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Kalki 2898 AD का अश्वत्थामा क्यों कभी भी नहीं मरेगा?

Director Nag Ashwin की भयंकर, बड़े बजट की फ़िल्म Kalki 2898 AD रिलीज़ हो चुकी है. इसमें Amitabh Bachchan ने Ashwatthama का रोल किया है. अश्वत्थामा समेत वे आठ चिरंजीवी कौन हैं जो मान्यता मुताबिक हज़ारों साल से जिंदा हैं.

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उन आठ चिरंजीवी में से कुछेक के फैन्स / आर्टिस्टों द्वारा बनाए चित्र. विशुद्ध सांकेतिक उद्देश्यों के लिए.

माइथोलॉजी पहली कहानियां हैं जो सिनेमा में कही गईं. हाल तक Jason and the Argonauts (1963) और Clash of the Titans (2010) जैसी ग्रीक माइथोलॉजी भी दिखीं. Valhalla (2019) और Ragnarok (2020) जैसी नॉर्स माइथोलॉजी भी दिखती रहीं. हिंदु माइथोलॉजी पर रिसेंटली बहुत चाव से कुछ नहीं बनाया गया. डायरेक्टर Nag Ashwin की बड़ी फिल्म Kalki 2898 AD ने इस दिशा में कोशिश की है. Prabhas, Amitabh Bachchan, Deepika Padukone, Kamal Haasan, Disha Patni जैसे एक्टर्स फिल्म का हिस्सा हैं. मूल रूप से तेलुगु में बनी ये फ़िल्म पांच भाषाओं में रिलीज़ हुई है.

करीब 600 करोड़ रुपये के अभूतपूर्व बजट में बनी ये फ़िल्म इंडियन माइथोलॉजी के उन पन्नों को पलटना शुरू करेगी जो पहले नहीं हुआ. जैसे -

1. ये कल्कि (प्रभास - भैरवा) और कलि (कमल हसन) की पौराणिक कथा का नया फैंटेसी भरा वर्जन प्रस्तुत करेगी.

2. ये फ़िल्म 6000 सालों में घटने वाली कहानी करेगी. यानी - महाभारत से लेकर 2829 तक. यहीं से इसका नाम "कल्कि 2898 एडी" आया.

3. इस फिल्म के कई सीक्वल भी बनाए जाएंगे, बशर्ते पहला भाग हिट हो. इस सीरीज़ में 9 फिल्में आ सकती हैं. ये प्रभास स्टारर फ़िल्म के अन्य किरदारों की स्पिन-ऑफ फिल्में हो सकती हैं.

4. ये पहली फिल्म सीरीज़ होगी जो सिर्फ भारतीय नहीं बल्कि इंटरनेशनल सिनेमा मार्केट को टैप करने के मकसद से बनाई जा रही है. जिसके किरदार और कहानियों की जड़ें पुराणों से आएंगी लेकिन उनका मिजाज मॉडर्न होगा.

जिन 9 फ़िल्मों और स्पिन ऑफ किरदारों की बात हो रही है, इसे लेकर अभी कुछ बताया नहीं गया है. लेकिन एक इशारा है जो करीब एक महीने पहले मिला जब एक टीज़र वीडियो में फ़िल्म के एक किरदार को इंट्रोड्यूस किया गया, जिसे अमिताभ बच्चन ने प्ले किया है - अश्वत्थामा.

अश्वत्थामा के किरदार की एंट्री से कुछ ऐसे किरदारों को भी इस सीरीज़ में शामिल किया जाने के कयास खुलते हैं, जिन्हें लेकर कहा जाता है कि ये महामानव हैं. जो हज़ारों वर्षों से जीवित हैं. और जिनकी कभी मृत्यु नहीं होगी.

इन्हें सात या आठ चिरंजीवी के नाम से जाना जाता है. पुराणों के मुताबिक ये आज भी जीवित हैं और हमारे बीच ही कहीं घूम रहे हैं. विष्णु के दसवें अवतार कल्कि की सहायता करने के लिए.

