सितंबर की बात है. Kerala में एक ईटिंग कम्पटीशन चल रहा था. होड़ लगी थी ज़्यादा से ज़्यादा इडली खाने की. हर कोई जल्दी-जल्दी ज़्यादा से ज़्यादा इडली खाने की कोशिश कर रहा था. माहौल एकदम झक्कास था. खुशी का. ठिठोली का. तभी भीड़ में मौजूद कुछ लोगों की नज़र पड़ती है एक 49 साल के आदमी पर. वो इस कम्पटीशन में हिस्सा ले रहा था. खाते-खाते उसके गले में इडली अटक गई. उसने इडली का वो टुकड़ा निकालने की कोशिश की. लेकिन, कुछ नहीं हुआ. आसपास वालों ने भी मदद की. मगर, सब नाकाफी. उसे तुरंत अस्पताल लेकर जाया गया. लेकिन, उसकी जान नहीं बच पाई (Man dies Choking on Idli Kerala).
जान ले सकता है गले में अटका खाना, ये तरीके बचा सकते हैं
खाना तब अटकता है, जब कोई टुकड़ा खाने की नली के बजाय सांस की नली में चला जाता है.
.webp?width=360)
ये घटना काफ़ी डराने वाली है क्योंकि गले में खाना-पानी फंसना बहुत आम है. हम में से कई लोगों के गले में अक्सर खाना फंस जाता है. इसलिए, इससे बचने का तरीका मालूम होना बहुत ज़रूरी है. ऐसे में आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि खाना-पानी गले में क्यों फंस जाता है, अगर समय पर मदद न मिले तो क्या होता है, अगर आपके आसपास किसी का गला चोक हो रहा है तो क्या करना चाहिए और अगर कोई आसपास नहीं है तो क्या करना चाहिए.
खाना-पानी गले में क्यों फंस जाता है?
ये हमें बताया डॉक्टर तुषार तायल ने.

जब खाने की कोई चीज़ सांस की नली में फंस जाए तो उसे चोकिंग (Choking) कहते हैं. दरअसल सांस की नली और खाने की नली बहुत पास-पास हैं. गले में एपिग्लॉटिस (Epiglottitis) नाम का एक ढक्कन भी होता है. जब हम खाना खाते हैं, उस वक़्त एपिग्लॉटिस सांस की नली को ढक कर रखता है. अगर किसी वजह से ये सांस की नली को न ढक पाए. तब खाते हुए कभी-कभार वो चीज़ सांस की नली में चली जाती है. इससे हम चोक होने लगते हैं.
चोकिंग कई वजहों से हो सकती है. जैसे अगर हम खाने को बिना चबाए खाएं या खाना जल्दी-जल्दी खाएं. अगर हम खाना खाते समय बात करें, तब भी ये हो सकता है. कई जेनेटिक या दिमागी कंडिशन के चलते लोग खाने को ढंग से निगल नहीं पाते. तब भी चोकिंग की दिक्कत हो सकती है.
अगर समय पर मदद न मिले तो क्या होता है?
अगर कोई इंसान चोक हो रहा है और उसे समय पर मदद न मिले तो कई दिक्कतें हो सकती हैं. चोक होने की वजह से फेफड़ों में ऑक्सीजन कम हो जाती है. इसके बाद दिमाग से फेफड़ों को मैसेज जाता है कि फंसी हुई चीज़ को निकालो. फिर हम खांसना शुरू करते हैं. अगर खांसने के बाद भी वो चीज़ नहीं निकलती तो खून में ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है. इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है जिसकी वजह से बेहोशी छा सकती है. अगर दिमाग को 4 से 6 मिनट तक ऑक्सीजन न मिले तो दिमाग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है. दिमाग डैमेज होने और ऑक्सीजन की कमी से हार्ट फेलियर या कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) हो सकता है.

अगर आपके आसपास कोई चोक हो रहा है तो क्या करना चाहिए?
अगर हमारे सामने कोई चोक कर रहा है तो हम कुछ चीजे़ं कर सकते हैं. अगर व्यक्ति होश में है और सांस ले रहा है, तो उसे खांसने को कहें. कमर के बीच पांच बार हल्के से मारें. हो सकता है कि इससे गले में अटकी चीज़ निकल जाए.
हेमलिच मेन्यूवर (The Heimlich maneuver) भी कर सकते हैं. इसमें चोक हो रहे इंसान के पीछे खड़े हों. फिर उसकी नाभि पर अपना एक हाथ रखें. अपना दूसरा हाथ पहले हाथ के ऊपर रखें. फिर पेट पर अंदर और ऊपर की ओर धक्का मारें. इससे सांस की नली में अटकी चीज़ बाहर निकल सकती है.
अगर इंसान खांसते-खांसते बेहोश हो गया है और उसने सांस लेना बंद कर दिया है, तो उसे तुरंत CPR दीजिए. CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (Cardiopulmonary resuscitation). इसमें व्यक्ति का सीना दबाया जाता है और मुंह से सांस दी जाती है. CPR देने के साथ ही तुरंत इमरजेंसी सर्विसेज़ या एंबुलेंस को फोन करें.
अगर कोई आसपास नहीं है तो क्या करना चाहिए?
अगर आप चोक हो रहे हैं और आसपास कोई मदद के लिए नहीं है, तब भी आप गले में फंसी चीज़ को बाहर निकाल सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले तेज़ी से खांसें और तब तक खांसते रहें जब तक वो चीज़ बाहर न निकल जाए. अगर ऐसा करने के बाद भी फंसी हुई चीज़ बाहर नहीं निकलती, तब अपना एक हाथ नाभि के ऊपर और दूसरा हाथ उस हाथ के ऊपर रखें. फिर अपने पेट पर अंदर की तरफ और ऊपर की ओर तेज़ से धक्का मारें. ऐसा बार-बार करने से गले में फंसी चीज़ बाहर निकल सकती है.
अगर आप अपने हाथ से पेट पर धक्का नहीं मार पा रहे. तब आप अपने आसपास रखी किसी कुर्सी या मेज़ पर झुक जाएं. जिससे आपका पेट उसके किनारे से सट जाए. फिर उस कुर्सी या मेज़ से अपने पेट पर अंदर की तरफ और ऊपर की ओर प्रेशर डालिए. इससे गले में अटकी चीज़ बाहर निकल जाएगी. इस बीच, अगर मुमकिन हो तो तुरंत अपने किसी जानने वाले को फोन या मैसेज करिए या फिर एंबुलेंस बुलाइए.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहतः कंधे, घुटने की हड्डी उखड़े तो क्या करें?