंड करने के लिए मंत्रालय से मंजूरी लेनी पड़ती है.

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