ज़ाहिर है ये एक पौराणिक कल्पना है और वैज्ञानिक चेतना से इसे सत्य नहीं माना जाएगा. लेकिन हम बात सिनेमा और कहानियों के लिहाज से कर रहे हैं. जैसे Harry Potter Series की फ़िल्में एक कल्पना और मज़ेदार कल्पना हैं, उसी तरह ये कहानियां भी हैं.

आइए संक्षेप में जानते हैं ये चिरंजीवी कौन हैं:

1. अश्वत्थामा


वे पांडवों और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र है. वे महाभारत के ऐसे अमर पात्र है जिन्हें न तो कोई युद्ध में मार पाया और न ही युद्ध के बाद. अश्वत्थामा को अमर होने का वरदान नहीं बल्कि श्राप मिला था. श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को द्रौपदी के पुत्रों की हत्या करने के लिए उसे श्राप दिया था. जन्म से ही अश्वत्थामा के माथे पर एक मणि थी. इसी मणि के कारण अश्वत्थामा दैत्य, देवता , नाग, शस्त्र आदि से बिल्कुल नहीं डरता था. ये मणि अश्वत्थामा को भगवान शिव से प्राप्त हुई थी. श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के माथे पर प्रहार करके वो मणि छीन ली थी. जिसके बाद से अश्वत्थामा के माथे से खून बहता रहता है और घाव की बदबू आती रहती है. लगता है इसी वजह से Kalki 2898 AD में Ashwatthama का रोल कर रहे Amitabh Bachchan ने मुंह और शरीर पर कपड़ा लपेट रखा है. एक जगह तो उनके माथे पर मणि भी चमकती नज़र आती है. अश्वत्थामा को लेकर एक प्रचलित मान्यता भी है. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर असीरगढ़ का किला है. इस किले में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है. स्थानीय लोग मानते हैं कि अश्वत्थामा रोज़ इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने आते हैं.

2. राजा बलि
असुरों के राजा होने के बाद भी बलि को एक महान दानी राजा माना जाता है. बलि वैरोचन साम्राज्य के सम्राट थे. वैरोचन की राजधानी महाबलिपुर थी. इसने असुरों के गुरु शुक्राचार्य से प्रेरणा लेकर इंद्रलोक पर भी अधिकार जमा लिया था. जब बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया तो वामन रूप धारण कर विष्णु ने बलि से तीन पग भूमि दान में मांग ली. बलि ने संकल्प पूरा किया तो वामन ने इतना बड़ा रूप धारण कर लिया कि दो पगों में ही पूरी धरती और स्वर्ग नप गया. तीसरे पग के लिए बलि ने वामन के आगे अपना माथा नपवा दिया. प्रसन्न होकर विष्णु ने बलि को अमर होने का वरदान दे दिया.  

3. वेद व्यास
महर्षि पराशर और सत्यवति के पुत्र वेद व्यास अपने अथाह ज्ञान के लिए जाने जाते है. महर्षि व्यास ने ही वेद को चार भागों में विभाजित किया था. जिसके बाद ही महर्षि व्यास का नाम "वेद व्यास" पड़ा. उन्होंने ही 18 पुराणों, वेदांत सूत्र, महाभारत और श्रीमद्भागवत् गीता की रचना की. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार वे त्रिकाल दर्शी थे. उन्होंने दिव्य दृष्टि से जान लिया कि कलियुग में धर्म क्षीण हो जाएगा. जिससे मनुष्य नास्तिक, कर्तव्यहीन और अल्पायु हो जायगा. वो एक विशाल वेद का सांगोपांग अध्ययन न कर सकेगा. इसीलिए वेद व्यास ने वेद का चार भागों में विभाजन किया. ताकि कम बुद्धि वाले भी वेदों का अध्ययन कर सकें. वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र थे. इनका जन्म यमुना नदी के एक द्वीप पर हुआ था और इनका रंग सांवला था. इसी कारण ये कृष्ण द्वैपायन कहलाए. कृष्ण द्वैपायन ने धार्मिक और वैराग्य का जीवन जिया. लेकिन माता के आग्रह पर इन्होंने विचित्रवीर्य की दोनों सन्तानहीन रानियों को नियोग के नियम से दो पुत्र दिए जो धृतराष्ट्र और पाण्डु कहलाए. इनमें तीसरे विदुर भी थे.

