उत्तर प्रदेश में एक विधानसभा सीट के लिए उप-चुनाव कराए जा रहे हैं. ये सीट है मऊ ज़िले की घोसी विधानसभा (Ghosi Bypoll Elections). 2022 में घोसी से चुनाव जीते सपा नेता दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) के इस्तीफ़ा देकर BJP में आने की वजह से यहां चुनाव कराना पड़ा तो BJP ने फिर दारा सिंह को ही अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार दिया. लेकिन सवाल ये है कि जब एक सीट पर जीत या हार से न तो सत्तापक्ष में बैठी BJP को कोई फ़र्क पड़ने वाला है और न ही विपक्षी सपा को, तो फिर घोसी में दोनों पार्टियां इतना दम क्यों लगा रही हैं? आख़िर क्यों घोसी सीट BJP और सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है?
घोसी सीट में आखिर ऐसा क्या है जो CM योगी और अखिलेश यादव पूरा दम लगाए हुए हैं?
यूपी में घोसी विधानसभा सीट पर हो रहे उप चुनाव को NDA बनाम INDIA की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है. घोसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रचार करने जा रहे हैं और अखिलेश यादव भी. ऐसे में घोसी आखिरी क्यों इतनी महत्वपूर्ण सीट बन गई है?

लोकसभा चुनाव में अब महज़ 7 से 8 महीने बचे हैं. NDA और INDIA अपने-अपने तरीके से आम चुनाव की तैयारियां कर रहे हैं. ऐसे में घोसी सीट को NDA बनाम INDIA की लड़ाई की पहली परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. NDA में हाल ही में शामिल हुए सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पूर्वांचल में अपने प्रभाव का दम भरते हैं. खासतौर पर घोसी लोकसभा सीट राजभर के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है. ऐसे में ओम प्रकाश राजभर अगर अपने आप को साबित करना चाहते हैं, तो इस सीट पर उन्हें NDA को फायदा पहुंचाना होगा.
इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चाहेंगे कि घोसी की जीत को उनकी सरकार के कामकाज के प्रति लोगों की संतुष्टि के तौर पर पेश किया जा सके. इसीलिए ओम प्रकाश राजभर नामांकन के बाद से घोसी में डेरा डाले बैठे हैं तो ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो सितंबर को घोस में दारा सिंह के लिए वोट मांगेंगे.
बात करें विपक्षी गठबंधन INDIA की तो समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुधाकर सिंह को कांग्रेस ने अपना समर्थन देकर INDIA गठबंधन का धर्म निभाया है. सपा ने बार-बार INDIA में ख़ुद को UP का सबसे बड़ा दल दिखाने की कोशिश की है. ऐसे में अगर सपा घोसी नहीं जीत पाई तो INDIA में उसकी आवाज़ थोड़ी कमजोर पड़ सकती है. इसी वजह से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव घोसी में प्रचार करने पहुंच गए.
आम तौर पर उप-चुनाव में अखिलेश खुद प्रचार करने से बचते नज़र आये हैं. उनकी ख़ुद की लोकसभा सीट आज़मगढ़ और आज़म खान की सीट रामपुर में भी अखिलेश ने प्रचार से दूरी बनाई थी. लेकिन इस बार घोसी में अखिलेश यादव प्रचार कर ये साबित करने में लगे हैं कि चुनाव छोटा हो या बड़ा, सपा उसे गम्भीरता से ले रही है. कांग्रेस ने भी समर्थन देकर सपा से अपने ख़राब रिश्तों को लोकसभा से पहले ठीक करने की एक पहल की है.
किसकी किसकी प्रतिष्ठा दांव पर?घोसी के नतीजों से BJP या सपा के विधायकों की संख्या में एक नंबर के इज़ाफे के अलावा कोई असर नहीं होने वाला. नतीजे जो भी आएं, BJP की सत्ता बरकरार रहेगी और सपा भी विपक्ष में ही बैठेगी. लेकिन 2017 में योगी सरकार में मंत्री रहे दारा सिंह अगर हारे तो वो न घर के रहेंगे, न घाट के. 2022 के चुनाव से पहले दारा BJP छोड़ सपा में चले गए थे. सपा से चुनाव जीते लेकिन विपक्ष में बैठना पड़ा. ऐसे में विधायकी छोड़ BJP में आकर फिर से मंत्री बनने की तमन्ना पाले दारा अगर हारे तो विधायक भी नहीं रह पाएंगे.
इसके अलावा अपने बयानों के लिए चर्चित ओम प्रकाश राजभर के सामने भी परीक्षा में सफल होकर दिखाने की चुनौती है. अगर घोसी हारे तो लोकसभा में मोलभाव करने की क्षमता भी कम होगी और मंत्री बनने की उनकी दावेदारी को भी धक्का लग सकता है. ज़ाहिर है 2022 में पूर्वांचल में BJP का सूपड़ा साफ़ करने का दावा करने वाले राजभर से ये सवाल तो होगा ही जब अपने गढ़ में विधानसभा उप-चुनाव नहीं जीता पाए तो पूर्वांचल में BJP को क्या फ़ायदा दे पाएंगे?
मुस्लिम वोटों पर ख़ास नज़रराजनैतिक दलों के आंकड़ों की मानें तो घोसी विधानसभा सीट पर लगभग 60 हज़ार मुस्लिम वोट हैं. 2022 में मुस्लिम समुदाय ने सपा को भारी संख्या में वोट दिया था. वहीं BSP ने 2022 में मुस्लिम प्रत्याशी उतार कर मुस्लिम वोट खींचे थे. लेकिन घोसी में इस बार BSP चुनाव ही नहीं लड़ रही. कांग्रेस भी सपा का समर्थन कर रही है. और तो और, BJP ने भी पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने के लिए बड़ा अभियान छेड़ रखा है. खुद 15 अगस्त को PM मोदी ने लालक़िले से पसमांदा का ज़िक्र कर इस अभियान को धार देने की कोशिश की. अब फ़र्ज़ कीजिये कि मुस्लिम वोट BJP की तरफ न जाकर सपा प्रत्याशी के पक्ष में गया तो BJP का सारा समीकरण धरा का धरा रह सकता है. वहीं अगर मुस्लिम वोट टूटे और कुछ हिस्सा BJP को चला गया तो INDIA के सपने चकनाचूर हो सकते हैं.
घोसी के आंकड़े क्या हैं?घोसी सीट पर उप-चुनाव में 5 सितंबर को मतदान होगा और नतीजे 8 सितंबर को आएंगे. यहां यूं तो कुल 10 प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुक़ाबला BJP और समाजवादी पार्टी के बीच माना जा रहा है. BJP ने दारा सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं सपा ने पूर्व विधायक सुधाकर सिंह को उम्मीदवार बनाया है. घोसी सीट पर जातिगत समीकरण की बात करें तो सवर्ण लगभर 70 हज़ार, OBC लगभग डेढ़ लाख, दलित वोटर क़रीब 60 से 70 हज़ार और मुसलमान मतदाता भी लगभग 60 से 70 हज़ार के बीच माना जाता है.
OBC में भी चौहान और राजभर को मिलाकर एक लाख वोट होने का दावा किया जाता रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान ने 42.2 प्रतिशत वोट पाकर जीत दर्ज की थी. उन्होंने BJP प्रत्याशी विजय राजभर को क़रीब 22 हज़ार वोटों से हराया था. तब BSP के उम्मीदवार रहे वसीम इक़बाल को 54 हज़ार वोट मिले थे.
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