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64 साल पहले प्यार के लिए छोड़ा था घर, अब ऐसी हैपी एंडिंग हुई देखकर लोगों की आंखें भर आईं!

हर्ष और मृणु की ये कहानी बस एक शादी की बात नहीं, बल्कि हिम्मत, वफादारी और प्यार की जीत की दास्तान है.

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1961 में दोनों ने चुपके से शादी कर ली थी. उस दिन मृणु ने 10 रुपये की साड़ी पहनी थी, कोई भारी-भरकम लहंगा नहीं. (फोटो- इंस्टाग्राम)

आज बात होगी एक ऐसी लव स्टोरी की जिसे सुन दिल खुश हो जाएगा और आंखें नम! गुजरात के हर्ष और मृणु की कहानी, जो 64 साल पहले ‘भागे’ थे प्यार के लिए, और अब जाकर उनकी शादी का सपना पूरा हुआ. ये कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि सच्ची मोहब्बत की मिसाल है, जो समय की हर मार को झेलकर भी चमकती रही. ऐसी चमकी कि समाज के तानों को भी अपने में समा ले गई.

बात 1960 के दशक की है, जब हिंदुस्तान में लव मैरिज का मतलब था घरवालों से बगावत और समाज से ठन-ठन गोपाल. हर्ष एक जैन परिवार से थे, और मृणु ब्राह्मण परिवार की बेटी. स्कूल में दोनों की आंखें मिलीं. फिर चिट्ठियां चलने लगीं. काहे से उस जमाने में वॉट्सऐप तो था नहीं, तो प्यार का इजहार कागज पर शब्दों की गहराई से होता था.

लेकिन हर लव स्टोरी सफल हो जाए, ये कैसे हो सकता है! लव स्टोरी में विलेन ना हो तो क्या ही लव स्टोरी. यहां विलेन बने मृणु के घरवाले. जब उन्हें पता चला कि उनकी लाडली का दिल किसी जैन लड़के पर आ गया है, तो मानो आग सी लग गई. “नहीं, ये शादी नहीं हो सकती!”, घर में फरमान सुनाया गया.

अब हर्ष और मृणु के पास दो रास्ते थे. या तो प्यार को कुर्बान कर दें, या फिर दुनिया से लड़ लें. दोनों ने दूसरा रास्ता चुना. मृणु ने एक दोस्त के हाथ नोट छोड़ा,

"मैं वापस नहीं आ रही."

और वो हर्ष के साथ भाग निकलीं. 1961 में दोनों ने चुपके से शादी कर ली. उस दिन मृणु ने 10 रुपये की साड़ी पहनी थी, कोई भारी-भरकम लहंगा नहीं. शादी में न ढोल-नगाड़े, न रिश्तेदारों की भीड़. बस दो दिल थे, और उनका मिलन.

इसके बाद शुरू हुआ असली इम्तिहान. परिवार ने साथ छोड़ा, समाज ने ताने मारे, लेकिन इन दोनों ने हार नहीं मानी. अपने दम पर जिंदगी की कढ़ाई गढ़ डाली. बच्चों को जन्म दिया. घर बनाया, और प्यार को जिंदा रखा. ऐसा जिंदा रखा कि अब जिंदगानी बनी.

64 साल बाद दोनों की कहानी में ट्विस्ट आया. साल 2025. हर्ष और मृणु 80 के पार हो चुके थे. उनके बच्चों और नाती-पोतियों ने सोचा, "अब्बा-अम्मा को वो शादी तो दे दें, जो इनका सपना थी." सो प्लान बना, सरप्राइज तैयार हुआ. हर्ष और मृणु को एक दिन के लिए अलग किया गया. पहली बार, जब से वो भागे थे. सोचिए दोनों के लिए कितना अलग सा दिन रहा होगा. मृणु को दुल्हन बनाया गया, लाल जोड़ा पहनाया गया. और हर्ष को दूल्हा बनाकर घोड़ी पर चढ़ाया गया. फिर हुई धूमधाम से शादी. सात फेरे, मंगलसूत्र, और वो सब कुछ जो 64 साल पहले छूट गया था. परिवार, जो कभी खिलाफ था, आज तालियां बजा रहा था. खुशी से नाच-गा रहा था. और हां, पनीर भी तो रहा होगा!

सोशल मीडिया पर ये स्टोरी The Culture Gully नाम के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर की गई. और आग की तरह फैल गई. लोग बोले,

"ये है असली प्यार, जो कभी फीका नहीं पड़ता."

कोई तो भावुक हो गया, तो कोई बोला,

"भाई, ऐसी लव स्टोरी तो फिल्मों में भी नहीं मिलती."

हर्ष और मृणु की ये कहानी बस एक शादी की बात नहीं, बल्कि हिम्मत, वफादारी और प्यार की जीत की दास्तान है. 64 साल तक एक-दूसरे का हाथ थामे रखना कोई छोटी बात नहीं. ये दो शख्सियत इस बात की मिसाल हैं कि सच्चा प्यार वक्त की हर दीवार तोड़ देता है, और कभी-कभी दशकों बाद भी सपने पूरे कर देता है!

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