4. हनुमान


वे वानरों के राजा केसरी और अंजनि के पुत्र हैं. वे एक दिव्य वानर थे जिनके पास अलौकिक शक्तियां थी. दक्षिण भारत के कुछ ग्रंथों में हनुमान को शिव और मोहिनी के पुत्र के रूप में दिखाया गया है. रामायण के अनुसार उनका जन्म भगवान राम की सहायता के लिए हुआ था. रामायण के पांचवें कांड में 14 साल के वनवास में हनुमान, राम से आखिरी साल में मिलते है. महाभारत में उन्हें भीमसेन के बड़े भाई के रूप में प्रस्तुत किया गया है. धार्मिक मान्यता है कि हनुमान आज भी जीवित है और हमारे बीच ही कहीं हैं.  

5. विभीषण
वे रामायण के एक प्रमुख पात्र और रावण के छोटे भाई हैं. रावण की तरह ही विभीषण भी जन्म से ब्रह्मराक्षस थे. उन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या करके वरदान मांगा था कि वो हमेशा धर्म की राह पर चलें. विभीषण भगवान राम के बड़े भक्त थे. रावण से युद्ध के दौरान विभीषण ने राम का साथ दिया. युद्ध के बाद राम ने विभीषण को लंका का राजा बना दिया. विभीषण के गुरु मुनिद्रा ऋषि थे. मुनिद्रा हनुमान जी के भी गुरु थे.  

6. कृपाचार्य
कुरुवंश के कुलगुरु होने के साथ-साथ कृपाचार्य एक महान योद्धा भी थे. ये अश्वत्थामा के मामा और कौरवों, पांडवों के कुलगुरु थे. कृपाचार्य ने कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ा था. कृपाचार्य ने कर्ण की मृत्यु के बाद दुर्योधन को पांडवों से संधि के लिए कहा था. 

7. परशुराम 
त्रेता युग में जन्मे परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है. उनके पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं. रेणुका ने पांच पुत्रों को जन्म दिया - वसुमान, वसुषेण, वसु, विश्वावसु और राम. विष्णु पुराण के अनुसार परशुराम का नाम "राम" था. जब शिवजी ने उन्हें अपना "परशु" (फरसा) नामक अस्त्र दिया तो उनका नाम परशुराम पड़ा. परशुराम शस्त्रविद्या के गुरु थे. परशुराम राम के पूर्व हुए थे, लेकिन वे चिरंजीवी होने के कारण राम के काल में भी थे. उन्होंने भीष्म पितामह, गुरु द्रोण और दानवीर कर्ण को शस्त्रविद्या प्रदान की थी. कलयुग में परशुराम ही भगवान कल्कि के गुरू होंगे.    

8. ऋषि मार्कंडेय
उन्हें भी अष्ट चिरंजीवियों में शुमार किया जाता है. अल्पायु लेकर जन्मे ऋषि मार्कंडेय भगवान शिव के बहुत बड़े उपासक थे. जीवन पूरा होने के बाद जब यमराज लेने आए तो भगवान शिव ख़ुद उनके प्राणों की रक्षा के लिए अवतरित हुए. उन्होंने ही मार्कंडेय ऋषि को अमरता का वरदान दिया. शिव के अत्यंत शक्तिशाली महामृत्युंजय मंत्र की रचना भी ऋषि मार्कंडेय ने की थी. मृत्यु का संकट दूर करने के लिए इस मंत्र को पढ़ा जाता है.

इन आठों चिरंजीवियों की ये कहानियां, मान्यताएं पुराणों में वर्णित हैं. इन कहानियों के थोड़े बदले बदले संस्करण पढ़ने में आते हैं. मौटे तौर पर कहानियां ये हैं. इन्हें हमने विशुद्ध रूप से सिनेमा में माइथोलॉजिकल स्टोरीटेलिंग के संदर्भ में प्रस्तुत किया है.

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे साथी वैभव ने की है.)
 

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