दोपहर से पहले ही मध्य प्रदेश के नतीजे साफ हो गए हैं. एमपी एक बार फिर ‘मामा’ के हवाले होने वाला है. राज्य में बीजेपी ने 164 सीटों पर जीत दर्ज की है. ये जीत जितनी बड़ी बीजेपी की है उससे कहीं ज्यादा शिवराज सिंह चौहान की है. ग्राउंड पर गए पत्रकारों और चुनावी जानकारों ने सीधे तौर पर शिवराज को खारिज कर दिया था. एमपी में कांग्रेस की जीत काफी पहले ही घोषित की जाने लगी थी. लेकिन इन सबके बीच भी सीएम शिवराज की एक योजना काफी चर्चा बटोर रही थी. लाडली बहना योजना. दिल्ली से लेकर भोपाल तक इसी योजना का नाम लिया जा रहा था. और अबतक के चुनावी नतीजों को देखकर ये कहा जा सकता है शिवराज की इस योजना ने उनके सिर ‘ताज’ सजाने में अहम भूमिका निभाई है.
'लाडली बहना' ने कैसे कर दिया मध्य प्रदेश के चुनाव में खेला?
महिला वोटरों को साधनें की कोशिश ने बीजेपी को सफलता दिलाई. मार्च महीने में शिवराज ने योजना लॉन्च की. और आज नतीजे सबके सामने हैं.

इस योजना को आप का शिवराज सरकार के तरकश का आखिरी तीर भी कह सकते हैं. खाते में सीधे पैसा जाएं. योजना से जिसे लाभ मिले वो वोट में कन्वर्ट हो जाए. चुनाव होने में 10 महीने से भी कम का वक्त बचा था और सत्ता में वापसी की उम्मीद से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लेकर आते हैं. पांच मार्च को शिवराज अपना 65वां जन्मदिन मना रहे थे. और इसी दिन उन्होंने ऐलान किया 'लाडली बहना योजना' का.
ये योजना लाई गई थी मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए. इसके तहत राज्य की 23 से 60 साल की महिलाओं को एक हजार रुपये देने का वादा किया गया. तुरंत ऐलान कर दिया गया कि इस बार के बजट में 8 हजार करोड़ रुपए इस योजना के लिए आवंटित कर दिए जाएंगे. सीएम शिवराज ने बयान दिया कि वो अपनी सभी बहनों को लखपति बनते देखना चाहते हैं.
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योजना में आवेदन के लिए कुछ शर्तें थीं. जैसे, इसका लाभ सिर्फ उसी महिला को मिलेगा जो एमपी की निवासी हों. जिनकी आमदनी इनटैक्स के दायरे में न आती हो और जिनके परिवार की आमदनी 2.5 लाख से ज्यादा न हो. योजना का लाभ पाने के लिए महिला का विवाहित होना अनिवार्य है.
मार्च महीने में लाडली बहना योजना का ऐलान किया गया. पर लाभार्थियों तक रुपयों के पहली खेप पहुंचने में तीन महीने का वक्त लगा. जाहिर है, योजना का दायरा बड़ा था, सारी लिखा-पढ़ी पूरी होने में वक्त लगता है. राज्य की करीब सवा करोड़ महिलाओं का खाता खोला गया. जिनमें एक हजार रुपये भेजे जाने थे. 10 जून को शाम 6 बजे जबलपुर शहर में आयोजित किये गए एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘कम्प्यूटर’ के ‘माउस’ को ‘क्लिक’ किया जिसके बाद लाभार्थियों के बैंक के खातों में एक हज़ार रूपए की रक़म पहुंचनी होनी शुरू हो गयी. पहली राशि खाते में गए अभी तीन महीने भी नहीं बीते थे और शिवराज ने ऐलान कर दिया कि अब एक हजार नहीं साढ़े बारह सौ रुपये दिए जाएंगे.
दरअसल, बीजेपी के बड़े नेता इस योजना को गेम चेंजर मानने लगे थे. राज्य में प्रचार करने कोई भी 'लाडली बहना योजना' का जिक्र जरूर किया. प्रधान मंत्री मोदी और अमित शाह ने भी इस योजना का प्रचार किया. सीएम शिवराज ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर राज्य में उनकी सरकार फिर से बनती है तो लाडली बहना योजना की रकम 1250 रुपये से बढ़ाकर रु. 3000 कर दिया जाएगा. शिवराज के इन ऐलानों के नतीजे आज टीवी स्क्रीन पर टिमटिमाते चुनावी नतीजों में देखे जा सकते हैं.
दरअसल, बीजेपी इस योजना के सहारे महिला वोटों को साधने में जुटी थी. मध्य प्रदेश की 230 सीटों में 18 ऐसी सीटें हैं जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है. यानी यहां महिलाएं निर्णायक वोटर्स की भूमिका में हैं. साथ ही इस चुनाव में लगभग 13.39 लाख नए वोटर जुड़े. जिनमें 7 लाख से ज्यादा महिलाएं थीं. चुनाव से पहले बीजेपी ने महिला वोटरों तक सीधे पहुंचने की कोशिश की. जिसका फायदा बीजेपी को मिला भी.
कांग्रेस ने काट निकाला?कांग्रेस ने देखा कि यह योजना पॉपुलर हो रही है. उन्होंने ऐलान किया कि सत्ता में आए तो 'नारी सम्मान योजना' लाएंगे. वादा किया गया कि इस योजना के तहत हर उम्र की महिलाओं को रु.1500 प्रति माह दिए जाएंगे. कांग्रेस ने ऐलान तो कर दिया, लेकिन शायद महिलाओं का भरोसा जीत पाने में कांग्रेस नाकाम रही. यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में 100 सीटों का आंकड़ा छूने में नाकाम होती दिख रही है.