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'कांग्रेस राज में तो...' लोकसभा में वक्फ बिल पर बवाल काट रहा था विपक्ष, अमित शाह ने सुना दिया

वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill 2025) जब सदन में पेश किया जा रहा था, तब कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि सरकार ये बिल जबरन थोप रही है. इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें जवाब दिया.

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अमित शाह और केसी वेणुगोपाल में बहस

मोदी सरकार (Narendra Modi) ने बुधवार को वक्फ बिल (Waqf Amendment Bill 2025) लोकसभा में पेश कर दिया. कांग्रेस के सांसद इस बिल का विरोध कर रहे हैं. बुधवार को जब किरेन रिजिजू सदन में बिल पेश करने जा रहे थे, तभी कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि सरकार ये कानून जबरन थोप रही है. इसमें संशोधन के लिए समय नहीं दिया गया.  इस पर अमित शाह ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि ये कांग्रेस के जमाने का बिल नहीं है. ये भाजपा की सरकार का बिल है, जो चर्चा और संशोधन के बाद सदन में आया है. कांग्रेस के जमाने में एक कमिटी होती थी, जो सिर्फ ठप्पा लगाती थी.

सदन में क्या हुआ

लंबे समय से चर्चा और बहस का केंद्र बने वक्फ बिल को बुधवार को सदन में पेश किया जा रहा था. स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) को दोपहर 12 बजे के आसपास बिल को पेश करने के लिए कहा. रिजिजू खड़े हुए और बिल पर बोलने ही जा रहे थे कि कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल अपनी जगह पर खड़े हो गए. वह बिल को लेकर कुछ कह रहे थे. स्पीकर ने कहा कि आप बोलिए तो वेणुगोपाल कहने लगे, 'इस तरह का बिल (वक्फ संशोधन विधेयक) जिसे आप सदन में ला रहे हैं, कम से कम सदस्यों के पास संशोधन करने का अधिकार होना चाहिए. आप कानून को जबरन थोप रहे हैं.'

वेणुगोपाल ने आगे कहा, 

वक्फ संशोधन बिल को दोपहर में सदस्यों के संज्ञान में लाया गया. इसमें संशोधन के लिए साढ़े 3 बजे का समय दिया गया. ऐसे में सदस्य कैसे संशोधन प्रस्तावित कर सकते हैं? यह ऐसा कानून है, जिसमें आपको संशोधन के लिए समय देना चाहिए था. संशोधन के लिए कई प्रावधान हैं लेकिन बिल्कुल भी समय नहीं दिया.

शाह ने दिया जवाब

केसी वेणुगोपाल की बात खत्म ही हुई थी कि गृहमंत्री अमित शाह खड़े हो गए. उन्होंने जवाब देते हुए कांग्रेस की पिछली सरकारों को भी लपेटे में ले लिया. अमित शाह ने कहा,

स्पीकर द्वारा इस बिल को जेपीसी के पास भेजा गया था. विपक्ष का भी यही आग्रह था. कमिटी ने इस पर सुविचारित रूप से अपना मत प्रकट किया. वो जो मत प्रकट हुआ वो फिर से कैबिनेट के सामने गया. कमिटी के जो सुझाव थे, कैबिनेट ने उसे स्वीकार किया और अमेंडमेंट के रूप में किरेन रिजिजू जी बिल को सदन में लेकर आए.

शाह ने आगे कहा, 

आपका (कांग्रेस) ही आग्रह था कि जेपीसी बने. अगर कमिटी ने कोई बदलाव ही नहीं करने हैं तो... ये कांग्रेस जैसी कमिटी नहीं है. हमारी लोकतांत्रिक कमिटी है जो दिमाग चलाती है. कांग्रेस के जमाने में कमिटियां होती थीं जो ठप्पा लगाती थीं. हमारी कमिटी चर्चा करती है, विचार करती है और परिवर्तन करती है. अगर परिवर्तन को स्वीकार ही नहीं करना है तो कमिटी काहे को ली है.

बता दें कि बुधवार को मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में पेश कर दिया. इससे पहले पिछले साल अगस्त में इसे सदन में लाया गया था. तब इसे जांच के लिए जेपीसी को सौंप दिया गया था. जेपीसी की सिफारिश के बाद बदलाव के साथ बिल को फिर से लोकसभा में पेश किया गया है. इस पर कांग्रेस और सपा समेत सभी विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. 

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