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कुंडली न मिली तो जामिया के प्रोफेसर ने तोड़ी शादी, अब रेप के आरोप में हुए अरेस्ट, नौकरी भी गई

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को रेप के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. प्रोफेसर पर महिला सहकर्मी ने रेप का आरोप लगाया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी प्रोफेसर को बर्खास्त कर दिया है. क्या है ये पूरा मामला?

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को पुलिस ने बुधवार, 26 मार्च को गिरफ्तार कर लिया. प्रोफेसर पर अपनी महिला सहकर्मी से रेप (Rape) का आरोप है. महिला ने पुलिस को बताया कि प्रोफेसर ने शादी का झांसा देकर उनके साथ रेप किया. पुलिस की कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस ने भी आरोपी प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. यूनिवर्सिटी ने बताया कि प्रोफेसर यूनिवर्सिटी में परमानेंट फैकल्टी नहीं थे, बल्कि संविदा पर रखे गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बताया कि यह घटना पिछले जून 2024 में दिल्ली के महारानी बाग इलाके में हुई थी. आरोपी और पीड़िता की मुलाकात पिछले साल अप्रैल में JMI यूनिवर्सिटी में हुई थी. इसके बाद आरोपी प्रोफेसर ने LinkedIn के जरिए महिला से फिर संपर्क किया और मिलने के 2 हफ्तों के भीतर ही उन्हें प्रपोज कर दिया. इस दौरान शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए. दोनों की फैमिली में शादी को लेकर बात भी चल रही थी.

बेमेल कुंडली के कारण तोड़ी शादी

पुलिस ने बताया कि अक्टूबर 2024 में आरोपी ने कुंडली न मिलने की बात कही और दोनों की शादी टूट गई. इसके बाद महिला थाने पहुंच गई. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. मामले की जांच की जा रही है. उधर जामिया प्रशासन ने इस मामले पर सख्त कदम उठाते हुए आरोपी प्रोफेसर को निलंबित कर दिया. विश्वविद्यालय ने साफ किया कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बयान जारी कर कहा,

यह साफ किया जाता है कि यौन उत्पीड़न की घटना विश्वविद्यालय परिसर के बाहर हुई और यह पूरी तरह से व्यक्तिगत मामला है. इस कथित घटना से जामिया मिल्लिया इस्लामिया का कोई संबंध नहीं है. विश्वविद्यालय में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) एक्टिव है और यहां नियमित रूप से जेंडर संवेदनशीलता जागरूकता कार्यक्रम (gender sensitisation initiatives) चलाए जाते हैं.

विश्वविद्यालय ने ये भी बताया कि आरोपी स्थायी (permanent) फैकल्टी नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी में संविदा (contractual) कर्मचारी था. प्रशासन इस गंभीर अपराध की कड़ी निंदा करता है और आरोपी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है.

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