देश में रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं. साथ ही जिन लोगों के पास नौकरी नहीं है, उन्होंने नौकरी की तलाश बंद कर दी है. लगभग 42 लाख भारतीयों की नौकरी भी खतरे में है. ये सभी दावे किए गए हैं एक रिपोर्ट में. नाम है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी रिपोर्ट (CMIE Report). CMIE की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के लेबर फोर्स में भी कमी आई है. लेबर फोर्स को ऐसे समझिए की देश में काम करने वाले लोगों की संख्या. जितने लोग एक देश में काम कर रहे होंगे, वही उस देश का लेबर फोर्स होगा.
42 लाख भारतीयों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा, CMIE की रिपोर्ट में दावा
CMIE Report के मुताबिक बाजारों में Employment के अवसर घट रहे हैं, लिहाजा लोगों ने रोजगार ढ़ूंढना ही बंद कर दिया है. अब वो उन लोगों में नहीं गिने जा रहे जो बेरोजगार हैं.

रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में देश का लेबर फोर्स 45.77 करोड़ था. लेकिन मार्च आते-आते इसमें 42 लाख की गिरावट देखने को मिली. मार्च 2025 में 45.35 करोड़ का लेबर फोर्स दर्ज किया गया. लेबर फोर्स के अलावा रिपोर्ट में बेरोजगारी और उससे जुड़े आंकड़े भी प्रकाशित किए गए हैं. इसके मुताबिक देश में बेरोजगार लोगों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है. फरवरी में बेरोजगारों की संख्या 3.86 करोड़ थी, जो मार्च में घट कर 3.5 करोड़ पर आ गई, माने लगभग 36 लाख की गिरावट. पढ़ कर ऐसा लगता है कि देश में बेरोजगारी कम हुई है. लेकिन इसके पीछे को कारण लोगों को रोजगार मिलना नहीं है.
रिपोर्ट के अनुसार बाजारों में रोजगार के अवसर भी घट रहे हैं, लिहाजा लोगों ने सक्रिय रूप से रोजगार ढ़ूंढना ही बंद कर दिया है. यानी अब वो उन लोगों में नहीं गिने जा रहे जो बेरोजगार हैं. अगर किसी देश में बेरोजगारी दर घटती है तो माना जाता है कि अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है. लेकिन CMIE रिपोर्ट में भारत में बेरोजगारी दर घटने का कारण लोगों को रोजगार मिलना नहीं, बल्कि रोजगार की तलाश बंद कर देना बताया जा रहा है. वजह है भर्तियां न होना. कुछ आंकड़ों पर नजर डालें तो
- ऑफिस कर्मचारियों की नियुक्ति में 2024 की तुलना में 1.4 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है. इसके पीछे रिटेल सेक्टर, तेल-गैस और शिक्षा जैसे सेक्टर्स में भर्तियों की कमी होना है.
- साल 2024 के मुकाबले रिटेल सेक्टर में 13 फीसदी, तेल-गैस में 10 फीसदी, शिक्षा क्षेत्र में 14 फीसदी और आईटी सेक्टर की भर्तियों में 3 फीसदी की कमी देखने को मिली हैं.
सरकार ने साल 2024-25 में अपने ई-मार्केटप्लेस (Electronic Marketplace) जेम के जरिए 10 लाख से अधिक भर्तियों की सुविधा दी. इस प्लेटफॉर्म पर 33 हजार से अधिक सर्विस प्रोवाइडर्स ने लोगों को न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) और निश्चित पेमेंट (Fixed Payment) जैसे कई मानकों के आधार पर नियुक्ति दी है. ये नियुक्ति अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर्स के यहां हुई. बावजूद इसके बेरोजगारी से लड़ने के लिए सरकार का प्रयास नाकाफी जान पड़ता है. कम से कम CMIE रिपोर्ट तो यही कहती है.
CMIE कहती है कि आम तौर पर हर महीने बेरोजगारों की संख्या में करीब 1 मिलियन (10 लाख) की बढ़ोतरी होती है. मार्च 2021 से मार्च 2025 के बीच हर महीने औसतन 9.9 लाख लोग बेरोजगारों की फेहरिस्त में जुड़ गए. लेकिन अब जो आंकड़े आए उसके हिसाब से बेरोजगारों की संख्या ही घट गई.
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CMIE के अनुसार 15 वर्ष से 59 वर्ष की उम्र के लोग कामकाजी आयु वर्ग (Working Age) में आते हैं. माने ये वो लोग हैं जो देश के लेबर फोर्स में योगदान दे सकते हैं बशर्ते इनके पास रोजगार का अवसर हो. वर्किंग ऐज के लोगों को मिलने वाले रोजगार में भी बीते साल के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है. इसके आंकड़े देखें तो दिसंबर 2024 में देश में 38 फीसदी से अधिक वर्किंग ऐज के पास रोजगार था. मार्च 2025 में ये संख्या घटकर 37.7 फीसदी हो गई .
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