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Cannes 2024: कौन हैं पायल कपाड़िया, जिनकी फिल्म ने अवॉर्ड जीतकर इतिहास बना दिया

Payal Kapadia की फिल्म All We Imagine as Light ने Cannes Film Festival में का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार Grand Prix - Jury Prize जीता है.

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कान में ग्रां पी अवॉर्ड जीतने वाली पायल कपाड़िया भारत की पहली महिला फिल्ममेकर हैं.

77वें कान फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में भारत की पायल कपाड़िया (Payal Kapadia) ने इतिहास रच दिया है. पायल की फिल्म All We Imagine as Light ने कान का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार ग्रां प्री (Grand Prix - Jury Prize) अपने नाम कर लिया है. इस अवॉर्ड को जीतने वाली पायल भारत की पहली महिला फिल्ममेकर बन गई हैं. कान में पायल की फिल्म ‘ऑल वी इमैजिन एज़ लाइट’ का प्रीमियर 23 मई को हुआ था. तब इसे 8 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला था. फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाली दो नर्स की है. 

मंच पर अवॉर्ड लेने गईं पायल ने कहा,

 "थैंक्यू सो मच. इस कॉम्पटीशन में फिल्म का सेलेक्ट होना मेरे लिए सपने जैसा था. लेकिन यहां अवॉर्ड जीतना मेरी कल्पना से भी परे है. धन्यवाद. मैं मिगुएल गोम्स  (Miguel Gomes पुर्तगाल के फिल्ममेकर हैं. जिन्हें कान 2024 में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला है.) की बहुत बड़ी फैन हूं. इसलिए जो वो करते हैं, मैं भी उसका पालन करती हूं. मैं भी अपनी फिल्म के एक्टर्स को स्टेज पर बुलाना चाहती हूं. क्योंकि मुझे लगता है कि उनके बिना ये फिल्म संभव नहीं हो पाती. ये तीन महिलाएं हैं, जिन्होंने मुझे बहुत कुछ दिया है. फिल्म में भी इन्होंने एक परिवार की तरह योगदान दिया है और इसे अपना बनाया है. आप सभी का धन्यवाद."

पायल ने आगे कहा, 

"मैं बहुत घबराई हुई हूं. इसीलिए मैंने कुछ लिखा है. हमारी फिल्म को यहां लाने के लिए कान फिल्म फेस्टिवल का बहुत धन्यवाद. लेकिन अगली भारतीय फिल्म को यहां जगह देने में 30 और साल न लगा दें. मैं अपने प्रोड्यसूर्स का भी धन्यवाद देती हूं. जिन्होंने मेरे इस अजीब आइडिया को सपोर्ट किया. क्योंकि एक फिल्म बनाने के लिए गांव की आवश्यकता होती है. इसीलिए मेरी टीम और क्रू के बिना ये संभव नहीं था."

# कौन हैं पायल कपाड़िया

पायल कपाड़िया का जन्म मुंबई में हुआ. उन्होंने आंध्र प्रदेश के ऋषि वैली स्कूल से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वो वापस मुंबई लौटीं. यहां सेंट ज़ेवियर कॉलेज़ से उन्होंने इकोनॉमिक्स में ग्रेज़ुएशन किया. इसके बाद सोफिया कॉलेज़ से मास्टर्स की पढ़ाई की. फिर उन्होंने फिल्म डायरेक्शन की पढ़ाई के लिए फिल्म एंड टेलिविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) जॉइन किया. पायल की मां नलिनी मालिनी भारत की फर्स्ट जनरेशन वीडियो आर्टिस्ट हैं.

पायल ने करियर की शुरूआत शॉर्ट फिल्म से की थी. उन्होंने 2014 में पहली फिल्म Watermelon, Fish and Half Ghost बनाई थी. इसके बाद 2015 में Afternoon Clouds, साल 2017 में The Last Mango Before the Monsoon बनाई. पायल ने 2018 में And What is the Summer Saying डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी.

#फिल्म की कहानी

'ऑल वी इमेजिन एज़ लाइट' एक मलयालम-हिन्दी फीचर है. फिल्म में कनी कुश्रुति, दिव्या प्रभा, छाया कदम, ऋधु हरूण और अज़ीस नेदुमंगड़ जैसे एक्टर्स ने काम किया है. ये दो नर्सों (प्रभा और अनु) की कहानी है. वो साथ में रहती हैं. प्रभा की शादी अरेंज्ड है. उनका पति विदेश में रहता है. वहीं दूसरी तरफ अनु, प्रभा से छोटी हैं. उसकी शादी नहीं हुई. वो एक लड़के से प्यार करती हैं. प्रभा और अनु अपनी दो दोस्तों के साथ एक ट्रिप पर जाती हैं. जहां वो खुद की पहचान तलाशती हैं. एक्सप्लोर करती हैं. उन्हें आज़ादी के मायने समझ आते हैं. ये फिल्म इस समाज में महिला होने, एक महिला का जीवन और उनकी आज़ादी जैसे मसलों पर बात करती है.

पायल इससे पहले भी कान फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीत चुकी हैं. उन्होंने 2021 में 'ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग' (A Night of Knowing Nothing) नाम की एक डॉक्यूमेंट्री डायरेक्ट की थी. जिसे कान फिल्म फेस्ट में 2021 में दी गोल्डन आई अवॉर्ड मिला था. ये अवॉर्ड फेस्टिवल की बेस्ट डॉक्यूमेंट्री को दिया जाता है. 

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